Greenland में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विस्तार, Denmark-America ने नए रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर

Greenland में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विस्तार, Denmark -America ने नए रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर

Denmark , Greenland और America ने ग्रीनलैंड की रक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक नए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता 1951 में डेनमार्क और अमेरिका के बीच हुए ग्रीनलैंड रक्षा समझौते में संशोधन और उसके प्रावधानों के विस्तार से जुड़ा है. समझौते का उद्देश्य ग्रीनलैंड, उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र और अमेरिकी महाद्वीप की रक्षा के लिए तीनों पक्षों के बीच सैन्य सहयोग और अमेरिकी सैन्य पहुंच को मजबूत करना है. यह समझौता 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में किया गया.

समझौते में ग्रीनलैंड की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि की गई है. साथ ही इसमें कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ग्रीनलैंड के लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार प्राप्त है. समझौते में ग्रीनलैंड के पर्यावरण और वहां के लोगों की पारंपरिक जीवनशैली, जिसमें शिकार और मछली पकड़ना शामिल है, को ध्यान में रखने की बात भी कही गई है.

पिटफिक स्पेस बेस का होगा विस्तार

नए समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड स्थित पिटफिक स्पेस बेस में अपनी गतिविधियों को आधुनिक बनाने और उनका विस्तार करने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा नार्सारसुआक और मेस्टर्सविग में अतिरिक्त डिफेंस एरिया स्थापित करने का प्रावधान किया गया है. इन दोनों स्थानों पर नए सैन्य क्षेत्रों की स्थापना की तकनीकी और अन्य व्यवस्थाएं तीनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय की जाएंगी.

समझौता अमेरिका को भविष्य में ग्रीनलैंड में अतिरिक्त डिफेंस एरिया स्थापित करने की भी अनुमति देता है. इसके लिए प्रस्तावित क्षेत्र का स्थान, आकार, गतिविधियों का दायरा और पर्यावरण तथा अन्य प्रभावों को कम करने के उपायों का विवरण देना होगा. इस संबंध में फैसला आपसी सहमति से किया जाएगा. यदि स्थायी समिति में 90 दिनों के भीतर सहमति नहीं बनती है तो मामला पहले उप-मंत्री और उसके बाद मंत्री स्तर पर ले जाने का प्रावधान है.

Greenland की कंपनियों को अमेरिकी रक्षा ठेकों में प्राथमिकता

वीडियो क्रेडिट- The White House

समझौते में ग्रीनलैंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी ध्यान में रखा गया है. अमेरिका ग्रीनलैंड में डिफेंस एरिया के निर्माण, रखरखाव और सेवाओं से जुड़े सामान और सेवाओं के लिए जहां तक संभव होगा, ग्रीनलैंड के स्रोतों और कंपनियों को ठेके देने का प्रयास करेगा. इसके लिए 2020 के राजनयिक समझौतों को भी अपडेट किया जाएगा.

इसके अलावा ग्रीनलैंड में डिफेंस एरिया के बाहर मानव रहित सैन्य प्रतिष्ठान स्थापित करने के अमेरिकी अनुरोधों की डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारें तेज सरकारी मंजूरी प्रक्रिया के तहत समीक्षा करेंगी. इन प्रतिष्ठानों के स्थान, आकार, गतिविधियों और सुरक्षा तथा पर्यावरण से जुड़े उपायों को प्रस्ताव में शामिल करना होगा.

Greenland में अमेरिकी सैन्य आवाजाही को व्यापक अधिकार

समझौते में अमेरिकी सैन्य बलों, वाहनों, विमानों और सार्वजनिक जहाजों के लिए ग्रीनलैंड में सैन्य क्षेत्रों के बीच आवाजाही के व्यापक अधिकार दिए गए हैं. अमेरिका के विमान ग्रीनलैंड के किसी भी क्षेत्र में उड़ान भर और उतर सकेंगे, जबकि अमेरिकी सार्वजनिक जहाजों को ग्रीनलैंड के क्षेत्रीय जल में समुद्र के भीतर आवाजाही की अनुमति होगी. हालांकि इन अधिकारों का इस्तेमाल ग्रीनलैंड के समाज और वहां की पारंपरिक जीवनशैली का अधिकतम संभव सम्मान करते हुए किया जाना होगा.

NATO की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन

समझौते में आर्कटिक क्षेत्र में NATO की भागीदारी बढ़ाने का भी समर्थन किया गया है. इसमें आर्कटिक क्षेत्र में रक्षा योजना, सैन्य मौजूदगी, अभ्यास और संयुक्त खुफिया जानकारी जुटाने जैसे क्षेत्रों में NATO की भूमिका मजबूत करने की बात कही गई है. समझौते में कहा गया है कि आर्कटिक और हाई नॉर्थ में अन्य देशों की बढ़ती सैन्य गतिविधियां और रणनीतिक रुचि सुरक्षा चुनौतियां पैदा कर रही हैं.

डेनमार्क ने भी आर्कटिक में अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई है. समझौते के अनुसार डेनमार्क भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष क्षमताओं को शामिल करते हुए बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा. इसके तहत निगरानी, सैन्य मौजूदगी और NATO सहयोग तथा इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.

गैर-NATO देशों की सैन्य मौजूदगी और निवेश पर प्रतिबंध

समझौते में यह भी तय किया गया है कि NATO का सदस्य नहीं होने वाला कोई देश ग्रीनलैंड में अपना मानवयुक्त या मानव रहित सैन्य प्रतिष्ठान स्थापित नहीं कर सकेगा और न ही वहां अपनी सैन्य मौजूदगी स्थायी रूप से बनाए रख सकेगा, जब तक कि तीनों पक्ष इसके लिए अलग से सहमत न हों.

इसके अलावा ऐसे देशों या वहां के निवेशकों को ग्रीनलैंड के संवेदनशील क्षेत्रों में नियंत्रण, महत्वपूर्ण प्रभाव या ऐसी गैर-सार्वजनिक जानकारी तक पहुंच हासिल करने की अनुमति नहीं होगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पैदा हो सकता है. इसमें महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े क्षेत्र भी शामिल हैं.

समझौते की कोई समाप्ति तिथि नहीं

नए समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसकी कोई समाप्ति तिथि निर्धारित नहीं की गई है. इसमें बदलाव केवल पक्षों की आपसी सहमति से किया जा सकेगा. समझौते में यह भी कहा गया है कि अगर भविष्य में ग्रीनलैंड आत्मनिर्णय के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए स्वतंत्र देश बनता है, तो डेनमार्क और ग्रीनलैंड यह सुनिश्चित करेंगे कि स्वतंत्र ग्रीनलैंड NATO में बना रहे और इस समझौते तथा संबंधित रक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े अधिकारों और दायित्वों को स्वीकार करे.

हालांकि समझौता 22 सितंबर 2026 को किया गया है, यह तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होता. दस्तावेज के अनुसार इसके लागू होने के लिए डेनमार्क और ग्रीनलैंड की ओर से आवश्यक संसदीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अमेरिका को राजनयिक नोट के माध्यम से इसकी सूचना देना जरूरी है.

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