South Korea ने स्वदेशी Hypersonic Glide Vehicle का पहला सफल परीक्षण किया
South Korea ने घरेलू तकनीक से विकसित हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV) का पहला सफल परीक्षण किया है. 8 अक्टूबर 2026 को हुए इस परीक्षण का राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने प्रत्यक्ष निरीक्षण किया. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय की आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के अनुसार, परीक्षण में वाहन ने बूस्टर से अलग होने के बाद निर्धारित उड़ान पूरी की और लक्ष्य बिंदु तक पहुंचने की क्षमता प्रदर्शित की.
कम ऊंचाई पर उड़ान और दिशा बदलने की क्षमता का परीक्षण
इस परीक्षण में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल की उड़ान क्षमता के साथ-साथ उसकी गाइडेंस और कंट्रोल प्रणाली का भी मूल्यांकन किया गया. वाहन ने बूस्टर से सफलतापूर्वक अलग होने के बाद उड़ान भरी और कम ऊंचाई पर अपने उड़ान पथ में बदलाव करते हुए निर्धारित लक्ष्य बिंदु तक पहुंचा.
परीक्षण के दौरान उच्च तापमान सहने वाली सामग्री, गाइडेंस एवं कंट्रोल सिस्टम और कम ऊंचाई पर उड़ान पथ बदलने की क्षमता से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया. ये क्षमताएं हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.
South Korea की हाइपरसोनिक हथियार क्षमता विकसित करने की दिशा में कदम
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ऐसा हथियार तंत्र है, जिसमें वाहन रॉकेट बूस्टर से आवश्यक गति प्राप्त करने के बाद अलग होकर वायुमंडल में ग्लाइड करता है. यह हाइपरसोनिक गति से उड़ान भर सकता है और अपने उड़ान पथ में बदलाव कर सकता है. इसकी वास्तविक परिचालन क्षमता वाहन की डिजाइन, उड़ान नियंत्रण और अन्य तकनीकी विशेषताओं पर निर्भर करती है.
South Korea लंबे समय से अपनी स्वदेशी रक्षा तकनीक और मिसाइल क्षमताओं को विकसित करने पर काम कर रहा है. HGV का सफल परीक्षण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी कदम है. हालांकि, पहले परीक्षण में सफलता को हथियार प्रणाली के संपूर्ण विकास या सेना में परिचालन तैनाती के बराबर नहीं माना जा सकता.
राष्ट्रपति ने विकास कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए
South Korea के राष्ट्रपति कार्यालय की प्रेस ब्रीफिंग के अनुसार, राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने HGV के विकास को आगे बढ़ाने और इसकी परिचालन तैनाती की दिशा में काम तेज करने का निर्देश दिया. इससे संकेत मिलता है कि परीक्षण की सफलता के बाद कार्यक्रम को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
फिलहाल, इस परीक्षण को दक्षिण कोरिया की स्वदेशी हाइपरसोनिक तकनीक के विकास में एक अहम उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि, इस प्रणाली के पूर्ण विकास, आगे के परीक्षणों और परिचालन तैनाती की समयसीमा के बारे में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए.