भारतीय नौसेना का तीसरा डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट ‘डीएससी A22’ लॉन्च, मेक इन इंडिया को मिला नया बल
भारतीय नौसेना की ताकत और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. 05x डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (डीएससी) परियोजना के तहत निर्मित तीसरे पोत ‘डीएससी A22 (यार्ड 327)’ का जलावतरण पश्चिम बंगाल के टीटागढ़ में किया गया.
इस समारोह की अध्यक्षता कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल सूरज बेरी ने की, जबकि नौसेना की परंपरा के अनुसार उनकी पत्नी श्रीमती कंगना बेरी ने जहाज का जलावतरण किया.
डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट परियोजना की पृष्ठभूमि

भारत सरकार और मैसर्स टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (टीआरएसएल), कोलकाता के बीच 12 फरवरी 2021 को पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट के निर्माण का अनुबंध हुआ था. यह परियोजना भारतीय नौसेना के तटीय गोताखोरी अभियानों के लिए एक बड़ी आवश्यकता को पूरा करती है.
जहाज की विशेषताएँ
यह पोत कटमरैन पतवार डिज़ाइन पर आधारित है. यह अत्याधुनिक गोताखोरी उपकरणों से लैस है. इसका विस्थापन (Displacement) लगभग 380 टन है. इसे तटीय जल में गोताखोरी कार्यों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है.
इन जहाजों का निर्माण पूरी तरह से भारत में किया गया है और यह भारतीय नौवहन रजिस्टर (IRS) द्वारा निर्धारित नौसेना मानकों के अनुरूप है. डिजाइन चरण के दौरान इनका हाइड्रोडायनामिक विश्लेषण और मॉडल परीक्षण विशाखापत्तनम स्थित नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला (NSTL) में किया गया.
मेक इन इंडिया का प्रतीक
‘डीएससी A22’ का जलावतरण भारत सरकार और रक्षा मंत्रालय की मेक इन इंडिया पहल का उत्कृष्ट उदाहरण है. इस परियोजना ने न केवल स्वदेशी डिजाइन और उत्पादन को प्रोत्साहित किया है, बल्कि भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता को भी मजबूत किया है.
यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और आधुनिक विनिर्माण के बल पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है.