अमेरिकी सेना ने उड़ान के दौरान GMLRS रॉकेट का लक्ष्य बदला, चलते हुए टारगेट को किया नष्ट

अमेरिकी सेना ने उड़ान के दौरान GMLRS रॉकेट का लक्ष्य बदला, चलते हुए टारगेट को किया नष्ट

अमेरिकी रक्षा कंपनी Lockheed Martin ने अमेरिकी सेना के साथ एक परीक्षण के दौरान GMLRS रॉकेट का उड़ान के बीच में लक्ष्य बदलने की क्षमता का प्रदर्शन किया है. इस परीक्षण में रॉकेट को HIMARS लॉन्चर से दागा गया और उड़ान के दौरान उसके लक्ष्य संबंधी निर्देशों को अपडेट किया गया. इसके बाद रॉकेट ने एक चलते हुए लक्ष्य को सफलतापूर्वक निशाना बनाया. कंपनी ने 28 अक्टूबर 2026 को इस परीक्षण की जानकारी दी.

लॉकहीड मार्टिन के अनुसार, इस परीक्षण में Strigo डेटा लिंक और Remote Interceptor Guidance-360 (RIG-360) तकनीक का इस्तेमाल किया गया. इन तकनीकों को GMLRS रॉकेट के साथ एकीकृत किया गया था, जिससे उड़ान के दौरान लक्ष्य संबंधी जानकारी बदलना संभव हुआ. यह प्रदर्शन दिखाता है कि रॉकेट लॉन्च होने के बाद भी नई जानकारी के आधार पर उसके हमले की दिशा में बदलाव किया जा सकता है.

क्या है GMLRS रॉकेट सिस्टम?

अमेरिकी सेना ने उड़ान के दौरान GMLRS रॉकेट का लक्ष्य बदला, चलते हुए टारगेट को किया नष्ट
फोटो – Lockheed Martin

GMLRS का पूरा नाम Guided Multiple Launch Rocket System है. यह अमेरिकी सेना का सटीक निशाना लगाने वाला गाइडेड रॉकेट सिस्टम है. इसे HIMARS (High Mobility Artillery Rocket System) और M270 MLRS जैसे लॉन्चर प्लेटफॉर्म से दागा जाता है. इसका इस्तेमाल दुश्मन के सैन्य ठिकानों और अन्य निर्धारित लक्ष्यों पर सटीक हमले करने के लिए किया जाता है.

इसकी प्रमुख विशेषताओं में गाइडेंस सिस्टम के जरिए लक्ष्य तक पहुंचने की क्षमता शामिल है. उड़ान के दौरान लक्ष्य संबंधी जानकारी अपडेट करने की नई क्षमता इस सिस्टम को बदलती युद्ध परिस्थितियों में अधिक लचीला बना सकती है.

युद्ध के मैदान में क्यों अहम है यह तकनीक?

युद्ध के दौरान किसी लक्ष्य की स्थिति बदल सकती है या नई खुफिया जानकारी मिलने पर हमले की योजना में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है. ऐसी स्थिति में उड़ान के दौरान रॉकेट को नए निर्देश देने की क्षमता सैन्य बलों को अधिक विकल्प उपलब्ध करा सकती है.

इस तकनीक में डेटा लिंक की अहम भूमिका है. यह रॉकेट और लक्ष्य निर्धारण से जुड़ी प्रणालियों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान में मदद करता है. हालांकि, इसकी प्रभावशीलता लक्ष्य की सटीक जानकारी, संचार व्यवस्था और संबंधित प्रणालियों की क्षमता पर निर्भर करेगी.

ER GMLRS और PrSM में भी इस्तेमाल की संभावना

अमेरिकी सेना ने उड़ान के दौरान GMLRS रॉकेट का लक्ष्य बदला, चलते हुए टारगेट को किया नष्ट
फोटो – Lockheed Martin

लॉकहीड मार्टिन के अनुसार, परीक्षण में इस्तेमाल किए गए डेटा लिंक पैकेज को Extended-Range GMLRS (ER GMLRS) और Precision Strike Missile (PrSM) जैसे अन्य हथियार प्रणालियों में भी इस्तेमाल करने की संभावना है.

ER GMLRS, GMLRS का विस्तारित रेंज वाला संस्करण है, जबकि PrSM अमेरिकी सेना की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. इन हथियारों में ऐसी तकनीक का एकीकरण भविष्य में उड़ान के दौरान लक्ष्य संबंधी जानकारी अपडेट करने की क्षमता बढ़ा सकता है. हालांकि, कंपनी की घोषणा का अर्थ यह नहीं है कि यह क्षमता इन सभी प्रणालियों में पहले से परिचालन स्तर पर उपलब्ध है.

लॉकहीड मार्टिन का यह परीक्षण नेटवर्क आधारित युद्ध क्षमता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे मौजूदा रॉकेट प्रणालियों को नई डेटा लिंक और लक्ष्य निर्धारण तकनीकों के साथ जोड़ने की संभावनाएं सामने आई हैं.

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