Donald Trump का UN में बड़ा बयान- Iran को दी ‘खत्म’ करने की चेतावनी
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया. ट्रंप ने कहा कि उनके सामने ईरान को लेकर एक बड़ा फैसला है, या तो ऐसा समझौता हो जिससे ईरान दोबारा निर्माण कर सके, या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से “annihilate” किया जाए.
ईरान को लेकर Donald Trump ने क्या कहा?
ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति कभी नहीं दी जाएगी. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था. ट्रंप के मुताबिक, ईरान बातचीत में देरी कर रहा है क्योंकि वह यह देखना चाहता है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है. ट्रंप ने कहा कि वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और ईरान के मामले में चुनाव उनके फैसले को प्रभावित नहीं करेगा.
ट्रंप ने कहा कि उनके सामने दो विकल्प हैं, ईरान के साथ ऐसा समझौता करना जिससे वह दोबारा आर्थिक और राष्ट्रीय स्तर पर निर्माण कर सके या फिर इस्लामिक रिपब्लिक को तेजी से खत्म करने की कार्रवाई करना. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चुनाव के बाद दोनों देशों के बीच समझौता हो जाएगा.
ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए आर्थिक अलगाव की नीति का भी समर्थन किया. उनका भाषण ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों का विस्तार किया है और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बहाल करने पर भी जोर दे रहा है.
Donald Trump ने अमेरिका की सैन्य ताकत का भी किया जिक्र
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अपनी सैन्य कार्रवाइयों के लिए पर्याप्त हथियार और गोला-बारूद मौजूद है. उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज किया जिनमें ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी हथियार भंडार पर दबाव पड़ने की बात कही गई थी. हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग के इंस्पेक्टर जनरल की हालिया रिपोर्ट में युद्ध के कारण कुछ हथियारों की रणनीतिक कमी की बात सामने आई थी.
वेनेजुएला और पश्चिमी गोलार्ध पर भी कड़ा संदेश
ट्रंप ने वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई को भी अपने भाषण में प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अपने राष्ट्रीय हितों के लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा. ट्रंप ने ड्रग कार्टेल को “पश्चिमी गोलार्ध का ISIS” बताते हुए उन्हें सभ्यता के लिए खतरा बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने क्षेत्र में ऐसे खतरों को पैर जमाने की अनुमति नहीं देगा. उन्होंने क्यूबा को भी “पूरी तरह विफल राज्य” बताया और अमेरिकी हितों के खिलाफ गतिविधियों को लेकर उस पर निशाना साधा.
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध का भी उल्लेख किया और संघर्ष को समाप्त कराने की अपनी कोशिशों पर जोर दिया. उन्होंने यूक्रेन में जारी लड़ाई को खत्म करने की जरूरत बताई और शांति समझौते की दिशा में काम करने की बात कही.
ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ समझौते का उल्लेख
ट्रंप ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए नए समझौते का भी उल्लेख किया. उन्होंने इसे क्षेत्र की सुरक्षा और NATO के व्यापक हितों से जोड़कर पेश किया. ट्रंप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI पर भी अपनी नीति स्पष्ट की. उन्होंने AI को “superintelligence” के रूप में पेश करते हुए कहा कि अमेरिका इस तकनीक के विकास को रोकने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्थाओं का समर्थन नहीं करेगा. उन्होंने AI को औद्योगिक क्रांति से भी बड़ा तकनीकी बदलाव बताते हुए इसके विकास में अमेरिका की अग्रणी भूमिका पर जोर दिया.
अमेरिकी संप्रभुता और सीमा सुरक्षा पर जोर
ट्रंप ने अपने भाषण में अमेरिकी संप्रभुता, सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन को भी प्रमुख मुद्दा बनाया. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी राष्ट्रीय नीतियां स्वयं तय करेगा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अमेरिकी फैसलों पर नियंत्रण नहीं करने दिया जाएगा. उन्होंने अवैध प्रवासन और ड्रग तस्करी को अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए सीमा नियंत्रण को अपनी नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया.
कुल मिलाकर, ट्रंप के इस साल के UN भाषण का सबसे प्रमुख संदेश ईरान को लेकर रहा. उन्होंने एक तरफ ईरान के साथ संभावित समझौते की संभावना जताई, वहीं दूसरी तरफ समझौता नहीं होने की स्थिति में इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ बेहद कठोर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.