SCO मंच से Rajnath Singh का सख्त संदेश: “ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया—आतंक के गढ़ अब नहीं बचेंगे”
Rajnath Singh ने 28 अप्रैल 2026 को Shanghai Cooperation Organisation Defence Ministers Meeting 2026 में आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा रुख दुनिया के सामने रखा. किर्गिस्तान की राजधानी Bishkek में आयोजित इस बैठक में उन्होंने साफ कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” भारत के इस अडिग संकल्प का प्रतीक है कि आतंकवाद के गढ़ अब न्यायसंगत दंड से बच नहीं पाएंगे.
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद को वैश्विक शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए Shanghai Cooperation Organisation से एकजुट होकर कार्रवाई करने की अपील की. उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकियों को शरण देने, उकसाने और सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वालों के खिलाफ बिना किसी हिचक के कदम उठाने होंगे.

राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इस मामले में “दोहरे मापदंड” के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर दुनिया को सुरक्षित बनाना है, तो आतंकवाद के खिलाफ निरंतर और सामूहिक कार्रवाई जरूरी है.
बैठक में उन्होंने पिछले वर्ष के तियानजिन घोषणापत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और भारत की “जीरो टॉलरेंस” नीति को मजबूत करता है. उन्होंने कहा, “आतंकवाद की कोई राष्ट्रीयता या विचारधारा नहीं होती, इसलिए सभी देशों को एक समान और दृढ़ रुख अपनाना चाहिए.”
वैश्विक व्यवस्था पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या दुनिया को नई व्यवस्था की जरूरत है या मौजूदा नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की. उन्होंने कहा कि आज असली संकट व्यवस्था के खत्म होने का नहीं, बल्कि स्थापित नियमों पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति का है. उन्होंने सह-अस्तित्व, करुणा और सहयोग को प्राथमिकता देने की बात कही.

राजनाथ सिंह ने शांति और कूटनीति के रास्ते पर चलने की अपील करते हुए कहा कि दुनिया को युद्ध और हिंसा से दूर रहकर विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने Mahatma Gandhi के संदेश “आंख के बदले आंख” का जिक्र करते हुए कहा कि यह सोच पूरी दुनिया को अंधा बना सकती है.
उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” के भारतीय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दर्शन पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देता है. साथ ही भारत ने SCO के साथ मिलकर शांति, स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
बैठक में सदस्य देशों ने 2026 को SCO की 25वीं वर्षगांठ के रूप में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में संगठन की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है.