Germany में Gen Z का देशव्यापी Protest , 30 से अधिक शहरों में उतरे युवा; कई जगह हिंसा और पुलिस से झड़प
Germany में युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बढ़ती महंगाई, सामाजिक असमानता और अनिवार्य सैन्य सेवा के विरोध में देशव्यापी Protest किया है. 31 अक्टूबर 2026 को ‘Gen Z regelt’ (Gen Z Takes Charge) अभियान के तहत हजारों युवा जर्मनी के 30 से अधिक शहरों में सड़कों पर उतरे.
बर्लिन, फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख, हैम्बर्ग, कोलोन और स्टटगार्ट सहित कई प्रमुख शहरों में आयोजित इन प्रदर्शनों में युवाओं ने सरकार की नीतियों के प्रति नाराजगी जाहिर की. हालांकि, ज्यादातर जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम होते-होते कुछ शहरों में स्थिति बिगड़ गई और प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़पें हुईं.
इस आंदोलन का आयोजन ‘Gen Z regelt’ नाम का एक युवा समूह ने किया था. इसके पीछे युवाओं की यह चिंता है कि सरकार उनकी मौजूदा समस्याओं और भविष्य की जरूरतों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रही है. आंदोलन से जुड़े लोगों ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में अधिक निवेश, जीवनयापन की बढ़ती लागत से राहत, सामाजिक न्याय और जलवायु संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है. इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने अनिवार्य सैन्य सेवा लागू करने की संभावनाओं का भी विरोध किया है.
अनिवार्य सैन्य सेवा और बढ़ते सैन्यीकरण का विरोध
प्रदर्शन में शामिल युवाओं की प्रमुख मांगों में अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध भी शामिल रहा. Germany में सैन्य भर्ती और सैन्य सेवा को लेकर चल रही नीतिगत चर्चाओं के बीच युवाओं का एक वर्ग आशंकित है कि सरकार भविष्य में अनिवार्य सैन्य सेवा की व्यवस्था को फिर से लागू कर सकती है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि युवाओं को अपनी शिक्षा, रोजगार और भविष्य के बारे में खुद निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए. वे नहीं चाहते कि सैन्य सेवा उनके जीवन और करियर की योजनाओं को प्रभावित करे.
शिक्षा और महंगाई भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दे

युवाओं का असंतोष केवल सैन्य सेवा तक सीमित नहीं है. प्रदर्शनकारियों ने स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षा के लिए अपर्याप्त बजट और सार्वजनिक सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया. उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को अधिक संसाधन उपलब्ध कराने चाहिए.
इसके साथ ही बढ़ती महंगाई और आवास सहित रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाले खर्च ने युवाओं के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं. आंदोलन के आयोजकों ने स्कूलों के अलावा नशा मुक्ति सेवाओं और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सहायता के लिए भी अधिक सरकारी निवेश की मांग की है.
फ्रैंकफर्ट और हैम्बर्ग में हिंसा, पुलिस ने किया वाटर कैनन का इस्तेमाल
दिन में अधिकांश शहरों में प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुए, लेकिन शाम को कई स्थानों पर हालात बिगड़ गए. फ्रैंकफर्ट में कुछ उपद्रवियों ने दुकानों के शीशे तोड़ दिए और कई दुकानों में लूटपाट की. पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा बलों पर पटाखे और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं. स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने शहर के प्रमुख शॉपिंग क्षेत्र को बंद कर दिया और विशेष पुलिस बल को तैनात किया.
हैम्बर्ग में कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड और कचरे के डिब्बों में आग लगा दी. वहीं, कोलोन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ने के बाद पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर बोतलें और पटाखे फेंके. इन घटनाओं में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और अलग-अलग शहरों में कई लोगों को हिरासत में लिया गया.
आयोजकों ने हिंसा से बनाई दूरी
‘Gen Z regelt’ अभियान के आयोजकों ने हिंसक घटनाओं से खुद को अलग करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण विरोध और युवाओं की मांगों को सामने रखने के लिए है. जर्मन मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आंदोलन में आयोजकों की ओर से पहले लगभग 1.60 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया था. बाद में आयोजकों ने 31 अक्टूबर के प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोगों की भागीदारी का दावा किया. हालांकि, अलग-अलग शहरों में पुलिस और आयोजकों के आंकड़ों में अंतर रहा.
आंदोलन के आयोजकों ने 20 नवंबर को यूरोप के अन्य देशों में होने वाले युवा प्रदर्शनों के साथ भी जुड़ने की योजना जताई है. ऐसे में जर्मनी में Gen Z का यह आंदोलन युवाओं की आर्थिक और सामाजिक चिंताओं के साथ-साथ सरकार की सैन्य एवं सार्वजनिक खर्च संबंधी प्राथमिकताओं पर उठते सवालों को भी सामने लाता है.