2025 Asia Power Index: अमेरिका एशिया की सबसे बड़ी शक्ति, चीन की रैंकिंग गिरी; भारत तीसरी पोज़िशन मजबूत

2025 Asia Power Index: US Tops, China Weakens, India Retains 3rd Position

Lowy Institute ने अपनी बहुप्रतीक्षित 2025 Asia Power Index रिपोर्ट जारी कर दी है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मौजूद 26 देशों की आर्थिक, सैन्य, कूटनीतिक और रणनीतिक क्षमताओं का व्यापक विश्लेषण करती है.

इस वर्ष की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए हैं—विशेष रूप से चीन की गिरती शक्ति, अमेरिका की स्थिर बढ़त, और भारत की मजबूत क्षेत्रीय स्थिति को लेकर.

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि एशिया में शक्ति का समीकरण लगातार बदल रहा है, और यह क्षेत्र अब एकल-प्रभुत्व वाली जगह नहीं, बल्कि मल्टी-पोलर (बहुध्रुवीय) भू-राजनीतिक मंच में बदल रहा है.

Lowy Institute का 2025 Asia Power Index किस आधार पर रैंकिंग देता है?

Lowy Institute का Asia Power Index किसी देश की “कुल शक्ति” को कई मापदंडों के आधार पर मापता है.

रैंकिंग सिर्फ सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि 8 बड़े इंडिकेटर्स और 100 से अधिक सब-इंडिकेटर्स पर आधारित होती है.

Lowy Institute हर देश की शक्ति को आठ मुख्य मानदंडों पर स्कोर देता है.

यह मानदंड देश की हार्ड पावर, सॉफ्ट पावर, आर्थिक प्रभाव, रणनीतिक क्षमता का संयुक्त मूल्यांकन करते हैं.

1. Military Capability (सैन्य क्षमता)

सैन्य क्षमता के तहत सेना का आकार, हथियारों की गुणवत्ता, मिसाइल और परमाणु क्षमता, नेवी/एयरफोर्स की ताकत और सैन्य आधुनिकीकरण को देखा जाता है.

2. Defence Networks (रक्षा साझेदारियाँ)

सैन्य गठबंधन (जैसे: AUKUS, QUAD), रक्षा सहयोग समझौते, संयुक्त अभ्यास और रणनीतिक पार्टनरशिप को रखा गया है.

3. Economic Capability (आर्थिक क्षमता)

आर्थिक क्षमता के तहत आर्थिक स्थिरता, उत्पादन क्षमता, तकनीकी क्षमता, फाइनेंशियल सिस्टम की मजबूती को देखा जाता है.

4. Economic Relationships (व्यापारिक प्रभाव)

एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश (FDI), सप्लाई चेन में भूमिका और क्षेत्रीय साझेदारियाँ को भी इस रिपोर्ट में देखा गया है.

5. Diplomatic Influence (कूटनीतिक प्रभाव)

अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय रिश्ते, विदेश नीति की सक्रियता, बहुपक्षीय मंचों (G20, ASEAN, SCO, UN) में प्रभाव और कूटनीतिक विजिट्स और समझौते

2025 Asia Power Index: US Tops, China Weakens, India Retains 3rd Position

6. Cultural Influence (सांस्कृतिक प्रभाव)

सॉफ्ट पावर, मीडिया, शिक्षा, खेल, मनोरंजन, प्रवासी समुदाय का प्रभाव और सांस्कृतिक स्वीकार्यता

7. Resilience (लचीलापन / क्षमता)

अर्थव्यवस्था का जोखिम झेलने की क्षमता, राजनीतिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक संरचना

8. Future Resources (भविष्य की क्षमता)

जनसंख्या, शिक्षा और स्किल डेवेलपमेंट, तकनीकी प्रगति और नवाचार (Innovation)

कैसे बनी 2025 Asia Power Index की Final Ranking?

·        हर देश को इन 8 में से प्रत्येक कैटेगरी में स्कोर दिया जाता है (0–100).

·        फिर इनका एक संयुक्त पावर स्कोर (Composite Score) तैयार किया जाता है.

·        इसी स्कोर के आधार पर देश की Asia Power Ranking तय होती है.

अमेरिका बना एशिया का नंबर–1 पावर सेंटर

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका लगातार आठवीं बार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली शक्ति बना रहा.

क्यों अमेरिका शीर्ष पर है?

सैन्य शक्ति में सबसे आगे 

अमेरिका की फोर्स प्रोजेक्शन—नेवी, एयरफोर्स और ओवरसीज बेस—एशिया में सबसे प्रभावशाली है.

कूटनीतिक नेटवर्क सबसे बड़ा

अमेरिका के पास इंडो-पैसिफिक में गठबंधन और साझेदारियों का सबसे विस्तृत नेटवर्क है—जैसे जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस और भारत.

आर्थिक प्रभाव मजबूत

एशियाई देशों के साथ व्यापार, निवेश और तकनीक में इसकी पकड़ अभी भी अव्वल है.

AUKUS और Quad जैसे समूहों में नेतृत्व

इससे क्षेत्रीय सुरक्षा में अमेरिका का प्रभाव और बढ़ गया है.

