1 करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर माडवी हिडमा एनकाउंटर में ढेर, सुरक्षा बलों को सबसे बड़ी सफलता
देश के सबसे खतरनाक और वांछित नक्सलियों में गिने जाने वाले माडवी हिडमा को सुरक्षा बलों ने मारेदुमिली जंगल (आंध्र प्रदेश) में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान सोमवार सुबह ढेर कर दिया है.
हिडमा पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था और वह पिछले दो दशकों में कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था.
इस ऑपरेशन को पुलिस और विशेष इंटेलिजेंस एजेंसियों ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया. यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़–आंध्र सीमा के घने जंगलों में हुई, जहां सुरक्षा बलों को नक्सलियों की गतिविधियों की पुख्ता जानकारी मिली थी.
कौन था माडवी हिडमा?
माडवी हिडमा, जिसे पुलिस विभाग “भारत का सबसे वांछित नक्सली कमांडर” मानता था, People’s Liberation Guerrilla Army (PLGA) बटालियन-1 का कमांडर था. CPI (माओवादी) संगठन की Dandakaranya Special Zonal Committee और Central Committee का महत्वपूर्ण सदस्य था. वह छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पूवर्ती गाँव का निवासी है. 16 वर्ष की उम्र में नक्सल संगठन में शामिल हुआ था.

उसके नाम पर सबसे बड़े हमले
- 2010 दंतेवाड़ा हमला — 76 CRPF जवान शहीद
- 2013 झीरम घाटी हमला — कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की हत्या
- सुरक्षाबलों पर लगभग 25 से अधिक बड़े हमलों में शामिल
कैसे हुआ एनकाउंटर?
सोमवार सुबह लगभग 6:30 बजे, सुरक्षा बलों ने मारेदुमिली के जंगल क्षेत्र में संदिग्ध मूवमेंट का पता चला. जिसके बाद ऑपरेशन में शामिल हुए आंध्र पुलिस, छत्तीसगढ़ सुरक्षा बल,स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB).
झड़प के दौरान सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर हिडमा और उसके साथियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों ओर से गोलाबारी शुरू हुई. लगभग एक घंटे की मुठभेड़ में हिडमा सहित 6 नक्सली ढेर हो गए.
इस मुठभेड़ में हिडमा की पत्नी राजे भी मारी गई है. इस मुठभेड़ के दौरान मौके से हथियार, गोलाबारूद और माओवादी साहित्य बरामद हुआ है.
सुरक्षा बलों के लिए ऐतिहासिक सफलता
हिडमा वर्षों से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में “टॉप टारगेट” था. उसकी मृत्यु को सुरक्षा विशेषज्ञ नक्सली संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका मान रहे हैं, क्योंकि वह PLGA की सबसे आक्रामक फौज का कमांडर था और दक्षिण बस्तर में नक्सली ऑपरेशंस का असली चेहरा वही था. उसके नेटवर्क में 200–300 प्रशिक्षित लड़ाके थे.
नक्सल आंदोलन पर इसका असर
- संगठन को भारी नेतृत्व संकट पैदा होगा
- आगामी महीनों में नक्सली गतिविधियों में गिरावट की संभावना
- PLGA की ऑपरेशनल क्षमता आधी से भी कम हो सकती है.
- हिडमा के स्तर का कमांडर तैयार करने में सालों लगेंगे
आगे की चुनौती
भले ही हिडमा मारा गया हो, लेकिन छत्तीसगढ़–आंध्र–ओडिशा बॉर्डर में कई नक्सली समूह अब भी सक्रिय हैं. जंगलों में गहराई तक मौजूद नक्सली ठिकानों को खत्म करने के लिए लगातार अभियान की जरूरत है. फिर भी सुरक्षा बलों का यह ऑपरेशन पिछले कई सालों की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है.
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