GRSE ने भारतीय नौसेना को सौंपा पांचवां ASW-SWC युद्धपोत ‘Amini’, 119 युद्धपोतों के निर्माण का आंकड़ा पार
भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करते हुए गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने भारतीय नौसेना को पांचवां एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ‘Amini’ सौंप दिया है. रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र के इस रक्षा उपक्रम ने आठ ASW-SWC युद्धपोतों के निर्माण का अनुबंध हासिल किया था. गुरुवार, 5 नवंबर को रियर एडमिरल गौतम मरवाहा, VSM, CSO (Tech), मुख्यालय पूर्वी नौसेना कमान ने इस युद्धपोत को औपचारिक रूप से स्वीकार किया.
‘Amini’ GRSE द्वारा निर्मित 119वां युद्धपोत है, जबकि भारतीय नौसेना को सौंपा गया यह उसका 81वां युद्धपोत है. यह उपलब्धि भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी युद्धपोतों के निर्माण और आपूर्ति में GRSE की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है.
आधुनिक हथियारों से लैस है ‘Amini’

‘अमिनी’ को विशेष रूप से तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है. यह समुद्र के भीतर निगरानी, पनडुब्बियों की खोज और उन पर हमला करने के साथ-साथ विमानों के सहयोग से समन्वित पनडुब्बी रोधी अभियान संचालित कर सकता है. इसमें आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम, हल्के टॉरपीडो और एंटी-सबमरीन वारफेयर रॉकेट लगाए गए हैं. इन प्रणालियों की मदद से यह पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और निशाना बनाने में सक्षम है.
लगभग 77.6 मीटर लंबा यह युद्धपोत मरीन डीजल इंजन और वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित होता है. इसकी अधिकतम गतिशीलता और लगभग 2.7 मीटर का कम ड्राफ्ट इसे उथले तटीय जलक्षेत्र में प्रभावी ढंग से काम करने में सक्षम बनाता है. इस वजह से यह तटीय इलाकों में पनडुब्बियों और अन्य पानी के भीतर मौजूद खतरों का पता लगाने तथा उन्हें निष्क्रिय करने जैसे अभियानों के लिए उपयोगी है.
‘Amini’ में लगभग 88 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल

आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत निर्मित ‘अमिनी’ में लगभग 88 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इसमें GRSE द्वारा निर्मित 30 मिमी की नेवल सरफेस गन भी लगाई गई है. यह युद्धपोत निर्माण में स्वदेशी तकनीक और रक्षा उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने की दिशा में शिपयार्ड के योगदान को दर्शाता है.

GRSE के अनुसार, फिलहाल शिपयार्ड 13 प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म के निर्माण पर काम कर रहा है. इनमें एक प्रोजेक्ट 17A एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट, तीन ASW-SWC, चार नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल (NGOPV) और पांच नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, GRSE 36 अन्य पोतों का भी निर्माण कर रहा है, जिनमें 13 निर्यात के लिए तैयार किए जा रहे प्लेटफॉर्म शामिल हैं.
इन परियोजनाओं के जरिए GRSE भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत करने और भारत की युद्धपोत निर्माण क्षमता के विस्तार में योगदान दे रहा है.