अमेरिका ने लेजर हथियारों के लिए $464.8 मिलियन का उत्पादन अनुबंध दिया, ड्रोन से निपटने में होगा इस्तेमाल

अमेरिका ने लेजर हथियारों के लिए $464.8 मिलियन का उत्पादन अनुबंध दिया, ड्रोन से निपटने में होगा इस्तेमाल

अमेरिकी सेना ने हाई-एनर्जी लेजर हथियारों को प्रयोगशाला और प्रोटोटाइप चरण से निकालकर उत्पादन और संभावित युद्धक तैनाती की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी सेना ने Enduring-High Energy Laser (E-HEL) कार्यक्रम के तहत AeroVironment को 464.8 मिलियन डॉलर का उत्पादन अनुबंध दिया है. यह अमेरिकी सेना का हाई-एनर्जी लेजर हथियार प्रणाली के लिए पहला उत्पादन अनुबंध है.

इन हथियारों का प्रमुख उद्देश्य ड्रोन जैसे हवाई खतरों को कम लागत में नष्ट करना है. पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर की तुलना में लेजर हथियारों में गोला-बारूद की पारंपरिक आपूर्ति की जरूरत नहीं होती, बल्कि विद्युत ऊर्जा के जरिए हाई-एनर्जी बीम उत्पन्न की जाती है. अमेरिकी सेना के अनुसार, E-HEL में बिजली उपलब्ध रहने तक इसकी फायरिंग क्षमता को दोबारा हासिल किया जा सकता है.

लेजर हथियारों का वास्तविक इस्तेमाल भी बढ़ा

अमेरिकी सेना ने अगस्त 2026 में दक्षिणी सीमा पर एक Multipurpose High Energy Laser सिस्टम के जरिए तीन ऐसे ड्रोन नष्ट किए थे, जिन्हें खतरा माना गया था और जिनके कार्टेल से जुड़े होने की आशंका बताई गई थी. अमेरिकी सेना ने इसे दक्षिणी सीमा पर कार्टेल से जुड़े ड्रोन के खिलाफ इस लेजर सिस्टम का पहला इस्तेमाल बताया था.

न्यूयॉर्क पोस्ट की 24 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य बलों ने मध्य पूर्व में भी लेजर हथियारों का इस्तेमाल शुरू किया है. रिपोर्ट में अमेरिकी रक्षा विभाग के हवाले से कहा गया है कि इन प्रणालियों का इस्तेमाल ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों जैसे हवाई खतरों के खिलाफ किया जा रहा है. हालांकि, इन अभियानों से जुड़ी विस्तृत परिचालन जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

अमेरिका बना रहा है अगली पीढ़ी की लेजर डिफेंस

अमेरिका ने लेजर हथियारों के लिए $464.8 मिलियन का उत्पादन अनुबंध दिया, ड्रोन से निपटने में होगा इस्तेमाल
फोटो क्रेडिट – Lockheed Martin

E-HEL के अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग ने Joint Laser Weapon System कार्यक्रम के तहत Lockheed Martin और nLIGHT को भी हाई-एनर्जी लेजर हथियारों के विकास के लिए समझौते दिए हैं. जुलाई 2026 में इन समझौतों की शुरुआती कुल राशि 86 मिलियन डॉलर थी, जबकि कार्यक्रम की संभावित कुल सीमा 847 मिलियन डॉलर तक है. इसका उद्देश्य ऐसे निर्देशित ऊर्जा हथियार विकसित करना है जिन्हें क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सके.

अमेरिकी सेना के E-HEL कार्यक्रम में AeroVironment का LOCUST X3 लेजर शामिल है. यह 30-किलोवाट श्रेणी का सिस्टम है, जिसे मध्यम आकार के Group 3 ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जा रहा है. इसे सैन्य वाहनों पर लगाया जा सकता है और आने वाले वर्षों में सेना को ऐसे कई सिस्टम उपलब्ध कराने की योजना है.

लेजर हथियारों का बड़ा फायदा कम लागत वाली फायरिंग

अमेरिका ने लेजर हथियारों के लिए $464.8 मिलियन का उत्पादन अनुबंध दिया, ड्रोन से निपटने में होगा इस्तेमाल
फोटो क्रेडिट- Lockheed Martin

अमेरिकी सेना और रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन के खिलाफ पारंपरिक मिसाइलों का इस्तेमाल लागत के लिहाज से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. हाई-एनर्जी लेजर इस समस्या को कम करने का एक विकल्प देते हैं, क्योंकि इनमें प्रत्येक फायरिंग के लिए अलग इंटरसेप्टर मिसाइल की जरूरत नहीं होती. हालांकि, लेजर हथियार मौसम, दृश्यता, बिजली आपूर्ति और लक्ष्य पर पर्याप्त समय तक बीम बनाए रखने जैसी परिचालन चुनौतियों से भी प्रभावित हो सकते हैं.

अमेरिकी रक्षा क्षेत्र में अब लक्ष्य केवल प्रयोगात्मक लेजर हथियारों का परीक्षण करना नहीं, बल्कि इन्हें बड़ी संख्या में उत्पादन योग्य और तैनाती के लिए तैयार प्रणालियों में बदलना है. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सितंबर में कहा था कि निर्देशित ऊर्जा तकनीक काउंटर-ड्रोन अभियानों के लिए तैनाती के करीब पहुंच चुकी है.

इस तरह अमेरिका की मौजूदा रणनीति में लेजर हथियार पारंपरिक मिसाइल आधारित एयर डिफेंस का पूर्ण विकल्प बनने के बजाय उसकी एक अतिरिक्त परत के रूप में विकसित किए जा रहे हैं. खासकर कम लागत वाले ड्रोन और बड़े पैमाने पर होने वाले ड्रोन हमलों के खिलाफ इन्हें महत्वपूर्ण भूमिका के लिए तैयार किया जा रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *