HAL Koraput ने बनाया 2,000वां एयरो-इंजन, शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन होगी स्थापित
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को HAL Koraput डिवीजन से 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी के मौके पर शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन स्थापित करने की घोषणा की. 218 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली इस लाइन में हर साल 100 तक शक्ति इंजन बनाए जा सकेंगे और इसे 2028-29 तक पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य है. इन इंजनों का इस्तेमाल ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों में किया जाएगा.
राजनाथ सिंह ने इस मौके पर भारत में स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए इंजन की डिजाइन, विकास, परीक्षण, निर्माण और रखरखाव से जुड़ी क्षमताओं को देश में विकसित करना जरूरी है.
छह दशक की तकनीकी विशेषज्ञता का नतीजा है 2,000वां इंजन

रक्षा मंत्री ने एचएएल कोरापुट के इंजीनियरों, तकनीशियनों, वैज्ञानिकों और कुशल कर्मचारियों को 2,000वें इंजन की उपलब्धि पर बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और 1964 में कोरापुट डिवीजन की स्थापना के बाद से छह दशक की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और तकनीकी अनुभव को दर्शाती है.
एचएएल कोरापुट के इंजनों ने MiG-21, MiG-27, MiG-29 और Su-30MKI जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को शक्ति दी है. राजनाथ सिंह ने कहा कि इंजन का उत्पादन नई क्षमता उपलब्ध कराता है, जबकि ओवरहालिंग मौजूदा इंजनों की सेवा अवधि बढ़ाती है. इसलिए सैन्य तैयारियों के लिए दोनों क्षमताएं महत्वपूर्ण हैं.
एचएएल कोरापुट ने अब तक 9,000 से अधिक इंजनों का ओवरहाल किया है. रक्षा मंत्री ने इसकी स्वदेशी मरम्मत और ओवरहाल क्षमता की सराहना की. उन्होंने कहा कि घटकों के स्वदेशीकरण और टर्नअराउंड टाइम में कमी से महत्वपूर्ण रक्षा परिसंपत्तियों की परिचालन उपलब्धता और सेवा अवधि बढ़ाने में मदद मिल रही है.
335 करोड़ रुपये से बढ़ेगी AL-31FP इंजन उत्पादन क्षमता

राजनाथ सिंह ने एचएएल की ओर से Su-30MKI के लिए AL-31FP इंजन के उत्पादन में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि सरकार ने 2024 में एचएएल को Su-30MKI के लिए 240 AL-31FP इंजनों का ऑर्डर दिया था.
वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान और कच्चे माल से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद एचएएल ने पहला इंजन निर्धारित समय से पहले उपलब्ध कराया. दूसरे वर्ष के अंत तक 60 इंजनों के लक्ष्य के मुकाबले 63 इंजन वितरित किए जा चुके हैं. रक्षा मंत्री ने बताया कि एचएएल 335 करोड़ रुपये के निवेश से AL-31FP इंजन की वार्षिक उत्पादन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 इंजन करेगा.
2028-29 तक तैयार होगी शक्ति इंजन की दूसरी लाइन

शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन 218 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित की जाएगी. इस लाइन से हर साल 100 तक इंजन बनाए जा सकेंगे. इसे 2028-29 तक पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. यह उत्पादन क्षमता भारत के स्वदेशी हेलीकॉप्टर कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण होगी. नई लाइन से ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर समेत स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के लिए इंजन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
AMCA के लिए स्वदेशी इंजन क्षमता पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता केवल एयरफ्रेम के स्वदेशी निर्माण तक सीमित नहीं हो सकती. इसमें स्वदेशी एयरो-इंजन क्षमता भी शामिल होनी चाहिए. उन्होंने विशेष रूप से एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम के लिए स्वदेशी प्रणोदन क्षमता विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
उन्होंने करीब 5,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश, मिश्र धातु निगम लिमिटेड (MIDHANI) के साथ साझेदारी में कच्चे माल के स्वदेशीकरण और भारत की पहली स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन टेस्टिंग सुविधा स्थापित किए जाने का उल्लेख किया.
राजनाथ सिंह ने कहा कि एक संप्रभु एयरोस्पेस इकोसिस्टम के लिए सामग्री, डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहाल (MRO) समेत पूरी वैल्यू चेन में स्वदेशी क्षमता विकसित करनी होगी.
एयरो-इंजन को बताया विमान का ‘दिल’

