एर्दोगन के गाजा पर तीखे बयान के बीच UN से बाहर निकला इजरायली प्रतिनिधिमंडल, बढ़ा तुर्की-Israel तनाव
तुर्की और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी दिखाई दिया. जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की. एर्दोगन के बयान के दौरान इजरायल का प्रतिनिधिमंडल महासभा कक्ष से बाहर निकल गया.
गाजा को लेकर एर्दोगन ने Israel पर साधा निशाना
एर्दोगन ने अपने भाषण में गाजा की स्थिति को लेकर इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने गाजा को “हमारे समय का सबसे अमानवीय और शर्मनाक concentration camp” बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकता.
तुर्की राष्ट्रपति ने गाजा में मारे गए लोगों का आंकड़ा भी पेश किया. उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में गाजा में 74,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं और इनमें बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है. यह आंकड़ा एर्दोगन ने अपने संबोधन में दिया. इजरायल तुर्की और अन्य पक्षों की ओर से लगाए गए जनसंहार के आरोपों को खारिज करता है.
एर्दोगन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इजरायल पर दबाव बढ़ाने की अपील की, ताकि गाजा में युद्ध को समाप्त करने और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्धविराम योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने से पीछे हट रहा है.
बयान के दौरान इजरायली प्रतिनिधिमंडल ने छोड़ा UN हॉल
एर्दोगन के भाषण के दौरान इजरायली प्रतिनिधिमंडल महासभा कक्ष से बाहर चला गया. इजरायल की ओर से एर्दोगन के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है. यह वॉकआउट ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों के बीच संबंध पहले ही काफी खराब हो चुके हैं.
कभी इजरायल और तुर्की के बीच करीबी सुरक्षा संबंध रहे थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़े हैं. गाजा युद्ध शुरू होने के बाद यह टकराव और बढ़ गया है. एर्दोगन लगातार इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते रहे हैं, जबकि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एर्दोगन पर तीखी राजनीतिक टिप्पणियां की हैं.
गाजा के अलावा सीरिया भी बना तनाव का बड़ा कारण
इजरायल और तुर्की के बीच तनाव केवल गाजा तक सीमित नहीं है. सीरिया में बदलते सुरक्षा हालात भी दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण टकराव का क्षेत्र बन गए हैं. जून 2026 में एर्दोगन ने कहा था कि सीरिया और लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई अब तुर्की की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर रही है. उन्होंने इजरायल की कार्रवाई को रोकने की मांग की थी. अगस्त 2026 में दोनों देशों के बीच नेताओं की तीखी सार्वजनिक बयानबाजी देखने को मिला था.
तुर्की ने Israel पर दबाव की मांग दोहराई
एर्दोगन के UN भाषण से एक दिन पहले तुर्की, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रियों ने भी गाजा को लेकर संयुक्त बयान जारी किया था. इसमें इजरायल से युद्धविराम संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने, मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने और गाजा के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की गई.
इस तरह संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन का भाषण और इजरायली प्रतिनिधिमंडल का वॉकआउट दोनों देशों के बीच पहले से जारी राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव की ताजा तस्वीर के तौर पर सामने आया है. गाजा के साथ-साथ सीरिया और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण मुद्दा बने रहने की संभावना है.