Thar Desert में गरजी भारतीय सेना की Air Defence ताकत, Southern Command ने ड्रोन और हवाई खतरों को किया तबाह
भारतीय सेना की दक्षिणी कमान (Southern Command) ने राजस्थान के थार रेगिस्तान में एक उच्च स्तरीय युद्धाभ्यास के जरिए अपनी वायु रक्षा (Air Defence) क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया है.
सेना द्वारा जारी वीडियो में आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, मिसाइल और एंटी-एयरक्राफ्ट गनों की सटीक मारक क्षमता देखने को मिली. यह अभ्यास इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारतीय सेना किसी भी हवाई खतरे, ड्रोन हमले या दुश्मन के हवाई अभियान का तत्काल और प्रभावी जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.
ड्रोन और हवाई खतरों को किया नेस्तनाबूत
युद्धाभ्यास के दौरान सेना ने काल्पनिक दुश्मन के हवाई खतरों और रिमोट-कंट्रोल ड्रोन को निशाना बनाया. आधुनिक रडार प्रणालियों ने इन लक्ष्यों का तेजी से पता लगाया, जिसके बाद एयर डिफेंस गनों ने सटीक फायरिंग करते हुए उन्हें हवा में ही नष्ट कर दिया. वीडियो में कई ड्रोन विस्फोट के साथ धुएं के गुबार में बदलते दिखाई देते हैं, जो भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की सटीकता और प्रतिक्रिया क्षमता को दर्शाता है.
रेगिस्तान में गरजीं एंटी-एयरक्राफ्ट गन
थार के रेतीले टीलों के बीच तैनात एंटी-एयरक्राफ्ट गनों ने लगातार फायरिंग कर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया. अभ्यास में जवानों ने तेजी से लक्ष्य पहचानने, हथियार तैनात करने और कम समय में जवाबी कार्रवाई करने का अभ्यास किया. इससे यह स्पष्ट हुआ कि सेना चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों में भी प्रभावी एयर डिफेंस ऑपरेशन संचालित करने में सक्षम है.
दिन और रात, हर परिस्थिति में युद्ध की तैयारी
अभ्यास केवल दिन तक सीमित नहीं रहा. रात के अंधेरे में भी एयर डिफेंस सिस्टम और गनों से फायरिंग की गई. आसमान में दौड़ती ट्रेसर गोलियां और लगातार हो रही फायरिंग ने यह साबित किया कि भारतीय सेना चौबीसों घंटे किसी भी हवाई खतरे का मुकाबला करने के लिए तैयार रहती है.
मिसाइल सिस्टम ने भी दिखाई ताकत
युद्धाभ्यास के दौरान व्हीकल-माउंटेड एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया. इन प्रणालियों से दागी गई मिसाइलों ने लंबी दूरी पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदकर उनकी सटीकता और प्रभावशीलता का प्रदर्शन किया. यह अभ्यास बहु-स्तरीय (Multi-layered) वायु रक्षा व्यवस्था की क्षमता को भी दर्शाता है.
हाल के वर्षों में ड्रोन और लो-फ्लाइंग हवाई खतरों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह अभ्यास बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. थार रेगिस्तान में किया गया यह युद्धाभ्यास स्पष्ट करता है कि भारतीय सेना पश्चिमी मोर्चे पर किसी भी हवाई या ड्रोन हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार, सतर्क और मिशन-रेडी है.