CHINA ने पनडुब्बी से Ballistic Missile का किया परीक्षण, Indo-Pacific में बढ़ी सुरक्षा चिंता
CHINA ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी समुद्र-आधारित सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए प्रशांत महासागर की दिशा में एक रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. चीन ने इस परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि करते हुए इसे नियमित सैन्य प्रशिक्षण का हिस्सा बताया है. हालांकि, इस कदम के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक संतुलन को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं.
चीनी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मिसाइल को एक रणनीतिक परमाणु पनडुब्बी से लॉन्च किया गया. परीक्षण के दौरान मिसाइल में वास्तविक परमाणु वारहेड की जगह एक डमी वारहेड लगाया गया था. लॉन्च के बाद मिसाइल अपने पूर्व निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र में जाकर गिरी. मंत्रालय ने कहा कि इस परीक्षण का उद्देश्य हथियार प्रणाली की विश्वसनीयता और नौसेना की परिचालन क्षमता का मूल्यांकन करना था. चीन ने यह भी स्पष्ट किया कि यह किसी देश के खिलाफ नहीं था और न ही इसका उद्देश्य किसी को चेतावनी देना था.
प्रशांत महासागर में रणनीतिक मिसाइल परीक्षण के बाद कई देशों ने जताई चिंता
हालांकि, चीन की इस सफाई के बावजूद इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के कई देशों ने इस परीक्षण को गंभीरता से लिया है. ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड ने कहा कि इस तरह के रणनीतिक हथियारों का परीक्षण क्षेत्रीय स्थिरता और पारदर्शिता के लिहाज से चिंता का विषय है. इन देशों का मानना है कि ऐसे कदम उस समय उठाए गए हैं, जब क्षेत्र पहले से ही बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और तनाव का सामना कर रहा है.
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पनडुब्बी से बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता किसी भी परमाणु शक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. समुद्र में तैनात पनडुब्बियों का पता लगाना कठिन होता है, जिससे वे किसी भी संभावित हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता बनाए रखती हैं. इसी वजह से चीन पिछले कुछ वर्षों से अपनी परमाणु पनडुब्बियों और समुद्र-आधारित मिसाइल कार्यक्रम को लगातार मजबूत कर रहा है.
China की मिसाइल का नाम गुप्त, नई पीढ़ी के हथियार होने का अनुमान

चीन ने इस परीक्षण में इस्तेमाल की गई मिसाइल का नाम सार्वजनिक नहीं किया है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नई पीढ़ी की लंबी दूरी की पनडुब्बी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है. यदि ऐसा है, तो यह चीन की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता में बड़ा इजाफा माना जाएगा. हालांकि, इस संबंध में चीन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
इस परीक्षण का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हाल के महीनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त सैन्य अभ्यासों को तेज किया है. वहीं, चीन भी लगातार अपनी नौसैनिक ताकत और लंबी दूरी की मिसाइल क्षमताओं का प्रदर्शन कर रहा है. ऐसे में इस बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण को केवल नियमित सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि चीन के रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा है.
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक आने वाले वर्षों में वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बना रहेगा. ऐसे में चीन की समुद्र-आधारित मिसाइल क्षमता से जुड़ा हर नया परीक्षण अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा रणनीति पर असर डाल सकता है. इसलिए इस घटनाक्रम को भविष्य के सामरिक शक्ति संतुलन की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.