Middle East में हथियारों की बड़ी डील: America ने 8.6 अरब डॉलर के हथियार बेचने को दी मंजूरी
America विदेश विभाग ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए मध्य पूर्व के अपने प्रमुख सहयोगी देशों—इज़राइल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात—को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य हथियारों और रक्षा प्रणालियों की बिक्री को मंजूरी दे दी है.
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान को नौ सप्ताह हो चुके हैं और हाल ही में लागू हुआ युद्धविराम अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में है.
इस डील में सबसे बड़ा हिस्सा कतर को मिला है, जिसे 4.01 अरब डॉलर की लागत से पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पुनःपूर्ति सेवाएं दी जाएंगी. इसके साथ ही कतर को करीब 992.4 मिलियन डॉलर की लागत वाले एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम (APKWS) भी दिए जाएंगे, जो लेजर-गाइडेड हथियार किट हैं और बेहद सटीक हमले के लिए जाने जाते हैं.
कुवैत की सैन्य ताकत बढ़ेगी, 2.5 अरब डॉलर की कमान प्रणाली मंजूर
वहीं कुवैत को 2.5 अरब डॉलर की लागत वाली एकीकृत युद्ध कमान प्रणाली (Integrated Combat Command System) की बिक्री को मंजूरी मिली है, जिससे उसकी सैन्य समन्वय और ऑपरेशन क्षमता में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है. इज़राइल को भी लगभग 992.4 मिलियन डॉलर के एडवांस्ड प्रिसिजन हथियार मिलेंगे, जबकि संयुक्त अरब अमीरात को 147.6 मिलियन डॉलर के APKWS सिस्टम दिए जाएंगे.
इन सौदों में प्रमुख रक्षा कंपनियों की भी बड़ी भूमिका है. APKWS सिस्टम के लिए BAE Systems मुख्य ठेकेदार है, जबकि कतर के पैट्रियट सिस्टम और कुवैत की कमान प्रणाली के लिए RTX (पूर्व में रेथियॉन) और Lockheed Martin प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं. इसके अलावा Northrop Grumman भी कुवैत डील में शामिल है.
अमेरिका ने अपने यूरोपीय सहयोगियों—जैसे ब्रिटेन, पोलैंड, लिथुआनिया और एस्टोनिया—को चेतावनी दी है कि ईरान के साथ युद्ध के चलते अमेरिकी हथियार भंडार तेजी से घट रहे हैं, जिसके कारण हथियारों की डिलीवरी में लंबी देरी हो सकती है.
ईरान युद्ध और नाजुक युद्धविराम के बीच आया बड़ा फैसला
दरअसल, ईरान के साथ संघर्ष के दौरान इज़राइल और खाड़ी देशों को लगातार ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी रक्षा जरूरतें और बढ़ गई हैं. ऐसे में यह हथियार सौदा न केवल उनकी सुरक्षा मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पुष्टि की कि उन्हें ईरान के खिलाफ अतिरिक्त सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है और उन्होंने तेहरान द्वारा पेश किए गए नए युद्धविराम प्रस्ताव पर असंतोष जताया है. हालांकि युद्धविराम लागू है, लेकिन अभी भी कई अहम लक्ष्य अधूरे हैं—जैसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना और उसकी मिसाइल क्षमताओं को खत्म करना.
कुल मिलाकर, यह डील इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में तनाव अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि आने वाले समय में सैन्य प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है.