जर्मनी के लिए GRSE के पांचवें मल्टी-पर्पज पोत की कील रखी गई, 12 जहाजों का है निर्यात ऑर्डर
कोलकाता स्थित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने जर्मनी के लिए बनाए जा रहे पांचवें मल्टी-पर्पज वेसल (MPV) की कील रखने के साथ अपने निर्यात परियोजना में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. यह समारोह 29 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में आयोजित किया गया. ये जहाज जर्मनी की कंपनी Carsten Rehder Schiffsmakler and Reederei GmbH & Co. KG के लिए बनाए जा रहे हैं.
रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरत्न कंपनी GRSE के मुताबिक, यह परियोजना उसके सबसे बड़े वाणिज्यिक जहाज निर्यात ऑर्डर का हिस्सा है. इस परियोजना के तहत कुल 12 CORAL श्रेणी के मल्टी-पर्पज वेसल का डिजाइन और निर्माण किया जा रहा है. इस परियोजना के जरिए GRSE अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाज निर्माण बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ भारत में निर्मित जहाजों के निर्यात को भी बढ़ावा दे रही है.
जून 2024 में चार जहाजों का हुआ था पहला अनुबंध

इस परियोजना के तहत पहला अनुबंध जून 2024 में चार जहाजों के निर्माण के लिए हुआ था. इसके बाद अक्टूबर 2024 में चार और जहाजों के लिए दूसरा अनुबंध किया गया. पांचवां जहाज इसी दूसरे अनुबंध के तहत बनाया जा रहा है. वहीं, सितंबर 2025 में चार हाइब्रिड प्रोपल्शन वाले मल्टी-पर्पज वेसल के निर्माण के लिए तीसरा अनुबंध किया गया. इसके साथ ही इस परियोजना के तहत कुल जहाजों की संख्या बढ़कर 12 हो गई.

GRSE के अनुसार, प्रत्येक जहाज की लंबाई 120 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर और ड्राफ्ट 5.85 मीटर होगा. इनकी डेडवेट क्षमता 7,500 टन निर्धारित की गई है. जहाजों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे बल्क कार्गो, सामान्य माल और बड़े आकार के प्रोजेक्ट कार्गो का परिवहन कर सकें. इसके अलावा, इनके हैच कवर पर कंटेनर और डेक पर पवन टर्बाइन के कई ब्लेड ले जाने की भी क्षमता होगी.

इन जहाजों के डिजाइन और निर्माण में GRSE के साथ जर्मनी की कई समुद्री कंपनियां भी सहयोग कर रही हैं. इनमें F.H. Bertling, ForestWave Navigation/Schulte & Bruns और Delft Shipping शामिल हैं. तकनीकी डिजाइन में SEDS सहयोग कर रही है, जबकि जहाजों का क्लासिफिकेशन और सर्टिफिकेशन DNV की ओर से किया जाएगा.
इस कील-स्थापना समारोह में GRSE, Carsten Rehder और DNV के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.