US, Japan और South Korea ने बनाया Trilateral Arctic Pacific Partnership, North Korea पर भी जताई सख्ती

US, Japan और South Korea ने बनाया Trilateral Arctic Pacific Partnership, North Korea पर भी जताई सख्ती

US , Japan और South Korea ने आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक नई त्रिपक्षीय साझेदारी स्थापित की है. 30 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने Trilateral Arctic Pacific Partnership (TAPP) के लिए सहयोग ज्ञापन (Memorandum of Cooperation-MoC) पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते का उद्देश्य प्रशांत आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सहयोग, सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं को आगे बढ़ाना है.

इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून शामिल हुए. जापान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों मंत्रियों की यह बैठक 30 अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार शाम 5:05 बजे शुरू हुई और लगभग 20 मिनट तक चली. यह इस वर्ष तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की चौथी त्रिपक्षीय बैठक थी.

क्या है Trilateral Arctic Pacific Partnership?

Trilateral Arctic Pacific Partnership अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच स्थापित एक नया सहयोग ढांचा है. इसका प्रमुख उद्देश्य प्रशांत आर्कटिक क्षेत्र में तीनों देशों के बीच समुद्री और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है.

इस साझेदारी के तहत तीनों देश एक त्रिपक्षीय आर्कटिक वर्किंग ग्रुप (Trilateral Arctic Working Group) स्थापित करेंगे. यह समूह सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करने और संबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने का काम करेगा.

US, Japan और South Korea ने बनाया Trilateral Arctic Pacific Partnership, North Korea पर भी जताई सख्ती
फोटो – Secretary Marco Rubio,@SecRubio

जापान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस साझेदारी में मुख्य रूप से दो क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा.

पहला क्षेत्र समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) है. इसके तहत तीनों देश आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों की सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में मिलकर प्रतिक्रिया देने से जुड़े संभावित सहयोग पर काम करेंगे. इसमें समुद्री सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया गतिविधियों को लेकर आपसी समझ बढ़ाना शामिल है.

दूसरा क्षेत्र आर्थिक साझेदारी (Economic Partnership) है. इसके तहत तीनों देश प्रशांत आर्कटिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के संभावित अवसरों से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे और साझेदारी की संभावनाओं पर विचार करेंगे.

तीनों देशों ने इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए आर्कटिक काउंसिल (Arctic Council) और नए त्रिपक्षीय वर्किंग ग्रुप के माध्यम से काम करने पर भी सहमति जताई है. हालांकि, अभी इस समझौते के तहत किसी विशेष संयुक्त समुद्री अभियान, सैन्य तैनाती या आर्थिक परियोजना की घोषणा नहीं की गई है.

उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर भी चर्चा

आर्कटिक सहयोग समझौते के साथ ही तीनों देशों की बैठक में उत्तर कोरिया का परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी प्रमुख मुद्दा रहा. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक रीडआउट के अनुसार, तीनों विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करने पर भी सहमति जताई. इसमें उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए राजस्व जुटाने में सहायता करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंधों को लागू करना शामिल है.

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फोटो – Secretary Marco Rubio,@SecRubio

तीनों मंत्रियों ने Multilateral Sanctions Monitoring Team (MSMT) के काम की भी सराहना की. यह टीम उत्तर कोरिया की ओर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के उल्लंघन और उनसे बचने के प्रयासों की निगरानी करती है तथा उनसे संबंधित जानकारी सामने लाती है.

इसके अलावा, तीनों देशों ने उत्तर कोरिया की उन साइबर गतिविधियों के खिलाफ सहयोग जारी रखने पर जोर दिया, जिनसे उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों के लिए धन जुटाया जाता है. जापान के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी बैठक के विवरण में इस मुद्दे को विशेष रूप से शामिल किया है.

चीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति पर भी हुई चर्चा

बैठक में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर भी विचार साझा किए. अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों मंत्रियों ने ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और पीले सागर में चीन की गतिविधियों को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने इन क्षेत्रों में चीन की ओर से नियंत्रण स्थापित करने के प्रयासों और दबाव बनाने वाले व्यवहार का मुद्दा उठाया. इसके अलावा, रूस और चीन के बीच बढ़ते सहयोग पर भी चर्चा हुई. अमेरिकी पक्ष ने इसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए चिंता का विषय बताया.

तीनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. इसमें महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला में विविधता लाना, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग शामिल है.

उन्होंने जुलाई 2026 में अंकारा में हस्ताक्षरित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों की तैनाती से संबंधित त्रिपक्षीय सहयोग ज्ञापन के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की.

उत्तर कोरिया ने प्रतिबंधों को बताया विफल

किम जोंग उन की मौजूदगी में उत्तर कोरिया का लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज़ मिसाइल परीक्षण

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की बैठक के बीच उत्तर कोरिया ने 31 अक्टूबर को प्रतिबंधों को लेकर एक अलग अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने 11 देशों और यूरोपीय संघ (EU) की ओर से जारी संयुक्त बयान की आलोचना की.

यह संयुक्त बयान 28 अक्टूबर को जारी किया गया था. इसमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, न्यूजीलैंड, नीदरलैंड, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों की निगरानी और उन्हें लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी.

इस बयान में उत्तर कोरिया की अवैध साइबर गतिविधियों, विदेशों में श्रमिकों की तैनाती और रूस के साथ उसके कथित अवैध सैन्य सहयोग से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया था. साथ ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ की ओर से लगाए गए नए प्रतिबंधों का स्वागत किया गया था.

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के माध्यम से जारी बयान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने प्रतिबंधों को अप्रभावी बताते हुए कहा कि ऐसे प्रतिबंध और दबाव उत्तर कोरिया की परमाणु हथियार संपन्न देश की स्थिति को प्रभावित नहीं कर सकते. उसने अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रयासों को रणनीतिक विफलता करार दिया.

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उत्तर कोरिया की यह प्रतिक्रिया 28 अक्टूबर को जारी 11 देशों और यूरोपीय संघ के संयुक्त प्रतिबंध बयान के संदर्भ में आई थी. इसे सीधे 30 अक्टूबर को अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच हुए आर्कटिक साझेदारी समझौते की प्रतिक्रिया बताना सही नहीं होगा.

APEC सम्मेलन में ट्रंप-किम मुलाकात की अटकलें

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फोटो – Secretary Marco Rubio,@SecRubio

इस घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू अगले महीने चीन के शेनझेन में होने वाला एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) सम्मेलन भी है. यह सम्मेलन 18-19 नवंबर 2026 को आयोजित होना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर में संकेत दिया था कि वह अपनी एशिया यात्रा के दौरान उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात कर सकते हैं. हालांकि, अभी तक इस मुलाकात की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब एक ओर तीनों देश उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ प्रतिबंधों और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच संभावित राजनयिक बातचीत को लेकर भी चर्चा जारी है.

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