इजरायली बस्तियों पर Britain समेत 12 देशों का शिकंजा, Florida ने ब्रिटिश कंपनियों को दी बड़ी चेतावनी
इजरायल और पश्चिमी देशों के बीच वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों को लेकर तनाव तेजी से बढ़ गया है. Britain ने वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से होने वाले व्यापार पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने 8 सितंबर को वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.
इन तीनों देशों के अलावा नीदरलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, स्पेन और नॉर्वे पहले ही ऐसे प्रतिबंधों की दिशा में कदम उठा चुके हैं. वहीं, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन ने भी बस्तियों से जुड़े व्यापार पर राष्ट्रीय या यूरोपीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर विचार करने की बात कही है. कुल 12 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर बस्तियों से जुड़े व्यापार पर प्रतिबंधों के समर्थन या ऐसे कदम उठाने के अपने इरादे की पुष्टि की है.
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ब्रिटिश कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है. फाइन का कहना है कि अगर ब्रिटिश सरकार के दबाव में ब्रिटिश कंपनियां इजरायल के खिलाफ बहिष्कार संबंधी नीति अपनाती हैं, तो फ्लोरिडा के मौजूदा एंटी-बॉयकॉट कानूनों के तहत उन्हें राज्य और स्थानीय सरकारों के साथ कारोबार करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.
Britain ने क्या फैसला लिया?
ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने 8 सितंबर को घोषणा की कि ब्रिटेन वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों से आने वाले सामान के व्यापार पर प्रतिबंध लगाएगा. इसके अलावा बस्तियों से जुड़ी कुछ सेवाओं, जैसे निर्माण, बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट, वित्तपोषण और विज्ञापन में शामिल कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाएगी. ब्रिटिश सरकार ने यह कदम बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को दो-राष्ट्र समाधान के लिए गंभीर खतरा बताते हुए उठाया है.
ब्रिटेन ने अपनी नीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है. सरकार ने कहा है कि वह पहली बार औपचारिक रूप से इजरायली कब्जे को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गैरकानूनी मानती है. साथ ही ऐसी कंपनियों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे जो इजरायली बस्तियों के निर्माण या विस्तार से लाभ कमा रहे हैं.
हालांकि ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये कदम इजरायल के साथ पूरे व्यापार को खत्म करने वाला प्रतिबंध नहीं हैं. निशाना विशेष रूप से वेस्ट बैंक की बस्तियों और उनसे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को बनाया गया है. ब्रिटेन ने दो-राष्ट्र समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई है.
12 देशों ने जताया समर्थन
ब्रिटेन, कनाडा और फ्रांस के अलावा डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, आयरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, स्पेन और स्वीडन ने भी संयुक्त बयान जारी किया है. इन 12 देशों ने कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानी जाने वाली इजरायली बस्तियों से जुड़े सामान के व्यापार पर राष्ट्रीय और यूरोपीय स्तर पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन करते हैं या ऐसे कदमों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहे हैं. इन देशों का कहना है कि वेस्ट बैंक में बस्तियों का लगातार विस्तार फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को कमजोर कर रहा है.
यूरोपीय संघ लंबे समय से इजरायली बस्तियों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध मानता रहा है, हालांकि पूरे यूरोपीय संघ की ओर से एक समान व्यापार प्रतिबंध लागू करने पर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है.
फ्लोरिडा से ब्रिटिश कंपनियों को चेतावनी
इसी बीच अमेरिका के फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने ब्रिटेन को एक अलग मोर्चे पर चेतावनी दी है. फाइन ने कहा कि जब वह फ्लोरिडा की विधायिका के सदस्य थे, तब उन्होंने ऐसे कानून का समर्थन किया था जो इजरायल के बहिष्कार में शामिल कंपनियों को फ्लोरिडा की राज्य और स्थानीय सरकारों के साथ कारोबार करने से रोक सकता है.
उनका तर्क है कि यदि किसी ब्रिटिश कंपनी को ब्रिटिश सरकार की नीति के कारण इजरायली बस्तियों के बहिष्कार में शामिल होना पड़ता है, तो वह फ्लोरिडा में सरकारी अनुबंधों और कुछ सरकारी कारोबारी गतिविधियों से प्रभावित हो सकती है. फाइन ने यह भी दावा किया कि फ्लोरिडा ब्रिटेन के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और इस तरह की नीति ब्रिटिश कंपनियों के लिए अरबों डॉलर के कारोबारी नुकसान का कारण बन सकती है.
उन्होंने 2019 में Airbnb के वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियों से संबंधित फैसले का उदाहरण भी दिया और दावा किया कि फ्लोरिडा के एंटी-बॉयकॉट कानून ने कंपनी पर इतना दबाव बनाया कि उसे अपना रुख बदलना पड़ा.
अमेरिका ने Britain का साथ नहीं दिया
इस विवाद में अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के रुख में अंतर भी साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका इजरायली बस्तियों से आयात पर इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की दिशा में नहीं जाएगा. वाशिंगटन ने आशंका जताई है कि ऐसे कदम वेस्ट बैंक में स्थिति को और अस्थिर कर सकते हैं.
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के फैसले तथा अन्य देशों के समर्थन से इजरायली बस्तियों का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है. इन देशों का कहना है कि बस्तियों का विस्तार भविष्य में स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के गठन की भौगोलिक संभावना को कमजोर कर रहा है.
वहीं इजरायल इन कदमों को राजनीतिक दबाव और अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है. ब्रिटेन और इजरायल के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों में यह नया विवाद और गंभीरता ला सकता है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ब्रिटेन और उसके सहयोगी केवल बस्तियों से जुड़े व्यापार तक सीमित रहेंगे या आने वाले महीनों में इजरायल पर व्यापक आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाया जाएगा. दूसरी ओर, रैंडी फाइन की चेतावनी से यह भी संकेत मिलता है कि इजरायल के समर्थन में अमेरिकी राज्यों और यूरोपीय सरकारों के बीच आर्थिक टकराव का एक नया मोर्चा खुल सकता है.
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