ISRO ने SE-2000 इंजन का पहली बार 200 टन थ्रस्ट पर किया सफल परीक्षण

ISRO की बड़ी कामयाबी, SE-2000 इंजन का पहली बार 200 टन थ्रस्ट पर सफल हॉट-फायर टेस्ट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने भारी-भरकम रॉकेट इंजन विकास कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. ISRO ने महेंद्रगिरि स्थित ISRO Propulsion Complex (IPRC) में SE-2000 इंजन के Power Head Test Article (PHTA) का पहली बार 100% थ्रस्ट स्तर पर सफल हॉट-फायर टेस्ट किया है.

इस परीक्षण के दौरान SE-2000 PHTA को 2,000 kN यानी करीब 200 टन थ्रस्ट पर फायर किया गया. यह इस इंजन के विकास परीक्षणों में अब तक का सबसे उच्च थ्रस्ट स्तर है.

पहली बार 100% थ्रस्ट पर परीक्षण

SE-2000 PHTA का यह नौवां परीक्षण था. इससे पहले इंजन के Power Head Test Article को अलग-अलग थ्रस्ट स्तरों पर परखा जा चुका है. इसमें 94 टन (47%), 120 टन (60%) और 175 टन (88%) थ्रस्ट स्तर शामिल हैं.

अब पहली बार इसे इसकी पूरी क्षमता यानी 200 टन थ्रस्ट पर फायर किया गया. ISRO के लिए यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे इंजन के प्रमुख सिस्टम को उसके निर्धारित अधिकतम थ्रस्ट स्तर पर प्रदर्शन करने की क्षमता का परीक्षण किया गया है.

ISRO की बड़ी कामयाबी, SE-2000 इंजन का पहली बार 200 टन थ्रस्ट पर सफल हॉट-फायर टेस्ट

35 सेकंड चला पूरा टेस्ट

ISRO के मुताबिक, शनिवार को किया गया परीक्षण 35 सेकंड तक चला. इसमें SE-2000 को 5 सेकंड तक 100% थ्रस्ट पर चलाया गया. परीक्षण के दौरान सिर्फ इंजन को अधिकतम थ्रस्ट पर चलाने की क्षमता ही नहीं परखी गई, बल्कि प्रोपेलेंट सप्लाई से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का भी सत्यापन किया गया.

लो-प्रेशर से मीडियम-प्रेशर टैंक पर स्विचिंग का परीक्षण

टेस्ट के दौरान प्रोपेलेंट सप्लाई को लो-प्रेशर टैंक से मीडियम-प्रेशर टैंक में स्विच करने की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में अधिक अवधि तक चलने वाले हॉट-फायर टेस्ट के दौरान इंजन को आवश्यक प्रोपेलेंट सप्लाई निर्बाध रूप से मिलती रहे. यह परीक्षण SE-2000 के आगे होने वाले लंबी अवधि के हॉट-फायर परीक्षणों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

LVM3 को और ताकतवर बनाने की तैयारी

SE-2000 इंजन ISRO के भविष्य के SC120 स्टेज का प्रमुख हिस्सा होगा. SC120 को मौजूदा LVM3 के L110 हाइपरगोलिक स्टेज के स्थान पर विकसित किया जा रहा है. इसके साथ ही LVM3 के क्रायोजेनिक चरण को भी अपग्रेड करने की योजना है. मौजूदा C25 क्रायोजेनिक स्टेज की जगह अधिक शक्तिशाली C32 स्टेज विकसित किया जा रहा है.

LVM3 के इन अपग्रेड्स का मुख्य उद्देश्य रॉकेट की पेलोड ले जाने की क्षमता को बढ़ाना है. ऐसे में SE-2000 का 100% थ्रस्ट पर सफल परीक्षण भारत के अगले चरण के भारी-भरकम लॉन्च व्हीकल विकास कार्यक्रम के लिए एक अहम कदम है.

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