DAC ने 1.10 लाख करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को दी AoN, 98% खरीद भारतीय उद्योग से होगी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 7 सितंबर 2026 को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में सशस्त्र बलों के लिए विभिन्न रक्षा खरीद प्रस्तावों को आवश्यकता की स्वीकृति (AoN) प्रदान की गई. इन प्रस्तावों की कुल अनुमानित लागत करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये है. स्वीकृत प्रस्तावों में से लगभग 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योगों से की जाएगी.
भारतीय थल सेना के लिए रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) टोही वाहन, उच्च गतिशीलता वाले वाहन (HMV), स्वचालित यांत्रिक बारूदी सुरंग बिछाने वाले वाहन (MML), उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH), ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टमकी खरीद को मंजूरी दी गई है.
नई सैन्य प्रणालियों से बढ़ेगी थल सेना की परिचालन क्षमता

CBRN टोही वाहन दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, CBRN एजेंटों की पहचान करने, निगरानी करने और ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करने में सक्षम होंगे. HMV चुनौतीपूर्ण भू-भाग में परिचालन गतिशीलता और रसद सहायता को मजबूत करेंगे, जबकि MML कठिन भू-भाग में तेजी से बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता प्रदान करेंगे.
ALH का इस्तेमाल भारतीय थल सेना और भारतीय वायु सेना द्वारा विभिन्न भू-भाग और परिचालन परिस्थितियों में जटिल अभियानों के लिए किया जाएगा. ट्रॉल टैंक और सर्वत्र ब्रिज सिस्टम विभिन्न भू-भाग में अभियानों के दौरान लड़ाकू दस्तों को बाधाओं को पार करने और आगे बढ़ने में मदद करेंगे.
नौसेना के लिए अरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइन के विकास को मिली मंजूरी

भारतीय नौसेना के लिए अरुध्रा रडार और मरीन गैस टर्बाइन (MGT) के डिजाइन एवं विकास तथा इसके बाद उनकी खरीद के प्रस्तावों को भी AoN दी गई. अरुध्रा रडार विभिन्न नौसैनिक वायु स्टेशनों पर मौजूदा एयर रूट सर्विलांस रडार की जगह लेगा. वहीं, MGT युद्धपोतों की प्रणोदन प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है और इसके स्वदेशी विकास से विदेशी विक्रेताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
वायु सेना के लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
भारतीय वायु सेना के लिए लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्धक क्षमता बढ़ाने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इसके साथ ही ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (GBMPJ) की खरीद और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड (DEFSAC) प्रणाली स्थापित करने को भी AoN प्रदान की गई.
GBMPJ दुश्मन के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग क्षमता प्रदान करेगा. DEFSAC प्रणाली मौजूदा कागज-आधारित पहचान पत्रों, पास और परमिट की जगह इंटरऑपरेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित स्मार्ट कार्ड व्यवस्था लागू करेगी. डीएसी की इन मंजूरियों से तीनों सेनाओं की परिचालन क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ स्वदेशी रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.