ICGS ‘Rajdoot’ की एंट्री से अंडमान-निकोबार में भारत की समुद्री ताकत हुई और मजबूत
भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 1 अप्रैल 2026 को स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS ‘Rajdoot’ को अंडमान और निकोबार कमांड (ANC) के तहत श्रीविजयपुरम (Sri Vijaya Puram) में शामिल किया. यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
‘राजदूत’ एक तेज़, आधुनिक और मल्टी-रोल फास्ट पेट्रोल वेसल है, जिसे खासतौर पर तटीय निगरानी और तेज़ प्रतिक्रिया मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है. यह जहाज़ EEZ (Exclusive Economic Zone) की निगरानी, समुद्री कानून प्रवर्तन, सर्च एंड रेस्क्यू (SAR), मेडिकल इवैक्यूएशन और समुद्री आपात स्थितियों में तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम है.
सामरिक विश्लेषण (Strategic Analysis)

1. अंडमान-निकोबार का बढ़ता महत्व
अंडमान-निकोबार क्षेत्र हिंद महासागर में भारत की “फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस” की तरह काम करता है. यह क्षेत्र मलक्का स्ट्रेट के बेहद करीब है, जहां से दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है. ऐसे में ‘राजदूत’ की तैनाती भारत को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर बेहतर निगरानी क्षमता देती है.
2. चीन की बढ़ती गतिविधियों का जवाब
हाल के वर्षों में हिंद महासागर में चीनी नौसेना और रिसर्च वेसल्स की गतिविधियां बढ़ी हैं. ‘राजदूत’ जैसे तेज़ पेट्रोल वेसल इन गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद करेंगे.
3. मल्टी-रोल ऑपरेशन की ताकत
यह जहाज़ केवल सैन्य निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय मिशनों—जैसे सर्च एंड रेस्क्यू और मेडिकल इवैक्यूएशन—में भी अहम भूमिका निभाएगा. इससे तटरक्षक बल की “डुअल रोल” क्षमता और मजबूत होती है.
4. स्वदेशी रक्षा निर्माण को बढ़ावा
‘राजदूत’ का स्वदेशी निर्माण भारत की “आत्मनिर्भर भारत” नीति को मजबूती देता है. इससे न केवल लागत कम होती है, बल्कि भविष्य में तेजी से ऐसे और जहाज़ तैयार करने की क्षमता भी बढ़ती है.

क्या बदल जाएगा?
इससे समुद्री सीमाओं पर निगरानी और मजबूत होगी. साथ ही अवैध गतिविधियों (तस्करी, घुसपैठ) पर तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगा. आपदा और रेस्क्यू ऑपरेशन में बेहतर प्रतिक्रिया और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी.
ICGS ‘राजदूत’ की तैनाती सिर्फ एक नए जहाज़ का शामिल होना नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर में भारत की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता और सुरक्षा क्षमता का संकेत है. आने वाले समय में ऐसे और स्वदेशी प्लेटफॉर्म भारत को समुद्री शक्ति के रूप में और मजबूत करेंगे.