Indian Coast Guard में शामिल हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS Aparajit, 27 नॉट से अधिक होगी रफ्तार

Indian Coast Guard में शामिल हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS Aparajit, 27 नॉट से अधिक होगी रफ्तार

भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने अपनी समुद्री सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 31 अक्टूबर 2026 को स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ICGS Aparajit को अपने बेड़े में शामिल किया. Goa Shipyard Limited (GSL), गोवा में इस पोत का जलावतरण नहीं, बल्कि औपचारिक कमीशनिंग की गई है. यह पोत भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है.

ICGS अपराजित गोवा शिपयार्ड लिमिटेड की ओर से भारतीय तटरक्षक बल के लिए बनाए गए आठ फास्ट पेट्रोल वेसल की श्रृंखला का आठवां और अंतिम पोत है. इस श्रृंखला के सातवें पोत ICGS अजित को 9 अक्टूबर 2026 को भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया था. दोनों पोतों का निर्माण देश की तटीय निगरानी, समुद्री गश्त और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है.

ICGS Aparajit की तकनीकी खूबियां और क्षमता

ICGS अपराजित की लंबाई लगभग 52 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है. इसका विस्थापन लगभग 320 टन है. यह पोत कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर (Controllable Pitch Propeller-CPP) आधारित प्रणोदन प्रणाली से लैस है. इस तकनीक की मदद से पोत की गति और दिशा को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है. इससे कम गति पर भी पोत को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने और सीमित समुद्री क्षेत्रों में बेहतर मैन्युवरेबिलिटी हासिल करने में मदद मिलती है. इस श्रेणी के पोतों में भारत में पहली बार CPP आधारित प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है.

Indian Coast Guard में शामिल हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS Aparajit, 27 नॉट से अधिक होगी रफ्तार
फोटो – Indian Coast Guard

इस श्रेणी के पोतों की अधिकतम गति लगभग 27 नॉट बताई गई है. एक नॉट लगभग 1.852 किलोमीटर प्रति घंटे के बराबर होता है. इस हिसाब से 27 नॉट की गति लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. यह क्षमता समुद्र में तेजी से गश्त करने, संदिग्ध जहाजों का पीछा करने और आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने के लिए महत्वपूर्ण है.

इस परियोजना के पहले पोत ICGS आदम्य में दो कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर के साथ स्वदेशी गियरबॉक्स का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, उसमें 30 मिमी CRN-91 नौसैनिक तोप और दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल गन लगाई गई हैं. पोत में इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम (IBS), इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम (IPMS) और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम (APMS) भी दिए गए हैं. ये प्रणालियां पोत के संचालन, निगरानी और विभिन्न उपकरणों के प्रबंधन में मदद करती हैं. हालांकि, ICGS अपराजित पर इन सभी हथियारों और प्रणालियों की अलग से पुष्टि करने वाला विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है.

समुद्री सुरक्षा में निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

ICGS अपराजित को भारतीय तटरक्षक बल की कई महत्वपूर्ण परिचालन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसका इस्तेमाल मछली पकड़ने वाली गतिविधियों की निगरानी, भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone-EEZ) की सुरक्षा, तटीय गश्त और अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए किया जा सकेगा.

इसके अलावा, यह पोत समुद्र में तस्करी और समुद्री डकैती जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने तथा खोज एवं बचाव (Search and Rescue) अभियानों में भी भूमिका निभाएगा. भारत के द्वीपीय क्षेत्रों और समुद्री सीमा के आसपास निगरानी बनाए रखने में भी ऐसे पोत महत्वपूर्ण हैं.

Indian Coast Guard में शामिल हुआ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ICGS Aparajit, 27 नॉट से अधिक होगी रफ्तार
फोटो – Indian Coast Guard

विशेष आर्थिक क्षेत्र में भारत को समुद्री संसाधनों और आर्थिक गतिविधियों पर अधिकार प्राप्त है. ऐसे में इस क्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना भारतीय तटरक्षक बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है. फास्ट पेट्रोल वेसल अपनी गति और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता के कारण इन अभियानों में उपयोगी साबित होते हैं.

473 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत हुआ निर्माण

ICGS अपराजित का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने रक्षा मंत्रालय के साथ मार्च 2022 में हुए 473 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत किया है. इस अनुबंध में भारतीय तटरक्षक बल के लिए आठ स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल तैयार किए जाने थे. इन सभी पोतों को Buy (Indian-IDDM) श्रेणी के तहत स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित किया जाना था.

इस परियोजना के तहत पोतों का निर्माण 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के इस्तेमाल के साथ किया गया है. इनके निर्माण में गोवा शिपयार्ड के साथ घरेलू उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भी भागीदारी रही है. इससे देश के रक्षा जहाज निर्माण क्षेत्र में घरेलू आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा मिला है.

इस श्रृंखला के पहले पोत ICGS आदम्य को जून 2025 में भारतीय तटरक्षक बल में शामिल किया गया था. इसके बाद अन्य पोत भी चरणबद्ध तरीके से बेड़े में शामिल किए गए. ICGS अजित को 9 अक्टूबर 2026 को कमीशन किया गया था. अब 31 अक्टूबर को ICGS अपराजित के शामिल होने के साथ गोवा शिपयार्ड की ओर से बनाए जा रहे आठ फास्ट पेट्रोल वेसल की श्रृंखला पूरी हो गई है.

आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी जहाज निर्माण को बढ़ावा

ICGS अपराजित का भारतीय तटरक्षक बल में शामिल होना देश की समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण है. इस परियोजना के तहत गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने पोतों का डिजाइन और निर्माण देश में ही किया है. CPP आधारित प्रणोदन प्रणाली जैसी तकनीकों को शामिल करना भी भारतीय जहाज निर्माण क्षेत्र की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है.

भारत की लंबी समुद्री तटरेखा, महत्वपूर्ण बंदरगाहों, अपतटीय ऊर्जा परिसंपत्तियों और विशेष आर्थिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भारतीय तटरक्षक बल को आधुनिक और तेज प्रतिक्रिया देने वाले पोतों की आवश्यकता है. ICGS अपराजित जैसे स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल इस जिम्मेदारी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

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