Germany का ‘ऑपरेशन टॉमहॉक’: रूस के खतरे और अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बीच बर्लिन ने मांगी 400 मिसाइलें

रूस के खिलाफ जर्मनी की बड़ी तैयारी! अमेरिका से टॉमहॉक मिसाइलें खरीदने के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

यूरोप में सुरक्षा के बदलते समीकरणों के बीच Germany ने एक बार फिर अमेरिका से घातक टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइलें और टायफॉन (Typhon) लॉन्चर्स खरीदने की कोशिशें तेज कर दी हैं. मई 2026 की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम पेंटागन द्वारा जर्मनी में मिसाइल बटालियन तैनात करने की योजना को रद्द करने और वहां से 5,000 अमेरिकी सैनिकों की वापसी के फैसले के बाद उठाया गया है. जर्मनी का मानना है कि इन फैसलों ने रूसी खतरे के सामने उसकी सुरक्षा में एक बड़ा वैक्यूम (शून्य) पैदा कर दिया है.

जर्मनी के रक्षा मंत्री करेंगे अमेरिका का दौरा

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जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस जल्द ही वाशिंगटन का दौरा कर सकते हैं, ताकि जुलाई 2025 से अटके हुए उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सके जिसमें लगभग 400 टॉमहॉक ब्लॉक वीबी मिसाइलें खरीदने की योजना थी. बर्लिन इन मिसाइलों को एक “स्टॉप-गैप” यानी अस्थायी समाधान के रूप में देख रहा है, क्योंकि फिलहाल यूरोप के पास अपनी ऐसी कोई स्वदेशी प्रणाली नहीं है जो 1,600 किलोमीटर तक मार कर सके.

हालांकि, इस सौदे की राह आसान नहीं है. पश्चिम एशिया में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका ने खुद बड़ी मात्रा में टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जिससे उसके अपने स्टॉक में भारी कमी आई है. ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या ट्रम्प प्रशासन अपने रणनीतिक हितों को ताक पर रखकर जर्मनी को यह आपूर्ति करेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि बर्लिन इस डील को पक्का करने के लिए मिसाइलों की भारी कीमत (प्रति मिसाइल 20 लाख डॉलर) से भी अधिक भुगतान करने को तैयार हो सकता है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी रक्षा प्राथमिकताओं पर ही टिका है.

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