फ्रांस ने SyLEx साउंडिंग रॉकेट का किया सफल परीक्षण, M51.4 मिसाइल के विकास को मिलेगी मदद

फ्रांस ने SyLEx साउंडिंग रॉकेट का किया सफल परीक्षण, M51.4 मिसाइल के विकास को मिलेगी मदद

फ्रांस ने अपनी स्वदेशी सबऑर्बिटल परीक्षण क्षमता को मजबूत करते हुए SyLEx साउंडिंग रॉकेट का सफल प्रक्षेपण किया है. फ्रांस की रक्षा खरीद एवं तकनीकी एजेंसी DGA (Direction générale de l’armement) ने 3 और 4 नवंबर 2026 की मध्यरात्रि को बिस्कारोस स्थित अपने मिसाइल परीक्षण केंद्र से यह प्रक्षेपण किया. इस उड़ान के दौरान फ्रांस की अगली पीढ़ी की M51.4 पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रयोग किए गए.

इस साउंडिंग रॉकेट को फ्रांसीसी एयरोस्पेस एवं रक्षा कंपनी ArianeGroup ने DGA के नेतृत्व में विकसित किया है. SyLEx का पूरा नाम Système de Lancement d’Expériences है, जिसका अर्थ प्रयोग प्रक्षेपण प्रणाली है. इसका इस्तेमाल उच्च वायुमंडल और वायुमंडल से बाहर सबऑर्बिटल क्षेत्र में नई तकनीकों के परीक्षण के लिए किया जाता है. यह सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों के लिए तैयार किया गया है.

SyLEx का दूसरा प्रक्षेपण, पहला ऑपरेशनल फ्लाइट

ArianeGroup के मुताबिक, 4 नवंबर को किया गया यह SyLEx सिस्टम का दूसरा सफल प्रक्षेपण था. हालांकि, यह इसका पहला ऑपरेशनल फ्लाइट था. इससे पहले 28 नवंबर 2025 को इस रॉकेट का पहला प्रदर्शन परीक्षण किया गया था. उस उड़ान में सिंगल-स्टेज संस्करण और इसके लॉन्च पैड की क्षमता का प्रदर्शन किया गया था. इस बार भी सिंगल-स्टेज संस्करण का इस्तेमाल किया गया, जिसमें DGA और फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्रालय के लिए एक प्रयोगात्मक पेलोड ले जाया गया.

इस परीक्षण का एक प्रमुख उद्देश्य M51.4 मिसाइल के भविष्य के पेलोड की तकनीकी क्षमताओं को बेहतर बनाने से जुड़ा था. DGA के अनुसार, इस उड़ान में किए गए प्रयोगों से M51.4 के विकास के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि हासिल हुई है. साथ ही, परीक्षण ने सबऑर्बिटल प्रयोगों के लिए SyLEx रॉकेट की विश्वसनीयता की भी पुष्टि की. हालांकि, एजेंसी ने इस उड़ान में किए गए विशिष्ट प्रयोगों और हासिल की गई ऊंचाई का खुलासा नहीं किया है.

क्या है SyLEx रॉकेट की क्षमता?

फ्रांस ने SyLEx साउंडिंग रॉकेट का किया सफल परीक्षण, M51.4 मिसाइल के विकास को मिलेगी मदद
फोटो – Direction générale de l’armement

SyLEx फ्रांस के लिए एक महत्वपूर्ण स्वदेशी परीक्षण प्रणाली है. इसके दो संस्करण विकसित किए जा रहे हैं. पहला सिंगल-स्टेज और दूसरा टू-स्टेज संस्करण है. ArianeGroup के अनुसार, इसके सिस्टम की अलग-अलग कॉन्फिगरेशन के आधार पर 140 से 400 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता निर्धारित की गई है. इसकी अधिकतम पेलोड क्षमता 600 किलोग्राम तक हो सकती है. सिंगल-स्टेज संस्करण की पेलोड क्षमता 300 किलोग्राम है, जबकि टू-स्टेज संस्करण में 600 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की योजना है. टू-स्टेज संस्करण का पहला प्रक्षेपण 2027 तक प्रस्तावित है.

इसकी मदद से हाइपरसोनिक तकनीक के प्रदर्शनकर्ताओं, वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने वाली तकनीकों और माइक्रोग्रैविटी से जुड़े प्रयोग किए जा सकते हैं. इस तरह यह केवल मिसाइल विकास ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए भी उपयोगी है.

फ्रांस को मिली संप्रभु सबऑर्बिटल परीक्षण क्षमता

SyLEx कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू फ्रांस की अपनी सबऑर्बिटल परीक्षण क्षमता को बहाल करना है. फ्रांस कई दशकों से इस तरह के परीक्षणों के लिए अपनी स्वतंत्र क्षमता से वंचित था. इस रॉकेट के विकास से अब उसे उच्च वायुमंडल और सबऑर्बिटल क्षेत्र में प्रयोग करने के लिए विदेशी प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

इस परीक्षण के दौरान DGA ने बिस्कारोस और हर्टिन स्थित अपनी परीक्षण सुविधाओं के रडार, ऑप्टिकल उपकरणों और टेलीमेट्री प्रणालियों का इस्तेमाल किया. इसके अलावा, फ्रांसीसी परीक्षण एवं मापन पोत Monge पर मौजूद विशेष उपकरणों की मदद से उड़ान के दौरान सबऑर्बिटल क्षेत्र में हुई प्रयोगात्मक गतिविधियों पर नजर रखी गई.

गौरतलब है कि SyLEx का यह प्रक्षेपण फ्रांस के M51.4 मिसाइल कार्यक्रम के लिए भी महत्वपूर्ण है. फ्रांस अपनी समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता के तहत M51 बैलिस्टिक मिसाइल परिवार का विकास कर रहा है. ऐसे में SyLEx के जरिए किए जाने वाले प्रयोग भविष्य की मिसाइल तकनीकों और उनके पेलोड की क्षमताओं को बेहतर बनाने में मदद करेंगे.

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