UN के विश्व मानचित्र प्रस्ताव पर India का रुख साफ, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर कोई समझौता नहीं
UN महासभा ने 4 सितंबर 2026 को दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों को उनके वास्तविक भूमि क्षेत्रफल के अनुपात में दिखाने वाले मानचित्रों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने से जुड़ा एक प्रस्ताव को पारित किया है. India ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया है, लेकिन साथ ही अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है.
भारत के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का प्रस्ताव “Correct the Map: Rebalancing Global Cartographic Representation and Promoting Equitable Representation of the World’s Regions, Particularly Africa” नाम से 4 सितंबर को अपनाया गया.
इस प्रस्ताव का उद्देश्य ऐसे equal-area map projections के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है, जिनमें दुनिया के अलग-अलग महाद्वीपों और क्षेत्रों के भूमि क्षेत्रफल का आपसी अनुपात अपेक्षाकृत सही तरीके से प्रदर्शित होता है. आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले कुछ विश्व मानचित्र प्रक्षेपणों में ध्रुवीय क्षेत्रों के आकार वास्तविकता से काफी बड़े दिखाई दे सकते हैं. ऐसे में equal-area projection में क्षेत्रफल को प्राथमिकता दी जाती है.

किसी खास विश्व मानचित्र को मंजूरी नहीं
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव किसी एक विशेष विश्व मानचित्र या मानचित्र प्रक्षेपण को आधिकारिक तौर पर अपनाता या प्रमाणित नहीं करता. भारत ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी रेखांकित किया कि प्रस्ताव का संबंध राजनीतिक मानचित्रण से नहीं है. यानी इसमें अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों को लेकर कोई निर्णय नहीं किया गया है.
India ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर दो टूक बात कही
भारत ने मतदान के दौरान अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में उसकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत का संप्रभु क्षेत्र, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भी शामिल हैं, भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए.
भारत ने कहा कि देश की सीमाओं या क्षेत्रीय स्थिति का कोई भी गलत अथवा भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है.
रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर उसकी स्थिति स्पष्ट, लगातार एक जैसी और गैर-परक्राम्य (non-negotiable) है. भारत ने साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि प्रस्ताव के पक्ष में मतदान का अर्थ किसी विशेष मानचित्र, मानचित्र प्रक्षेपण या भारत की राष्ट्रीय सीमाओं के किसी वैकल्पिक चित्रण का समर्थन करना नहीं है.
इस तरह भारत ने एक ओर संयुक्त राष्ट्र के समान क्षेत्रफल वाले मानचित्रों को बढ़ावा देने के सिद्धांत का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर यह भी साफ कर दिया है कि इससे भारत की आधिकारिक सीमाओं और क्षेत्रीय दावों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आता.