India-Cyprus रक्षा साझेदारी में तेजी, तुर्की फैक्टर के बीच क्या हैं रणनीतिक मायने?
India के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 13 अक्टूबर 2026 को Cyprus की राजधानी निकोसिया में वहां के रक्षा मंत्री वासिलिस पाल्मास से मुलाकात की. इस बैठक में दोनों देशों ने वर्ष 2026 के द्विपक्षीय रक्षा सहयोग कार्यक्रम की समीक्षा की और 2027 के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यास, नौसैनिक यात्राओं तथा सैन्य प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.
बैठक में दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच नियमित सुरक्षा संवाद स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया. इसके अलावा, साइप्रस की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में भारतीय कंपनियों की भूमिका, सैन्य उपकरणों के रखरखाव और आधुनिकीकरण तथा रक्षा प्रणालियों के संयुक्त विकास और विनिर्माण में साझेदारी पर चर्चा हुई.

भारत के रक्षा सचिव ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से साइप्रस के रक्षा मंत्री को 2027 की शुरुआत में भारत आने का निमंत्रण भी दिया. यह मुलाकात भारत-साइप्रस रक्षा सहयोग रोडमैप 2026–2031 को आगे बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है.
तुर्की के साथ तनाव के बीच क्यों अहम है यह मुलाकात?

भारत और साइप्रस के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब साइप्रस लंबे समय से तुर्की के साथ क्षेत्रीय विवाद का सामना कर रहा है. दूसरी ओर, तुर्की के पाकिस्तान के साथ करीबी संबंध भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़े रहे हैं.
ऐसे में भारत और साइप्रस के बीच रक्षा संबंधों का विस्तार दोनों देशों के रणनीतिक हितों से जुड़ सकता है. साइप्रस अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए नए रक्षा साझेदारों और उपकरणों के विकल्प तलाश सकता है, जबकि भारत के लिए यह अपने रक्षा उद्योग और सैन्य तकनीक के निर्यात को बढ़ाने का अवसर हो सकता है.
क्या ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद पर हो सकती है बातचीत?
मई 2026 में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडिस की भारत यात्रा के बाद मीडिया रिपोर्टों में साइप्रस की ब्रह्मोस मिसाइल और भारतीय ड्रोन खरीदने में संभावित दिलचस्पी की चर्चा हुई थी. इसलिए अक्टूबर में हुई रक्षा वार्ता के संदर्भ में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोनों देशों के बीच इन हथियारों को लेकर भी बातचीत हुई.

हालांकि, 13 अक्टूबर की बैठक के आधिकारिक विवरण में ब्रह्मोस मिसाइल का नाम नहीं लिया गया है. किसी सौदे पर सहमति या अनुबंध की भी घोषणा नहीं हुई है.
भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग का विस्तार केवल किसी एक हथियार की खरीद तक सीमित नहीं है. आने वाले समय में रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त विनिर्माण और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में होने वाले ठोस समझौते यह स्पष्ट करेंगे कि दोनों देश अपनी साझेदारी को किस स्तर तक ले जाना चाहते हैं.