UN General Assembly में S Jaishankar ने कहा- आतंकवाद, युद्ध और वैश्विक अस्थिरता से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी
भारत ने UN General Assembly के 81वें सत्र में दुनिया में बढ़ते संघर्षों, आतंकवाद, वैश्विक अस्थिरता, पश्चिम एशिया और यूक्रेन के युद्ध, समुद्री सुरक्षा, ग्लोबल साउथ की चुनौतियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा . भारत की ओर से 26 सितंबर को महासभा की General Debate में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वक्तव्य दिया.
जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए देशों को तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने पर जोर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि युद्ध का असर केवल संघर्ष वाले देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ती है.
खाड़ी संघर्ष पर जयशंकर ने जताई चिंता
एस. जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि व्यावसायिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले नाविकों को निशाना बनाया जाना स्वीकार्य नहीं है. भारत की ओर से उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऊर्जा तथा व्यापार के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखने की अपील की.
जयशंकर ने विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों का मुद्दा उठाया. उन्होंने ऐसे हमलों में लोगों की जान जाने को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया.
यूक्रेन में जारी युद्ध को लेकर जयशंकर ने कहा कि यह भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख को दोहराया कि अंतहीन युद्ध अब समाप्त होना चाहिए.
जयशंकर ने शांति स्थापित करने के लिए चल रही पहलों का समर्थन किया और कहा कि इस प्रक्रिया के साथ नाविकों की सुरक्षा तथा खाद्यान्न और ऊर्जा की आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारत खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति को सुधारने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है.
पश्चिम एशिया में दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हिंसा पर भारत का पक्ष रखते हुए जयशंकर ने स्थायी और टिकाऊ शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत प्रयासों में योगदान दे रहा है.
जयशंकर ने UN General Assembly में कहा कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति का नाम नहीं है. इसके लिए स्थिरता, सुरक्षा और पूर्वानुमेयता भी जरूरी है. उनके अनुसार, इन तत्वों को कमजोर किए जाने से वैश्विक शांति भी प्रभावित होती है.
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में वित्त, बाजार पहुंच, सप्लाई चेन और तकनीक समेत कई क्षेत्रों का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धा और दबाव के साधन के रूप में किया जा रहा है. उन्होंने संसाधनों और कनेक्टिविटी के बढ़ते रणनीतिक इस्तेमाल की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में कई देश जोखिम कम करने और अपनी निर्भरता को विविध बनाने पर ध्यान दे रहे हैं.
ग्लोबल साउथ के सामने 4F चुनौती
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त यानी 4F से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख मुद्दा बताया. उन्होंने सुपर एल नीनो, उर्वरक की कमी और अनाज की आवाजाही में आ रही बाधाओं को चिंता का कारण बताया.
उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों यानी SDG की प्रगति पर भी दबाव बढ़ रहा है. जयशंकर के अनुसार, गैर-बाजार आधारित गतिविधियों और बाजार तक पहुंच से इनकार जैसी स्थितियां ग्लोबल साउथ के औद्योगिकीकरण के अधिकार को प्रभावित कर रही हैं.
आतंकवाद पर एस. जयशंकर का कड़ा संदेश

आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए जयशंकर ने इसे शांति के लिए लगातार बने हुए खतरे के रूप में बताया. उन्होंने कहा कि जब आतंकवाद को राज्य प्रायोजित तरीके से और सीमा पार उद्देश्य के साथ अंजाम दिया जाता है, तो यह वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बन जाता है.
जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के रुख में कोई कमी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क को उजागर करने और रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया.
भारत की ओर से बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि पिछली शाम आतंकवाद के एक लगातार समर्थक ने महासभा में तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया और आतंकवाद को सामान्य बनाने तथा उसके परिणामों से छूट देने की कोशिश की. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा. जयशंकर ने कहा कि दोस्ती और सद्भाव आतंकवाद के साथ एक साथ नहीं चल सकते और ऐसी परिस्थितियों पर आधारित समझ की समीक्षा स्वाभाविक रूप से होगी.
अपने राष्ट्रीय वक्तव्य में जयशंकर ने भारत की विकास यात्रा का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि समावेशी विकास और व्यापक प्रगति ने दुनिया की लगभग एक-छठी आबादी के विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाया है. उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, पेयजल, बिजली, सड़क और आवास जैसी सुविधाओं में सुधार का उल्लेख किया. जयशंकर ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर शासन और सामाजिक-आर्थिक लाभ पहुंचाने वाली व्यवस्था का आधार बताया.
