GRSE ने लॉन्च किया तीसरा NGOPV युद्धपोत ‘Shreyas’, पांच महीने से कम समय में 3 जहाज लॉन्च
भारत की रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी Garden Reach Shipbuilders and Engineers (GRSE) ने भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे 4 नेक्स्ट जनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) में से तीसरे युद्धपोत ‘Shreyas’ को लॉन्च कर दिया है. कोलकाता में 10 अक्टूबर को हुए इस लॉन्च के साथ GRSE ने पांच महीने से भी कम समय में इस परियोजना के तीन युद्धपोत लॉन्च करने की उपलब्धि हासिल की है.
रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने इससे पहले 20 मई 2026 को पहले युद्धपोत ‘संघमित्रा’ और 11 अगस्त 2026 को दूसरे युद्धपोत ‘श्रुति’ को लॉन्च किया था. ‘Shreyas’ इस श्रृंखला का तीसरा जहाज है, जबकि GRSE को भारतीय नौसेना के लिए कुल चार NGOPV बनाने हैं.
वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ की मौजूदगी में लॉन्च हुआ ‘Shreyas’

युद्धपोत ‘श्रेयस’ को वाइस एडमिरल अजय कोचर की पत्नी रेयमन कोचर ने पारंपरिक अनुष्ठानों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लॉन्च किया. इस अवसर पर वाइस एडमिरल अजय कोचर, PVSM, AVSM और NM, मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. संस्कृत में ‘श्रेयस’ शब्द का अर्थ शुभता और कल्याण से जुड़ा है.
इस मौके पर वाइस एडमिरल अजय कोचर ने GRSE को लगभग पांच महीने के भीतर तीन NGOPV लॉन्च करने के लिए बधाई दी. उन्होंने जहाज निर्माण की गति और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करने में कंपनी के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा कि 100 से अधिक जहाजों की डिलीवरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मौजूदगी के साथ GRSE ने एक प्रमुख जहाज निर्माण कंपनी के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है.
113 मीटर लंबा होगा NGOPV, 8,500 समुद्री मील की परिचालन दूरी

GRSE के अनुसार, नेक्स्ट जनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल मौजूदा ऑफशोर पेट्रोल वेसल की तुलना में बड़े और अधिक सक्षम होंगे. इन्हें बेहतर समुद्री सहनशक्ति, मारक क्षमता और विभिन्न प्रकार के समुद्री अभियानों को अंजाम देने की क्षमता के साथ तैयार किया जा रहा है.
इन युद्धपोतों की लंबाई लगभग 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर होगी. इनका विस्थापन लगभग 3,000 टन होगा और ये अधिकतम 23 नॉट की गति से चल सकेंगे. वहीं, 14 नॉट की क्रूजिंग गति पर इनकी परिचालन दूरी 8,500 समुद्री मील होगी. ये विशेषताएं भारतीय नौसेना को समुद्र में लंबी अवधि तक निगरानी और गश्त करने की क्षमता प्रदान करेंगी.
समुद्री निगरानी, माइन वॉरफेयर और विशेष अभियानों में होगी तैनाती

NGOPV को भारतीय नौसेना की व्यापक समुद्री परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा रहा है. इनका इस्तेमाल तटीय और अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा, समुद्री निगरानी, समुद्री अवरोधन अभियानों और जहाजों पर चढ़कर तलाशी एवं जब्ती (VBSS) जैसे कार्यों में किया जा सकेगा.
इसके अलावा, ये युद्धपोत माइन वॉरफेयर, विशेष अभियानों, समुद्री डकैती रोधी अभियानों और समुद्र में अवैध घुसपैठ रोकने में भी भूमिका निभाएंगे. जरूरत पड़ने पर इन्हें भारत के तात्कालिक क्षेत्र से बाहर चलाए जाने वाले आकस्मिक अभियानों (Out of Area Contingency Operations), मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) तथा खोज एवं बचाव अभियानों में भी तैनात किया जा सकेगा.
इन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अस्पताल संबंधी सेवाओं, संचार खुफिया (COMINT) और बेड़े के रखरखाव से जुड़े कार्यों में सहायता के लिए भी किया जा सकेगा. इस तरह NGOPV भारतीय नौसेना की गश्त और निगरानी के साथ-साथ बहुउद्देशीय समुद्री अभियानों की क्षमता बढ़ाने में योगदान देंगे.
GRSE एक साथ बना रही है नौसेना के नौ युद्धपोत
GRSE के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर पी.आर. हरि (सेवानिवृत्त) ने कहा कि कंपनी ने अपनी परियोजनाओं के निष्पादन की गति में सुधार किया है. इसके परिणामस्वरूप जहाजों के लॉन्च और डिलीवरी की प्रक्रिया में तेजी आई है.
कंपनी के अनुसार, वह फिलहाल भारतीय नौसेना के लिए नौ युद्धपोतों का निर्माण कर रही है. इनमें प्रोजेक्ट 17A के तहत एक उन्नत गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट, चार एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) और चार NGOPV शामिल हैं.
इनके अलावा, GRSE 32 अन्य प्लेटफॉर्म के निर्माण में भी जुटी है, जिनमें निर्यात के लिए बनाए जा रहे 13 जहाज शामिल हैं. कंपनी भारतीय नौसेना के लिए पांच नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट के निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण अनुबंध को भी अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है.
GRSE के मुताबिक, छह दशकों से अधिक के अनुभव के दौरान वह भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल और मित्र देशों को कुल 118 युद्धपोतों की डिलीवरी कर चुकी है. NGOPV परियोजना के तहत ‘श्रेयस’ का लॉन्च भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने और भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक समुद्री प्लेटफॉर्म तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.