Rajnath Singh का बड़ा बयान: दुश्मन के इलाके में घुसकर कार्रवाई के लिए सेनाओं को पूरी छूट
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा है कि भारत ने अपनी रक्षा सेनाओं को देश के सामने आने वाले खतरों का निर्णायक जवाब देने के लिए पूरी स्वतंत्रता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय सेनाएं दुश्मन के इलाके में घुसकर भी कार्रवाई कर सकती हैं.
7 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के खिलाफ लंबे समय से कई तरह की साजिशें और हथकंडे अपनाए गए. इनमें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को गुमराह करना, आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध कराना, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देना तथा समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशें शामिल हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इन मंसूबों को लगातार नाकाम किया है और हर मोर्चे पर प्रभावी जवाब दिया है.
जम्मू-कश्मीर में युवाओं के लिए नए अवसर
राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार ने केवल आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं की, बल्कि गुमराह युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने, उनके पुनर्वास और उन्हें कट्टरपंथ से दूर करने पर भी ध्यान दिया है. इसके साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर तैयार किए गए हैं. उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और युवाओं के सामने विकास के नए अवसर खुले हैं.
सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की नीति अपनाई है. इसके तहत सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों में आतंकवादियों और उनके आकाओं को निशाना बनाया गया. उन्होंने सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे स्पष्ट संदेश गया है कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते.
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को बांटने की कोशिशों को भी जनता ने नाकाम किया. उन्होंने पूजा स्थलों को निशाना बनाकर किए गए हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि देशवासियों ने ऐसी साजिशों को खारिज कर एकता और सामाजिक सद्भाव का परिचय दिया.
‘भारत युद्ध नहीं चाहता, लेकिन कमजोरी न समझें’

रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत शांति में विश्वास रखता है और न तो युद्ध चाहता है और न ही किसी दूसरे देश की जमीन पर कब्जा करने की उसकी मंशा है. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि भारत की शांति की नीति को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ होने वाली आतंकवादी गतिविधियों का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो उसके साथ बातचीत नहीं होगी, बल्कि भारतीय रक्षा सेनाएं ऐसे खतरों का प्रभावी जवाब देंगी. उन्होंने कहा, “युद्ध के डर से कायम शांति निंदनीय है, जबकि शांति के लिए लड़ा गया युद्ध सम्मान के योग्य है.”
युद्ध का स्वरूप बदल रहा है
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं है. अंतरिक्ष और साइबर स्पेस भी संघर्ष के नए क्षेत्र बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, स्वायत्त प्रणालियां और सटीक निशाना लगाने वाले हथियार युद्ध के स्वरूप को तेजी से बदल रहे हैं. सरकार देश की रक्षा रणनीति और सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रही है. रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा राष्ट्र बनना है, जो अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का स्वदेशी रूप से विकास और निर्माण करने में सक्षम हो.
ब्रह्मोस की बढ़ी क्षमता ऑपरेशन सिंदूर में आई काम

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा नीति अब केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक सक्रिय और प्रो-एक्टिव हो गई है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति और नेतृत्व के कारण भारत वर्ष 2016 में मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) का सदस्य बना. उनके अनुसार, MTCR सदस्यता के बाद ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता और रेंज बढ़ाने के प्रयासों को गति मिली. रक्षा मंत्री ने कहा कि ब्रह्मोस की बढ़ी हुई क्षमता ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई.
रक्षा उत्पादन 40 हजार करोड़ से बढ़कर 1.80 लाख करोड़ रुपये
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में सीमा सुरक्षा मजबूत करने, सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आयुध कारखानों में सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. उन्होंने बताया कि 2014 से पहले भारत का रक्षा उत्पादन करीब 40 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है. इसी तरह रक्षा निर्यात में भी बड़ा इजाफा हुआ है और यह 56 गुना बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है. उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भर रहने के बजाय स्वदेशी उत्पादन और आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है.
आकाशतीर से तेजस और विक्रांत तक स्वदेशी ताकत

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेनाओं के पास आज स्वदेशी आकाशतीर एयर डिफेंस कंट्रोल सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसी आधुनिक प्रणालियां मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि भारत ने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर, तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक तथा आधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियां भी विकसित की हैं.
इसके अलावा, भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत भी भारतीय नौसेना में शामिल हो चुका है. उन्होंने कहा कि भारत अब विभिन्न प्रकार के रक्षा उपकरणों का स्वदेशी निर्माण कर रहा है और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास की दिशा में भी काम कर रहा है. सरकार ने वर्ष 2029 तक 50 हजार करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात का लक्ष्य रखा है.
सभी 16 DPSU अब मुनाफे में
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSU) अब बिना घाटे के उत्पादन कर रहे हैं. ये संस्थान अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाने के साथ-साथ निर्यात के नए अवसर भी तलाश रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत का रक्षा बजट करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 8 लाख करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने कहा कि बजट का इस्तेमाल पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है.
राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र और MSME की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि अब 16 हजार से अधिक MSME रक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित रक्षा औद्योगिक गलियारों के लिए करीब 70 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनमें से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश पहले ही किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि iDEX और iDEX-Prime जैसी पहलों के जरिए रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है. रक्षा क्षेत्र में स्टार्ट-अप की संख्या भी 2018 में कुछ दर्जन से बढ़कर अब 2 हजार से अधिक हो गई है.
हाइपरसोनिक तकनीक पर भी जोर
रक्षा मंत्री ने युवाओं से नौकरी तलाशने वालों के बजाय रोजगार देने वाले और नवाचार करने वाले बनने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय रक्षा क्षेत्र में नए और प्रतिभाशाली विचारों को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है. उन्होंने उद्योग, शिक्षण संस्थानों, स्टार्ट-अप और वैज्ञानिकों को एक मंच पर लाने की DRDO की पहल की सराहना की. राजनाथ सिंह ने मई में स्क्रैमजेट कंबस्टर के सफल परीक्षण को हाइपरसोनिक मिसाइल के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.
उन्होंने बताया कि सरकार ने DRDO द्वारा विकसित मिसाइल तकनीकों को भारतीय उद्योग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है, ताकि निजी कंपनियां इन तकनीकों का उत्पादन कर सकें और रक्षा बलों को आवश्यक प्रणालियां समय पर उपलब्ध कराई जा सकें.
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना नहीं है, बल्कि ऐसा मजबूत रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के साथ आर्थिक विकास को गति दे और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में भारत की भूमिका को मजबूत बनाए. उन्होंने विश्वास जताया कि वर्ष 2047 तक भारत विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करने के साथ-साथ तकनीक, अर्थव्यवस्था और रक्षा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता भी हासिल करेगा.