South Korea बनाएगा परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां, 2030 के दशक में पहली लॉन्चिंग का लक्ष्य

दक्षिण कोरिया बनाएगा न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन बेड़ा, 2030s तक पहली परमाणु पनडुब्बी लॉन्च करने की तैयारी

उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु और मिसाइल खतरे के बीच South Korea ने बड़ा रक्षा कदम उठाते हुए परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों (Nuclear-Powered Submarines) का बेड़ा तैयार करने की योजना का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. सरकार ने इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को “जांगबोगो-एन प्रोजेक्ट” नाम दिया है.

दक्षिण कोरिया का लक्ष्य 2030 के दशक के मध्य तक अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी लॉन्च करना और दशक के अंत तक उसे नौसेना में शामिल करना है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक सेना ने करीब 8,000 टन वजनी कम से कम तीन परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अटैक सबमरीन बनाने की योजना को मंजूरी दी है. इनका आकार अमेरिकी नौसेना की Virginia-class submarines के लगभग बराबर माना जा रहा है.

यह योजना रक्षा मंत्री Ahn Gyu-back ने जिन्हाए स्थित नौसेना के सबमरीन कमांड में आयोजित “Future Defense Strategy Committee” की बैठक में पेश की. इस दौरान दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति Lee Jae-myung भी मौजूद रहे.

सरकार द्वारा जारी दीर्घकालिक योजना में पांच प्रमुख सिद्धांत तय किए गए हैं, जिनके आधार पर भविष्य की परमाणु-संचालित पनडुब्बियों का डिजाइन, निर्माण और संचालन किया जाएगा. रक्षा मंत्री आह्न ने कहा कि इन पनडुब्बियों में Low-Enriched Uranium (LEU) ईंधन का उपयोग होगा, जिससे लंबे समय तक ऑपरेशन संभव होगा और बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता कम पड़ेगी.

दक्षिण कोरिया ने इस परियोजना को लेकर परमाणु हथियारों से जुड़ी आशंकाओं को भी खारिज किया है. आह्न ने स्पष्ट कहा कि दक्षिण कोरिया का परमाणु हथियार विकसित करने का कोई इरादा नहीं है और वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था के तहत अपनी जिम्मेदारियों का पालन करता रहेगा.

यह घोषणा उस समझौते के लगभग छह महीने बाद सामने आई है, जिसमें अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के परमाणु-संचालित पनडुब्बी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी.

राष्ट्रपति ली जे-म्यंग ने कहा कि यह परियोजना कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा में दक्षिण कोरिया की भूमिका को और मजबूत करेगी. उन्होंने इसे दक्षिण कोरिया-अमेरिका गठबंधन की मजबूती और देश के रक्षा उद्योग के लिए बड़ा कदम बताया. साथ ही उन्होंने युद्धकालीन परिचालन नियंत्रण (Wartime Operational Control) को अमेरिका से वापस लेने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार करने की बात भी कही.

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