राजनाथ सिंह ने एयरो-इंजन को विमान का ‘दिल’ बताते हुए कहा कि उन्नत एयरफ्रेम, रडार, हथियार और एवियोनिक्स की क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल विश्वसनीय प्रणोदन के बिना संभव नहीं है. उन्होंने प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग, उन्नत सामग्री, मेटलर्जी, कूलिंग टेक्नोलॉजी, परीक्षण और कड़े गुणवत्ता मानकों में विशेषज्ञता विकसित करने की जरूरत बताई.
उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन तकनीक में उन्नत सुपरएलॉय, थर्मल-बैरियर कोटिंग और अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल होती हैं, जो अत्यधिक परिस्थितियों में विश्वसनीय प्रदर्शन के लिए जरूरी हैं.
उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन विकास एक लंबी अवधि की प्रक्रिया है, जिसके लिए लगातार निवेश, विशेष परीक्षण सुविधाओं, कुशल मानव संसाधन और मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम की जरूरत होती है. इसके साथ ही उत्पादन को दोहराने योग्य, विश्वसनीय और बड़े पैमाने पर बढ़ाने योग्य बनाने पर भी ध्यान देना होगा.
HAL कोरापुट को व्यापक प्रोपल्शन इकोसिस्टम बनाने का आह्वान
रक्षा मंत्री ने एचएएल से कोरापुट को केवल इंजन उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने के बजाय व्यापक एयरोस्पेस प्रोपल्शन इकोसिस्टम का केंद्र बनाने का आह्वान किया. उन्होंने MSMEs, स्टार्टअप्स, निजी उद्योग, अकादमिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों को इस इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया. उन्होंने एचएएल से सप्लायर्स विकसित करने, MSMEs को मार्गदर्शन देने, युवा इंजीनियरों और स्टार्टअप्स को उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में अवसर देने तथा विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने को कहा.
राजनाथ सिंह ने महत्वपूर्ण इंजन घटकों के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित करने और स्थानीय कुशल युवाओं के लिए भी अवसर पैदा करने पर जोर दिया.
ओडिशा में बढ़ रहा रक्षा और एयरोस्पेस इकोसिस्टम

रक्षा मंत्री ने ओडिशा के बढ़ते रक्षा और एयरोस्पेस इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया. उन्होंने राज्य की रणनीतिक स्थिति, लंबी तटरेखा, बंदरगाहों, खनिज संसाधनों, औद्योगिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन को इस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया.
उन्होंने चांदीपुर स्थित DRDO के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज और ओडिशा सरकार की हालिया पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये राज्य में एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम के विस्तार के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं.
राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली ओडिशा सरकार की ओर से ढेंकनाल के गजमारा में एयरोस्पेस एंड डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स की मंजूरी का भी उल्लेख किया.
रक्षा मंत्री ने एचएएल कोरापुट की टीम से गुणवत्ता, उत्पादकता, स्वदेशीकरण, नवाचार और डिलीवरी टाइमलाइन के मानकों को और बेहतर करने का आह्वान किया. उन्होंने 2,000वें इंजन की उपलब्धि को ऐसे भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के निर्माण की नींव बनाने पर जोर दिया, जो उन्नत प्रणोदन प्रणालियों को डिजाइन, विकसित, निर्मित और उनके पूरे जीवनचक्र में समर्थन देने में सक्षम हो.
इस अवसर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल तेजपाल सिंह, एचएएल के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के., MIDHANI के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. एस.वी.एस. नारायण मूर्ति और ज्वाइंट सेक्रेटरी (एयरोस्पेस विंग एवं DOMW) मनीषा चंद्रा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे.