Kuwait ने Rheinmetall के MASS Ship Protection System का दिया ऑर्डर, 8 मिसाइल नौकाओं की बढ़ेगी सुरक्षा
Kuwait ने अपनी नौसेना की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए जर्मनी की रक्षा कंपनी Rheinmetall के साथ एक बड़ा रक्षा समझौता किया है. इस सौदे के तहत कुवैत पहली बार Multi Ammunition Softkill System (MASS) शिप प्रोटेक्शन सिस्टम खरीदेगा. इस सिस्टम को कुवैत की आठ Al Dorra-क्लास गाइडेड मिसाइल बोट्स पर लगाया जाएगा, जिससे वे आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों और अन्य खतरों से बेहतर तरीके से अपनी सुरक्षा कर सकेंगी.
राइनमेटल के अनुसार, यह ऑर्डर कुवैत के पिछले 15 वर्षों के सबसे बड़े नौसैनिक जहाज निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा है. Al Dorra-क्लास स्टील्थ पेट्रोल वेसल्स का निर्माण Abu Dhabi Shipbuilding द्वारा किया जा रहा है, जबकि इस परियोजना का मुख्य ठेकेदार यूएई की EDGE Group है.
क्या है MASS शिप प्रोटेक्शन सिस्टम?
MASS (Multi Ammunition Softkill System) एक अत्याधुनिक Soft-Kill Ship Protection System है. इसका उद्देश्य दुश्मन की एंटी-शिप मिसाइलों को सीधे नष्ट करना नहीं, बल्कि उन्हें भ्रमित (Decoy) करके उनके लक्ष्य से भटका देना है.
यह सिस्टम रडार और इन्फ्रारेड (IR) आधारित मिसाइलों के खिलाफ विशेष डिकॉय (Decoys) लॉन्च करता है, जिससे आने वाली मिसाइल जहाज की बजाय डिकॉय को लक्ष्य समझकर उसकी ओर मुड़ जाती है. इससे युद्धपोत की सुरक्षा की संभावना काफी बढ़ जाती है.
Omnitrap-ER डिकॉय भी होंगे शामिल

इस सौदे में MASS लॉन्चरों के साथ Omnitrap-ER डिकॉय गोला-बारूद भी शामिल है. यह नई पीढ़ी का डिकॉय सिस्टम लंबी दूरी तक प्रभावी है और आधुनिक इमेजिंग रडार तथा इन्फ्रारेड-गाइडेड मिसाइलों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है.
कंपनी के अनुसार, सिस्टम की डिलीवरी 2026 की दूसरी तिमाही से शुरू होगी और 2029 की दूसरी तिमाही तक पूरी कर दी जाएगी. अनुबंध में सिस्टम का एकीकरण (Integration) और परीक्षण (Verification) भी शामिल है.
Kuwait के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
मध्य पूर्व में बढ़ते समुद्री सुरक्षा खतरों और आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों के खतरे को देखते हुए कुवैत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है. MASS सिस्टम के शामिल होने से उसकी नई Al Dorra-क्लास मिसाइल नौकाओं की जीवित रहने (Survivability) और आत्मरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. साथ ही, यह सौदा Rheinmetall के नौसैनिक सुरक्षा प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय मांग में बढ़ोतरी का भी संकेत माना जा रहा है.