Benjamin Netanyahu का UN में ईरान और गाजा पर हमला,हमास से लेकर ट्रंप और ममदानी तक पर साधा निशाना
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 24 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान, गाजा युद्ध, हमास, हिजबुल्लाह और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया. उन्होंने अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ इजरायल की साझेदारी की सराहना की और अपने आलोचकों, पश्चिमी देशों के कुछ नेताओं तथा न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी तीखी टिप्पणी की. उनके भाषण की शुरुआत के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि सदन से बाहर चले गए.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि 14 साल पहले उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के इसी मंच से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की बात कही थी. उन्होंने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर इजरायली हमलों को सही ठहराते हुए कहा कि इन सुविधाओं को नष्ट करना कठिन था, लेकिन प्रधानमंत्री के तौर पर उनके लिए यह सबसे आसान फैसलों में से एक था. उनके मुताबिक, अगर ऐसा नहीं किया जाता तो इजरायल और दुनिया के लिए गंभीर खतरा पैदा होता.
ईरान के खिलाफ कार्रवाई को बताया सुरक्षा का कदम
नेतन्याहू ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई केवल इजरायल की सुरक्षा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इससे उन देशों को भी सुरक्षा मिली जिनके प्रतिनिधि उनके भाषण के दौरान सदन से बाहर चले गए. उन्होंने कहा कि कुछ देशों के नेता निजी तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई के लिए धन्यवाद भी देते हैं.
उन्होंने ईरान के मौजूदा शासन पर भी हमला बोला. नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी जनता एक दिन स्वतंत्र होगी और मौजूदा शासन अपने कथित झूठ, भ्रष्टाचार और दमन के कारण समाप्त हो जाएगा. उन्होंने ईरान में इंटरनेट सेंसरशिप का जिक्र करते हुए संयुक्त राष्ट्र में स्टारलिंक का एक उपकरण दिखाया और कहा कि इसे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को दिया जा सकता है, ताकि वे भविष्य में सोशल मीडिया पर अपनी बात स्वतंत्र रूप से रख सकें.
गाजा युद्ध और नरसंहार के आरोपों पर इजरायल का बचाव
गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू ने नरसंहार के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि इजरायल ने नरसंहार नहीं किया, बल्कि उनके शब्दों में, “नरसंहार को रोका” है. उन्होंने दावा किया कि हमास ने नागरिकों को मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किया और अस्पतालों, स्कूलों तथा मस्जिदों को अपने सैन्य ढांचे के लिए इस्तेमाल किया.
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने गाजा के नागरिकों को लड़ाई वाले क्षेत्रों से हटाने के लिए चेतावनी संदेश, फोन कॉल और पर्चों का इस्तेमाल किया. उन्होंने यह भी दावा किया कि गाजा में बड़ी मात्रा में भोजन और पोलियो वैक्सीन पहुंचाई गई. नरसंहार के आरोपों को उन्होंने “सदी का सबसे बड़ा झूठ” बताया. ये सभी दावे नेतन्याहू के भाषण में किए गए दावे हैं.

हमास, हिजबुल्लाह और दूसरे मोर्चों का जिक्र
नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल एक साथ सात मोर्चों पर खतरे का सामना कर रहा है. उन्होंने हमास, हिजबुल्लाह, हूती, ईरान, इराक और सीरिया में मौजूद मिलिशिया तथा वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी आतंकवादियों का जिक्र किया.
उन्होंने दावा किया कि इजरायल ने इन सभी मोर्चों पर अपने विरोधियों को भारी नुकसान पहुंचाया है. हिजबुल्लाह को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन के बड़े हिस्से के रॉकेट और मिसाइल शस्त्रागार को नष्ट कर दिया गया है और उसके कई प्रमुख नेता मारे गए हैं.
7 अक्टूबर 2023 के हमले का भी किया जिक्र
नेतन्याहू ने अपने भाषण में 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले को इजरायल के इतिहास का सबसे अंधकारमय दिन बताया. उन्होंने हमास पर इजरायली नागरिकों की हत्या और बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया तथा कहा कि उस हमले में लगभग 1,200 इजरायली मारे गए थे.
उन्होंने इजरायल की सैन्य कार्रवाई को इस हमले के जवाब और देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि इजरायल के सामने जीत के अलावा कोई विकल्प नहीं है. उन्होंने अमेरिका के साथ मिलकर बंधकों की वापसी के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि अमेरिका और इजरायल ने इस दिशा में मिलकर काम किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रशंसा करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की रक्षा में अमेरिका उसका महत्वपूर्ण साझेदार रहा है. उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान का उल्लेख किया और ट्रंप के नेतृत्व के लिए उनका धन्यवाद किया.
ममदानी और पश्चिमी देशों के नेताओं पर भी निशाना
नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर भी तीखा हमला किया. ममदानी ने नेतन्याहू को युद्ध अपराधों का आरोपी बताया है और उनके न्यूयॉर्क दौरे को लेकर गिरफ्तारी की बात कही थी, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसा करने का कानूनी अधिकार नहीं है. नेतन्याहू ने ममदानी पर हमास का समर्थन करने का आरोप लगाया, जिसे ममदानी ने खारिज किया है.
नेतन्याहू ने ब्रिटेन और फ्रांस समेत कुछ पश्चिमी देशों के नेताओं की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों के नेता इजरायल के खिलाफ दबाव के आगे झुक रहे हैं. उन्होंने इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश अपनी सुरक्षा के लिए लड़ना जारी रखेगा.
भाषण शुरू होते ही कई प्रतिनिधि बाहर निकले
नेतन्याहू के भाषण का एक प्रमुख दृश्य उस समय देखने को मिला जब उनके बोलना शुरू करने से पहले और शुरुआत के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल से बाहर चले गए. नेतन्याहू ने बाहर जाने वाले प्रतिनिधियों को “मोरल कायर” कहा और अपने भाषण में उनके कदम पर सवाल उठाया.
लगभग 40 मिनट के भाषण में नेतन्याहू ने इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव किया, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बड़ा खतरा बताया और गाजा में इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया. साथ ही उन्होंने हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया.
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