West Bengal में ₹3,500 करोड़ की 5 रक्षा परियोजनाओं का आगाज, GRSE बनाएगा बड़े युद्धपोत और कमर्शियल शिप
रक्षा मंत्री Rajnath Singh और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 23 अगस्त 2026 को कोलकाता स्थित GRSE भवन से Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) और Yantra India Limited (YIL) की पांच विस्तार परियोजनाओं का वर्चुअल भूमि पूजन किया. इन परियोजनाओं में कुल करीब ₹3,500 करोड़ का निवेश किया जाएगा.
इन पांच परियोजनाओं में तीन GRSE की हैं, जिनका उद्देश्य भारत की युद्धपोत निर्माण, जहाज मरम्मत और व्यावसायिक जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाना है. वहीं, YIL की दो परियोजनाएं रक्षा और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए जरूरी धातुकर्म एवं फोर्जिंग क्षमता को मजबूत करेंगी. सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रोजगार के साथ-साथ MSME और सहायक उद्योगों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे.
रायचक में बनेगा GRSE का बड़ा शिपबिल्डिंग हब

पूरे विस्तार कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण परियोजना दक्षिण 24 परगना के रायचक में विकसित होने वाला नया शिपबिल्डिंग हब है. GRSE इस परियोजना पर ₹2,500 करोड़ से अधिक खर्च करेगा.
GRSE ने श्यामाप्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता से रायचक में करीब 32 एकड़ जमीन लीज पर ली है. इस साइट पर करीब 356 मीटर लंबा वाटरफ्रंट, 96 मीटर की मौजूदा जेट्टी और 8 से 10 मीटर का ड्राफ्ट उपलब्ध है, जो बड़े जहाजों के निर्माण के लिहाज से महत्वपूर्ण है. रायचक में प्रस्तावित सुविधा में 200 मीटर लंबा ड्राई डॉक, 200 मीटर की स्लिपवे, 200 मीटर का शिप लॉन्चिंग पैड, 120 और 86 मीटर की दो जेट्टी तथा ब्लॉक फैब्रिकेशन और हल रिपेयर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
सबसे खास बात यह है कि इस सुविधा के तैयार होने के बाद GRSE 200 मीटर तक लंबे युद्धपोत और 60,000 डेडवेट टन (DWT) तक के व्यावसायिक जहाज बनाने में सक्षम होगा. इससे कंपनी को बड़े युद्धपोतों के निर्माण के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाज निर्माण बाजार में भी उतरने की क्षमता मिलेगी.
अगली पीढ़ी के बड़े युद्धपोतों के लिए बढ़ेगी क्षमता

रायचक परियोजना का महत्व केवल व्यावसायिक जहाजों तक सीमित नहीं है. GRSE की नई क्षमता उसे भविष्य में बड़े और अगली पीढ़ी के युद्धपोतों, जिसमें बड़े विध्वंसक जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं, के निर्माण के लिए प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस विस्तार को भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग और जहाज मरम्मत (MRO) हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. उनके मुताबिक, दुनिया में जहाज निर्माण क्षमता की मांग और उपलब्ध क्षमता के बीच उभर रहा अंतर भारत के लिए बड़ा अवसर है.
शालीमार और किद्दरपोर में भी बढ़ेगी क्षमता
GRSE ने हावड़ा के शालीमार स्थित चार एकड़ के Timber Pond परिसर के कायाकल्प के लिए करीब ₹100 करोड़ का निवेश तय किया है. यहां 130 मीटर लंबे ड्राई डॉक को फिर से विकसित किया जाएगा और 120 मीटर की नई स्लिपवे बनाई जाएगी. इसका इस्तेमाल मध्यम आकार के जहाजों के निर्माण और मरम्मत के लिए किया जाएगा.
इसके अलावा कोलकाता के किद्दरपोर डॉक में Damodar सुविधा को विकसित करने के लिए करीब ₹70 करोड़ खर्च किए जाएंगे. यहां मध्यम आकार के जहाजों की मरम्मत के साथ इलेक्ट्रिक फेरी और छोटे जलयानों के निर्माण की क्षमता विकसित की जाएगी. यह परियोजना GRSE की जहाज मरम्मत और छोटे एवं मध्यम जहाज निर्माण क्षमता को बढ़ाएगी.
YIL में 3,000 टन की नई फोर्जिंग प्रेस

पांच परियोजनाओं में से दो Yantra India Limited (YIL) के ईशापुर स्थित Metal and Steel Factory में स्थापित की जाएंगी. इन दोनों परियोजनाओं पर ₹750 करोड़ से अधिक खर्च होंगे.
पहली परियोजना में ₹277.59 करोड़ की लागत से 3,000 टन क्षमता वाली Heavy Duty Hydraulic Open Die Forging Press स्थापित की जाएगी. यह मौजूदा 2,650 टन की पुरानी प्रेस की जगह लेगी, जो 1976 से काम कर रही है. नई प्रेस से गन बैरल, गोला-बारूद के महत्वपूर्ण घटकों और अन्य भारी रक्षा फोर्जिंग का घरेलू उत्पादन किया जा सकेगा. इससे रणनीतिक रक्षा सामग्री के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी.
रेडियल फोर्जिंग प्लांट बनाएगा रणनीतिक कंपोनेंट
YIL की दूसरी परियोजना ₹473.84 करोड़ की लागत से Radial Forging Plant की स्थापना है. यह संयंत्र सुपर-अलॉय फोर्जिंग, एरियल बमों के लिए हॉलो ट्यूब, भविष्य की ऑर्डिनेंस प्रणालियों के घटक, उच्च क्षमता वाले रेलवे एक्सल और न्यूक्लियर रिएक्टर के महत्वपूर्ण कंपोनेंट तैयार करने में सक्षम होगा. इस संयंत्र में Industry 4.0 मानकों और ऊर्जा-कुशल तकनीकों को अपनाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य रणनीतिक फोर्जिंग और रेलवे से जुड़े महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात को कम करके घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है.
आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए क्यों अहम है यह विस्तार?

इन पांच परियोजनाओं को एक साथ देखा जाए तो इनका असर केवल GRSE और YIL की उत्पादन क्षमता बढ़ने तक सीमित नहीं रहेगा। रायचक में बड़े युद्धपोत और व्यावसायिक जहाज बनाने की क्षमता, शालीमार और किद्दरपोर में जहाज मरम्मत एवं छोटे जहाजों की क्षमता और ईशापुर में महत्वपूर्ण फोर्जिंग उत्पादन, ये सभी मिलकर भारत के समुद्री और रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करेंगे.
इससे भारतीय नौसेना और अन्य समुद्री सुरक्षा जरूरतों के लिए घरेलू जहाज निर्माण क्षमता बढ़ेगी, जबकि रक्षा उद्योग को जरूरी धातु एवं फोर्जिंग कंपोनेंट देश में ही उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. साथ ही, सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं से रोजगार बढ़ेगा और MSME तथा ancillary industries के लिए नई सप्लाई-चेन विकसित होगी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर जोर दिया कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं, बल्कि युद्धक्षेत्र की क्षमता बढ़ाने वाला multiplier है. पश्चिम बंगाल में शुरू किया गया यह करीब ₹3,500 करोड़ का विस्तार कार्यक्रम इसी लक्ष्य के तहत भारत को रक्षा उत्पादन, जहाज निर्माण और रणनीतिक विनिर्माण के क्षेत्र में अधिक सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.