Russia के Kursk परमाणु संयंत्र की कूलिंग टावर से टकराया Drone ; IAEA ने जताई परमाणु सुरक्षा की चिंता
Russia के Kursk परमाणु ऊर्जा संयंत्र की एक रिएक्टर यूनिट की कूलिंग टावर को 17 सितंबर की सुबह ड्रोन से निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा कि उसे इस घटना की जानकारी दी गई है. एजेंसी के मुताबिक, जिस यूनिट की कूलिंग टावर प्रभावित हुई, वह घटना के समय संचालन में थी और हमले के बाद उसके ऑपरेटिंग मोड में कोई बदलाव नहीं हुआ. आग लगने की भी सूचना नहीं है.
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने परमाणु प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह के हमले को अस्वीकार्य बताया है. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले परमाणु सुरक्षा और सिक्योरिटी के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं, चाहे वे कहीं भी हों. ग्रॉसी ने परमाणु दुर्घटना के जोखिम को रोकने के लिए अधिकतम सैन्य संयम बरतने की अपील भी दोहराई.
रूस ने यूक्रेन पर आरोप लगाया

रूसी सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने बाद में कहा कि 17 सितंबर को कुर्स्क परमाणु ऊर्जा संयंत्र की पहली पावर यूनिट की कूलिंग टावर पर गिरने के दौरान एक ड्रोन में विस्फोट हुआ. Rosatom ने इसे यूक्रेनी ड्रोन बताया और कहा कि इससे मामूली नुकसान हुआ, लेकिन संयंत्र के संचालन पर इसका असर नहीं पड़ा. कंपनी के मुताबिक, संबंधित पावर यूनिट 100 प्रतिशत क्षमता पर काम करती रही और रेडिएशन स्तर में कोई बदलाव नहीं हुआ.
हालांकि, रूस के भीतर से आई एक अन्य प्रतिक्रिया में कुर्स्क परमाणु संयंत्र की प्रेस सेवा ने ड्रोन हमले की जानकारी को खारिज किया और कहा कि स्टेशन सामान्य रूप से काम कर रहा है. वहीं, यूक्रेन ने इस विशेष घटना की जिम्मेदारी लेने वाला कोई स्पष्ट सार्वजनिक बयान अब तक नहीं दिया है.
कुर्स्क परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस के कुर्स्क क्षेत्र में स्थित है और यूक्रेन के साथ सीमा के निकट होने के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यह परमाणु सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील प्रतिष्ठानों में शामिल रहा है. इस घटना पर IAEA ने दोनों पक्षों से सैन्य गतिविधियों में अधिकतम संयम बरतने की अपील की है.