Indian Navy को मिलेंगे 1,000 किमी तक मार करने वाले कामिकाजी ड्रोन! युद्धपोतों से होंगे लॉन्च

Indian Navy को मिलेंगे 1,000 किमी तक मार करने वाले कामिकाजी ड्रोन! युद्धपोतों से होंगे लॉन्च

Indian Navy अपनी लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है. रक्षा मंत्रालय के तहत नौसेना ने Medium Range Loitering Munition (LM-MR) हासिल करने के लिए Request for Information (RFI) जारी किया है. यह ऐसा कामिकाजी ड्रोन होगा जिसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों से लॉन्च किया जा सकेगा और यह समुद्र के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बनाने में सक्षम होगा. आधिकारिक RFI में इस प्रणाली के लिए कम से कम 1,000 किलोमीटर की रेंज और कम से कम 9 घंटे की उड़ान क्षमता मांगी गई है.

1,000 किमी से अधिक की मारक क्षमता

नौसेना की आवश्यकता के मुताबिक प्रस्तावित LM-MR की अधिकतम रेंज कम से कम 1,000 किलोमीटर होनी चाहिए. यह इसे सामान्य सामरिक ड्रोन या कम दूरी के loitering munition से काफी अलग बनाता है. इसका इस्तेमाल युद्धपोत से लॉन्च करने के बाद समुद्र या जमीन पर ऐसे “opportune targets” को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा, जिनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता हो. RFI इसे एक Universal Loitering Munition System के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताता है.

9 घंटे तक हवा में रह सकेगा

Indian Navy को मिलेंगे 1,000 किमी तक मार करने वाले कामिकाजी ड्रोन! युद्धपोतों से होंगे लॉन्च

RFI में इस ड्रोन की endurance कम से कम 9 घंटे मांगी गई है. यानी लॉन्च होने के बाद यह लंबे समय तक अपने ऑपरेशनल क्षेत्र में मौजूद रहकर लक्ष्य की तलाश कर सकेगा. इसकी loitering speed कम से कम 75 knots और terminal attack/dive speed कम से कम 200 knots होनी चाहिए। इसका ऑपरेशनल ceiling 15,000 फीट निर्धारित किया गया है.

समुद्र और जमीन दोनों पर हमला

प्रस्तावित LM-MR को all-weather anti-ship और land-attack capability से लैस करने की आवश्यकता है. यानी इसका इस्तेमाल दुश्मन के समुद्री लक्ष्यों के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ भी किया जा सकेगा. इसमें लक्ष्य की पहचान और निगरानी के लिए Electro-Optical (EO) और Infrared (IR) sensors की आवश्यकता भी रखी गई है, जिससे यह दिन और रात दोनों परिस्थितियों में काम कर सके.

एक मीटर से कम CEP

नौसेना ने इस प्रणाली के लिए Circular Error Probable (CEP) एक मीटर से कम रखने की आवश्यकता बताई है. इसका मतलब है कि हथियार से अत्यधिक सटीक प्रहार की उम्मीद की जा रही है. इसके अलावा संचार और नियंत्रण के लिए RF और SATCOM दोनों क्षमताएं मांगी गई हैं. इससे लंबी दूरी के मिशन में ड्रोन के साथ संचार बनाए रखने की क्षमता बढ़ेगी.

RFI की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता यह है कि मिशन के दौरान loitering munition का control एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन को transfer किया जा सके. इसका अर्थ है कि जरूरत पड़ने पर नियंत्रण को समुद्र में मौजूद दूसरे युद्धपोत या किसी shore-based control station को सौंपा जा सकेगा. इससे लंबी दूरी के मिशन के दौरान ऑपरेशनल लचीलापन बढ़ेगा.

GNSS के बिना भी काम करने की क्षमता

नौसेना ने प्रस्तावित सिस्टम के लिए GNSS-denied environment में ऑपरेशन करने की क्षमता भी मांगी है. यह महत्वपूर्ण आवश्यकता है क्योंकि युद्ध की स्थिति में दुश्मन GPS/GNSS सिग्नल को jam या spoof कर सकता है. RFI में G3N compatibility और अतिरिक्त sensors को जोड़ने के लिए modular तथा scalable architecture की भी मांग की गई है.

आकार भी सीमित रखा गया

इतनी लंबी रेंज और endurance के बावजूद नौसेना चाहती है कि यह प्रणाली युद्धपोतों पर आसानी से तैनात की जा सके. RFI के अनुसार इसकी लंबाई 2.5 मीटर से अधिक नहीं और wingspan 3 मीटर से अधिक नहीं होना चाहिए. इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों पर dedicated canisters में रखा जाएगा और लॉन्च किया जाएगा. वारहेड को ड्रोन के अगले हिस्से (forward section) में स्थापित करने की आवश्यकता है.

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि RFI कोई खरीद का आदेश या RFP नहीं है. यह procurement प्रक्रिया का शुरुआती चरण है, जिसके जरिए रक्षा मंत्रालय और नौसेना उद्योग से उपलब्ध तकनीक, डिजाइन और कंपनियों की क्षमता के बारे में जानकारी हासिल कर रहे हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *