America न्यूक्लियर ट्रायड को करेगा आधुनिक, FY27 बजट में $71 अरब का प्रस्ताव

अमेरिका का बड़ा दांव: न्यूक्लियर ट्रायड आधुनिकीकरण के लिए $71 अरब का बजट प्रस्ताव

America ने अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. वित्त वर्ष 2027 (FY27) के बजट प्रस्ताव में न्यूक्लियर ट्रायड—यानी हवा, ज़मीन और समुद्र आधारित परमाणु हथियार प्रणाली—के आधुनिकीकरण के लिए करीब $71.4 अरब आवंटित किए गए हैं.

सीनेट सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष गवाही देते हुए रक्षा सचिव Pete Hegseth ने कहा कि न्यूक्लियर कमांड, कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम में निवेश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि अगर इस क्षेत्र में गलती होती है, तो उसका असर पूरे रक्षा ढांचे पर पड़ सकता है.

रक्षा सचिव ने Iran के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे खतरों के मद्देनजर अमेरिका को अपनी परमाणु क्षमता मजबूत बनाए रखना जरूरी है. उनके अनुसार, परमाणु हथियारों की मौजूदगी ही अमेरिका के विरोधियों के लिए एक रणनीतिक चुनौती बनाती है.

FY27 बजट में वायु-आधारित प्रणाली के तहत B-21 Raider के लिए $6.1 अरब का प्रावधान किया गया है. यह स्टील्थ बॉम्बर पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे भविष्य की एयर स्ट्राइक क्षमता का प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है.

Pete Hegseth
Pete Hegseth

जमीन आधारित प्रणाली के लिए Sentinel ICBM कार्यक्रम पर $4.6 अरब खर्च किए जाएंगे. यह प्रोजेक्ट पुराने Minuteman III मिसाइल सिस्टम को बदलने के लिए है, जिसमें 400 मिसाइलों और 450 साइलो की तैनाती की योजना है.

समुद्री क्षेत्र में Columbia-class submarine के लिए $16.2 अरब का बजट रखा गया है. यह पनडुब्बियां मौजूदा Ohio-class submarine की जगह लेंगी और अमेरिका की समुद्री परमाणु क्षमता को मजबूत करेंगी.

इसके अलावा, लॉन्ग रेंज स्टैंड-ऑफ वेपन (LRSO) के लिए भी $1.5 अरब का प्रावधान किया गया है, जो एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल सिस्टम का आधुनिक विकल्प होगा.

रक्षा सचिव ने कहा कि अमेरिका अपने डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को भी मजबूत कर रहा है, ताकि युद्ध की स्थिति में तेजी से हथियार और सैन्य संसाधन तैयार किए जा सकें. उन्होंने दावा किया कि Donald Trump के नेतृत्व में रक्षा उत्पादन प्रणाली को फिर से मजबूत किया जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और परमाणु संतुलन की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

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