कुल मिलाकर, अमेरिका की शक्ति स्थिर और स्थाई दिखती है—यह एशिया में “सर्वोच्च बाहरी शक्ति” बना हुआ है.

चीन की पावर में गिरावट—चिंता की संकेत

रिपोर्ट में चीन की पावर स्कोर में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज की गई है.

Lowy Institute के अनुसार यह गिरावट सामान्य नहीं, बल्कि चीन की कमज़ोर होती अर्थव्यवस्था, घटती सॉफ्ट पावर, और पड़ोसी देशों से बढ़ते तनाव का परिणाम है.

चीन क्यों कमजोर पड़ रहा है?

आर्थिक वृद्धि में भारी गिरावट

चीन की GDP वृद्धि दर कम हुई है और उसकी क्षेत्रीय आर्थिक पकड़ पहले जितनी मजबूत नहीं रही.

डिप्लोमैटिक प्रभाव में कमी

एशियाई देशों—खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया—में चीन के प्रति अविश्वास बढ़ा है.

पड़ोसी विवादों का असर

फिलीपींस, ताइवान, जापान और भारत के साथ लगातार टकराव ने चीन की “नेटवर्क पावर” को कम कर दिया.

सैन्य प्रभाव तो मजबूत है, लेकिन अस्थिरता का कारण भी

क्षेत्र में चीन की आक्रामकता उसके लिए सॉफ्ट-पावर घाटे का कारण बन रही है.

रिपोर्ट में चीन दूसरी पोज़िशन पर है, लेकिन उसका पावर गैप अमेरिका से बढ़ गया है.

भारत – एशिया की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति, क्षेत्रीय नेतृत्व मजबूत

इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस वर्ष भी नंबर 3 पोज़िशन पर कायम है और इसकी पावर स्कोर में सुधार हुआ है. रिपोर्ट भारत को “उभरता क्षेत्रीय नेता” (Emerging Regional Leader) कहती है.

भारत की मजबूती कहाँ बढ़ी?

कूटनीतिक प्रभाव

भारत की विदेश नीति बेहद सक्रिय रही—Quad, G20 प्रेसीडेंसी, इंडो-पैसिफिक साझेदारियाँ और दक्षिण एशिया में नेतृत्व.

तेज़ आर्थिक वृद्धि

एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था—भारत की आर्थिक क्षमता स्कोर में सुधार हुआ.

सैन्य आधुनिकीकरण

मिसाइल तकनीक, नेवी विस्तार, फाइटर जेट प्रोग्राम, रक्षा उत्पादन (Make in India) ने भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत किया है. 

रणनीतिक निर्भरता में कमी

भारत अब अमेरिका, रूस, यूरोप—सभी के साथ संतुलित संबंध रखकर एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभर रहा है.

कहाँ सुधार की जरूरत है?

  •  सैन्य लॉजिस्टिक्स और फोर्स प्रोजेक्शन चीन और अमेरिका की तुलना में कमजोर
  •      रक्षा बजट अनुपात अभी भी कम
  •        टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री विस्तार की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत “टॉप-2 एशियन पावर” बनने की क्षमता रखता है.

एशिया का पावर बैलेंस कैसे बदल रहा है?

रिपोर्ट बताती है कि एशिया अब एक बहुध्रुवीय शक्ति संरचना बन रहा है.

मुख्य बदलाव:

·        जापान और दक्षिण कोरिया अपनी सैन्य क्षमताएँ बढ़ा रहे हैं.

·        इंडोनेशिया और वियतनाम क्षेत्रीय सुरक्षा में नई भूमिका निभा रहे हैं.

·        दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन के खिलाफ कड़ा रुख.

·        AUKUS और Quad जैसे सैन्य गठबंधन अब एशिया की सुरक्षा का नया आधार हैं.

·        ताइवान–चीन तनाव और साउथ चाइना सी विवाद सबसे बड़ा सुरक्षा जोखिम बन चुके हैं

2025 एशिया की Top 10 शक्तियाँ

1-संयुक्त राज्य अमेरिका (USA), 2- चीन (China),3- भारत (India),4- जापान, 5-रूस,6- दक्षिण कोरिया, ,7-ऑस्ट्रेलिया, 8- सिंगापुर, 9- इंडोनेशिया,10- वियतनाम

एशिया का भविष्य किस दिशा में?

Lowy Institute की 2025 Asia Power Index रिपोर्ट साफ तौर पर दिखाती है कि अमेरिका की बढ़त अभी भी सुरक्षित है. जबकि चीन की शक्ति धीमी गति से घट रही है. वहीं भारत सबसे तेजी से उभरती हुई एशियाई शक्ति है.

इंडो-पैसिफिक का पूरा शक्ति-संतुलन बदल रहा है. भविष्य एक मल्टी-पोलर एशिया का है, जिसमें भारत की भूमिका निर्णायक होगी. यह रिपोर्ट आने वाले वर्षों की भू-राजनीतिक दिशा को समझने में बेहद महत्वपूर्ण है.

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