PM Narendra Modi ने कहा- BRICS की एकता को ठोस नतीजों में बदलने का समय, रखे 10 बड़े प्रस्ताव
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने BRICS को अगले 20 वर्षों के लिए नई दिशा देने के उद्देश्य से संगठन की कार्यप्रणाली में निरंतरता और वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे. 18वें BRICS शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि BRICS के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदला जाए.
प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS Continuity and Implementation Mechanism बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन की institutional momentum नहीं रुकनी चाहिए. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Troika के माध्यम से BRICS की विभिन्न पहलों और शिखर सम्मेलनों में लिए गए फैसलों का लगातार follow-up किया जा सकेगा.
उन्होंने इसके लिए एक secure digital repository बनाने का भी सुझाव दिया. इसमें BRICS के प्रत्येक निर्णय के साथ संबंधित nodal point, उसकी समय-सीमा और implementation status दर्ज किया जा सकता है. प्रधानमंत्री के मुताबिक इससे संगठन के फैसलों को लागू करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाई जा सकेगी.
Narendra Modi ने कहा- 20 वर्षों में BRICS ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है
BRICS की 20वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संगठन के लिए ‘coming of age’ का क्षण है. पिछले 20 वर्षों में BRICS ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. उन्होंने कहा कि सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और consensus के आधार पर आगे बढ़ते हैं. BRICS किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करता है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगले 20 वर्षों के लिए BRICS को एक नए और ambitious agenda पर काम करना होगा. इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार को BRICS के एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की जरूरत बताई.
Global Governance की मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक ‘pyramid of privilege’ जैसी दिखाई देती है, जहां शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता कुछ देशों के बीच केंद्रित है, जबकि कई देश इन फैसलों से प्रभावित होने के बावजूद उन्हें आकार देने में पर्याप्त भूमिका नहीं निभा पाते. उन्होंने इस व्यवस्था को ‘platform of partnership’ में बदलने का आह्वान किया.
PM मोदी के 10 बड़े प्रस्ताव, BRICS में फैसलों के अमल से UNSC सुधार और Global South की नई भूमिका तक
इसी दिशा में प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS देशों से मिलकर Global Governance Reform के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों को अगली BRICS Summit तक BRICS Reform Roadmap का रूप देने का प्रयास किया जा सकता है. इस रोडमैप के लिए उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों—Representation, Responsiveness और Rule-making—को आधार बनाने की बात कही.
Representation के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि UNSC reform को अब और टाला नहीं जा सकता और इस विषय पर text-based negotiations को निश्चित समय-सीमा और स्पष्ट परिणामों से जोड़ना होगा.
प्रधानमंत्री ने वैश्विक वित्तीय संस्थानों में भी सुधार की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि इन संस्थानों में voting power, leadership positions और policy priorities आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए. जो देश वैश्विक आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, उन्हें global economic governance को दिशा देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए.
Responsiveness के तहत प्रधानमंत्री ने वैश्विक संस्थानों की कार्यक्षमता और संकटों पर उनकी प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थानों में मानवता का विश्वास तभी मजबूत होगा, जब वे समस्याओं का प्रभावी समाधान देने में सक्षम होंगे. इसके लिए collective response की speed, scale और last mile impact पर ध्यान देने की जरूरत है.
Global South की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई.
इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने Seafarers Emergency Support Network बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में seafarers की बड़ी भूमिका है, लेकिन मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें अक्सर पर्याप्त सहायता नहीं मिल पाती. प्रस्तावित नेटवर्क के जरिए विभिन्न देशों की Maritime authorities और missions को जोड़ा जा सकता है, जिससे distress alerts, medical assistance, परिवारों को सूचना देने और evacuation में मदद मिल सके.
Rule-making के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने AI, cyberspace, outer space, biotechnology और critical technologies जैसे उभरते क्षेत्रों में Global South की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भविष्य के वैश्विक नियम तय हो रहे हैं और Global South को केवल rule-taker बने रहने के बजाय rule-shaper बनाने के प्रयास होने चाहिए.
प्रधानमंत्री ने BRICS के माध्यम से Global South के युवा diplomats और policymakers को negotiations skills, practical training और legal expertise उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा. उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में नेतृत्व करने के लिए तैयार है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए. उन्होंने BRICS के जरिए वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, जवाबदेह और सहभागी बनाने पर जोर दिया.