उन्होंने बुनियादी ढांचे के विकास, कारोबार करने में आसानी, जीवन को आसान बनाने, स्टार्टअप और नवाचार तथा विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे मिशनों का भी जिक्र किया.
78 देशों में 600 विकास परियोजनाओं का उल्लेख
जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी विकास संबंधी उपलब्धियों और अनुभवों को दूसरे देशों के साथ साझा करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि 78 देशों में 600 प्रमुख भारतीय विकास परियोजनाएं इस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का दायरा बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और कृषि से लेकर आईटी तथा क्षमता निर्माण तक फैला है.
जलवायु कार्रवाई से जुड़े भारत के प्रयासों का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ पानी, टिकाऊ कृषि तथा तकनीक और बेहतर प्रक्रियाओं को साझा करने की बात कही. उन्होंने अफ्रीकी देशों और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों को भारत का प्रमुख साझेदार बताया. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन और ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस जैसी पहलों का भी उल्लेख किया.
जयशंकर ने कहा कि भारत ने संघर्ष वाले क्षेत्रों, महामारी प्रभावित स्थानों और प्राकृतिक आपदाओं के बाद चिकित्सा सामग्री भेजी है. उन्होंने भारत को जरूरत के समय शुरुआती मदद पहुंचाने वाला देश बताते हुए नेपाल में अचानक आई बाढ़ और वेनेजुएला में आए भूकंप का उदाहरण दिया. उन्होंने भोजन और दवाओं की कमी, ऊर्जा और उर्वरक की जरूरत तथा रोजगार के अवसर पैदा करने के क्षेत्र में भारत के योगदान का भी उल्लेख किया.
UN शांति अभियानों में भारत की भूमिका
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत की लंबे समय से चली आ रही भागीदारी का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि इस समय भारतीय टुकड़ियां 11 में से 9 शांति मिशन के तहत तैनात हैं.
उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने दबाव की परिस्थितियों में भी दृढ़ता और पेशेवर तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाई है. जयशंकर ने यह भी बताया कि एक भारतीय महिला कॉम्बैट हेलीकॉप्टर पायलट को UN 2025 Military Gender Advocate of the Year पुरस्कार मिला.
जयशंकर ने खाड़ी, लाल सागर और काला सागर में व्यावसायिक जहाजों तथा नाविकों पर हुए हमलों पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि भारतीय नाविकों समेत विभिन्न देशों के नाविकों की जान गई है और ऐसी घटनाएं पूरी तरह अस्वीकार्य हैं.
उन्होंने बताया कि भारत ने लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर व्यावसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाए जाने के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करने की पहल में हिस्सा लिया है. जयशंकर ने कहा कि जहाजों और नाविकों की सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कानून का कड़ाई से पालन जरूरी है.
AI को लेकर भारत की नीति

कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भारत का पक्ष रखते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने इस साल फरवरी में AI Impact Summit की मेजबानी की, जिसमें इस क्षेत्र के विशेषज्ञ और प्रमुख लोग शामिल हुए.
उन्होंने AI को मानव सशक्तीकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े स्तर पर समस्याओं के समाधान का माध्यम बताया. साथ ही जयशंकर ने कहा कि प्रत्येक देश को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुरूप अपने AI इकोसिस्टम, मॉडल और तैनाती रणनीति विकसित करने का अधिकार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी में AI महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
जयशंकर ने कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और 1945 के बाद बनी वैश्विक व्यवस्था नई वास्तविकताओं के अनुरूप बदल रही है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव आसान नहीं होगा और मौजूदा वैश्विक अस्थिरता का एक कारण इसी परिवर्तन से जुड़ी कठिनाइयां हैं.
उन्होंने कहा कि विविधतापूर्ण दुनिया को अधिक लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ने से नहीं रोका जा सकता. बहुलतावादी व्यवस्था में शांति के लिए संवाद, व्यापक विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया जरूरी है.
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया.
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के करीब एक दशक के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उनके बहुपक्षवाद के क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने खास तौर पर Mission LiFE के लिए गुटेरेस के व्यक्तिगत समर्थन का उल्लेख किया.
अंत में जयशंकर ने कहा कि महासभा के इस सत्र के बाद सभी देशों को शांति, विकास और समृद्धि के प्रति ज्यादा प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने महात्मा गांधी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि शांति तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है, बल्कि शांति ही रास्ता है.