Russian Fighter Jets ने ब्रिटिश RAF जासूसी विमान को घेरा, सिर्फ 6 मीटर की दूरी तक पहुंचे जेट
पूर्वी यूरोप और काला सागर क्षेत्र में एक बार फिर सैन्य तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स यानी Royal Air Force ने खुलासा किया है कि उसका एक Rivet Joint जासूसी विमान अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में मिशन के दौरान Russian Fighter Jets द्वारा “बेहद खतरनाक तरीके” से इंटरसेप्ट किया गया.
ब्रिटिश सेना के अनुसार Russian Fighter Jets इतने करीब आ गए थे कि दोनों विमानों के बीच दूरी सिर्फ 6 मीटर रह गई थी. इस दौरान RAF विमान के ऑनबोर्ड इमरजेंसी सिस्टम भी सक्रिय हो गए. हालांकि, तनावपूर्ण हालात के बावजूद ब्रिटिश क्रू ने अपना मिशन सुरक्षित रूप से पूरा किया और विमान सुरक्षित वापस लौट आया.
NATO मिशन पर था ब्रिटिश विमान
RAF का Rivet Joint विमान काला सागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में नियमित निगरानी मिशन पर था। यह मिशन NATO के ऑपरेशन्स के समर्थन में चलाया जा रहा था.
इस मिशन का मकसद NATO के पूर्वी मोर्चे की सुरक्षा को मजबूत करना और रूस की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखना था.
क्या है Rivet Joint विमान?
RAF Rivet Joint एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और रिकॉनिसेंस विमान है. यह दुश्मन के रडार, संचार संकेतों और इलेक्ट्रॉनिक गतिविधियों को ट्रैक करने में सक्षम होता है.
यह विमान अत्याधुनिक सेंसर और निगरानी सिस्टम से लैस है, जो NATO देशों को युद्धक्षेत्र की रियल-टाइम जानकारी देता है. ऐसे विमान किसी भी संभावित सैन्य खतरे का पहले से पता लगाने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं.
रूस पर लगा “आक्रामक हरकत” का आरोप
ब्रिटेन ने इस घटना को रूस की “लापरवाह और आक्रामक सैन्य गतिविधि” बताया है. ब्रिटिश अधिकारियों का कहना है कि रूसी जेट्स की यह कार्रवाई बेहद जोखिम भरी थी और इससे हवा में बड़ा हादसा हो सकता था.
ब्रिटेन ने कहा कि रूस लगातार पूर्वी यूरोप, काला सागर और उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में सैन्य दबाव बढ़ा रहा है. इसके बावजूद ब्रिटेन अपने NATO सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा.
बढ़ सकता है NATO और रूस के बीच तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि काला सागर के ऊपर इस तरह की घटनाएं आने वाले समय में NATO और रूस के बीच तनाव को और बढ़ा सकती हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद से इस क्षेत्र में जासूसी उड़ानों, निगरानी मिशनों और सैन्य गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है.
ऐसे में सिर्फ 6 मीटर की दूरी तक पहुंचा रूसी इंटरसेप्शन यह दिखाता है कि क्षेत्र में स्थिति कितनी संवेदनशील और विस्फोटक हो चुकी है.