Venezuela Operation में ‘रहस्यमयी हथियार’ के इस्तेमाल का दावा, सुरक्षा गार्ड के बयान से मचा हड़कंप

वेनेज़ुएला ऑपरेशन में अमेरिका के ‘रहस्यमयी हथियार’ का दावा, सुरक्षा गार्ड के बयान से मचा हड़कंप

Venezuela में राष्ट्रपति निकोलस मैड्यूरो के खिलाफ कथित अमेरिकी ऑपरेशन को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक इंटरव्यू में खुद को मैड्यूरो का वफादार सुरक्षा गार्ड बताने वाले व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी बलों ने कार्रवाई के दौरान अत्याधुनिक और अज्ञात तकनीक वाले हथियार का इस्तेमाल किया, जिससे Venezuela के कई सैनिक गंभीर रूप से प्रभावित हुए.

बिना किसी चेतावनी के उनके रडार सिस्टम अचानक बंद हो गए

सुरक्षा गार्ड के अनुसार, ऑपरेशन के दिन बिना किसी चेतावनी के उनके रडार सिस्टम अचानक बंद हो गए. इसके कुछ ही क्षणों बाद बड़ी संख्या में ड्रोन उनके ठिकानों के ऊपर दिखाई दिए. इसके बाद कथित तौर पर करीब आठ हेलीकॉप्टर इलाके में पहुंचे, जिनसे लगभग 20 अत्याधुनिक हथियारों से लैस सैनिक नीचे उतरे.

गार्ड का दावा है कि इन सैनिकों की फायरिंग बेहद सटीक और तेज़ थी और उनकी संख्या कम होने के बावजूद वे सैकड़ों वेनेज़ुएला सुरक्षाबलों पर भारी पड़ गए.

सबसे गंभीर आरोप उस क्षण से जुड़ा है जब कथित तौर पर एक अज्ञात ऊर्जा या ध्वनि-आधारित हथियार का उपयोग किया गया.

गार्ड के अनुसार,

“अचानक ऐसा महसूस हुआ जैसे सिर अंदर से फट रहा हो. कई लोगों के नाक से खून बहने लगा, कुछ को खून की उल्टियां हुईं और हम जमीन पर गिर पड़े. हम हिल भी नहीं पा रहे थे.”

उसका कहना है कि इस हथियार के प्रभाव के बाद अधिकांश सुरक्षाकर्मी लड़ने की स्थिति में नहीं रहे, जबकि हमलावर दल बिना किसी नुकसान के ऑपरेशन पूरा कर निकल गया.

अमेरिकी प्रशासन या पेंटागन की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि

हालांकि, अमेरिकी प्रशासन या पेंटागन की ओर से इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया की कई सेनाएं Directed Energy Weapons, sonic या microwave आधारित सिस्टम पर रिसर्च कर रही हैं, लेकिन मैदान में इनके इस्तेमाल को लेकर अब तक कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है.

विश्लेषकों के मुताबिक, यह बयान मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा भी हो सकता है, या फिर ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीकों को गलत तरीके से समझा गया हो.

फिलहाल यह मामला एक प्रत्यक्षदर्शी के दावे पर आधारित है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन इस बयान ने लैटिन अमेरिका में अमेरिकी सैन्य क्षमताओं को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है.

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