रूस ने परमाणु पनडुब्बी से दागी Bulava Missile, 6,000 किमी दूर स्थित परीक्षण रेंज तक पहुंचने का दावा
रूस ने 28 अक्टूबर 2026 को अपनी परमाणु-संचालित रणनीतिक पनडुब्बी जनरलिसिमस सुवोरोव से Bulava Intercontinental Ballistic Missile (ICBM) का परीक्षण किया. रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मिसाइल को ओखोत्स्क सागर में पनडुब्बी के पानी के भीतर रहते हुए दागा गया. इसे रूस के आर्खांगेल्स्क क्षेत्र में स्थित चिझा परीक्षण रेंज की ओर भेजा गया. मंत्रालय ने दावा किया कि मिसाइल के वारहेड निर्धारित समय पर लक्ष्य क्षेत्र में पहुंच गए और परीक्षण सफल रहा. इस प्रक्षेपण का वीडियो भी जारी किया गया है.
रूसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह प्रक्षेपण प्रशांत बेड़े की पनडुब्बी के चालक दल के युद्ध प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत किया गया. ओखोत्स्क सागर रूस के सुदूर पूर्व में स्थित है, जबकि चिझा परीक्षण रेंज देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी लगभग 5,500 से 6,000 किलोमीटर बताई गई है. हालांकि, रूसी मंत्रालय ने मिसाइल की वास्तविक उड़ान दूरी का अलग से विस्तृत आंकड़ा जारी नहीं किया है.
क्या है Bulava Missile?
Bulava Missile रूस की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का एक प्रमुख हथियार है. इसका आधिकारिक नाम R-30 बुलावा है और इसे NATO की पहचान प्रणाली में SS-N-32 के नाम से जाना जाता है. यह पनडुब्बी से दागी जाने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है, जिसे परमाणु वारहेड ले जाने के लिए विकसित किया गया है.
इस मिसाइल को मॉस्को इंस्टीट्यूट ऑफ थर्मल टेक्नोलॉजी ने विकसित किया है. इसमें ठोस ईंधन का इस्तेमाल होता है और इसकी अधिकतम मारक क्षमता सार्वजनिक स्रोतों में लगभग 8,000 से 9,300 किलोमीटर के बीच बताई जाती है. वास्तविक दूरी मिसाइल के पेलोड और उड़ान प्रोफाइल पर निर्भर कर सकती है.
बुलावा एक से अधिक परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है. इसके वारहेड उड़ान के अंतिम चरण में अलग-अलग लक्ष्यों की ओर बढ़ सकते हैं. हालांकि, इस परीक्षण में वास्तविक परमाणु वारहेड इस्तेमाल किए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई है. रूस ने मई 2024 में इस मिसाइल को औपचारिक रूप से सेवा में शामिल किया था.
जिस पनडुब्बी से मिसाइल दागी गई, उसकी खासियत क्या है?

इस परीक्षण में इस्तेमाल की गई जनरलिसिमस सुवोरोव रूसी नौसेना की बोरेई-ए (Project 955A Borei-A) श्रेणी की परमाणु-संचालित रणनीतिक मिसाइल पनडुब्बी है. इसका पहचान नंबर K-553 है. यह रूस के प्रशांत बेड़े में शामिल है और इसका स्थायी ठिकाना कामचटका क्षेत्र में है.
बोरेई-ए श्रेणी की पनडुब्बियों को लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइलों को समुद्र के भीतर से दागने के लिए बनाया गया है. जनरलिसिमस सुवोरोव में बुलावा मिसाइलों के लिए 16 लॉन्च ट्यूब हैं. इसके अलावा, इसमें टॉरपीडो सहित अन्य हथियार प्रणालियां भी मौजूद हैं. परमाणु रिएक्टर से संचालित होने के कारण यह लंबे समय तक समुद्र में रह सकती है और इसे बार-बार सतह पर आने की जरूरत नहीं होती.
रूस के लिए क्यों अहम है यह परीक्षण?
रूस की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता तीन प्रमुख हिस्सों पर आधारित है, जमीन से दागी जाने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें, पनडुब्बियों से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें और रणनीतिक बमवर्षक विमान. बुलावा मिसाइल समुद्र-आधारित इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
पनडुब्बी के पानी के भीतर रहते हुए मिसाइल दागने का परीक्षण चालक दल की तैयारी और मिसाइल प्रणाली के संचालन की जांच करने में मदद करता है. समुद्र में तैनात रणनीतिक पनडुब्बियां अपनी स्थिति छिपाकर रह सकती हैं, जिससे विरोधी के लिए उनका पता लगाना कठिन हो सकता है. यही क्षमता समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक व्यवस्था को महत्वपूर्ण बनाती है.
हालांकि, एक सफल परीक्षण अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी वास्तविक संघर्ष में पूरी हथियार प्रणाली हर परिस्थिति में उसी तरह काम करेगी. इस परीक्षण के बारे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि रूस ने अपनी रणनीतिक पनडुब्बी से बुलावा मिसाइल दागने का अभ्यास किया और रक्षा मंत्रालय ने इसके परिणाम को सफल घोषित किया.