SIPRI की परमाणु रिपोर्ट ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, India समेत 9 देशों ने बढ़ाई Nuclear Weapons, खत्म हो रहा हथियार घटाने का दौर
दुनिया एक बार फिर ऐसे दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है, जहां परमाणु हथियार केवल प्रतिरोध (Deterrence) का साधन नहीं बल्कि राष्ट्रीय शक्ति के प्रदर्शन का प्रमुख माध्यम बनते जा रहे हैं. स्वीडन स्थित प्रतिष्ठित शोध संस्थान SIPRI (Stockholm International Peace Research Institute) द्वारा जारी SIPRI Yearbook 2026 ने चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों पर बढ़ती निर्भरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव दुनिया को एक नए और अधिक खतरनाक परमाणु युग की ओर धकेल रहे हैं.
SIPRI की रिपोर्ट के अनुसार, दशकों तक चली परमाणु हथियारों की संख्या कम करने की कोशिशें अब कमजोर पड़ती दिख रही हैं. कई देश न केवल अपने परमाणु शस्त्रागार का आधुनिकीकरण कर रहे हैं बल्कि नए परमाणु हथियारों और डिलीवरी सिस्टम को भी तैनात कर रहे हैं.
दुनिया में कितने परमाणु हथियार हैं?

SIPRI के मुताबिक जनवरी 2026 तक दुनिया में कुल लगभग 12,187 परमाणु वारहेड मौजूद थे. इनमें से करीब 9,745 वारहेड सैन्य भंडार में उपयोग के लिए उपलब्ध हैं. लगभग 4,012 वारहेड मिसाइलों और विमानों पर तैनात हैं, जबकि 2,100 से 2,200 के बीच वारहेड हाई अलर्ट स्थिति में रखे गए हैं, जिन्हें बेहद कम समय में लॉन्च किया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, रूस और अमेरिका अब भी दुनिया के लगभग 83 प्रतिशत परमाणु हथियारों के मालिक हैं, लेकिन अन्य परमाणु शक्तियों के तेजी से विस्तार के कारण उनका वैश्विक हिस्सा धीरे-धीरे घट रहा है.
सभी परमाणु शक्तियां बढ़ा रही हैं अपनी ताकत
SIPRI का कहना है कि दुनिया के सभी नौ परमाणु हथियार संपन्न देश— United States, Russia, United Kingdom, France, China, India, Pakistan, North Korea और Israel — ने 2025 के दौरान अपने परमाणु कार्यक्रमों के आधुनिकीकरण को जारी रखा. अधिकांश देशों ने नए परमाणु-सक्षम हथियार सिस्टम विकसित किए या तैनात किए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शीत युद्ध के बाद से पहली बार ऐसा लग रहा है कि दुनिया में कुल परमाणु हथियारों की संख्या में गिरावट का लंबा दौर समाप्त हो सकता है. इसका कारण यह है कि पुराने वारहेड्स को नष्ट करने की गति धीमी हो रही है जबकि नए हथियारों की तैनाती बढ़ रही है.
भारत का परमाणु जखीरा बढ़कर 190 वारहेड हुआ
SIPRI Yearbook 2026 के अनुसार भारत के परमाणु हथियारों की अनुमानित संख्या बढ़कर 190 वारहेड हो गई है, जो पिछले वर्ष 180 थी. रिपोर्ट बताती है कि भारत लगातार अपने रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता (Strategic Deterrence) को मजबूत कर रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार भारत का परमाणु आधुनिकीकरण अब पहले की तुलना में अधिक तेजी से चीन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. देश लंबी दूरी की मिसाइलों, कैनिस्टर आधारित मिसाइल प्रणालियों, MIRV तकनीक और समुद्र आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर काम कर रहा है.

भारत-पाकिस्तान संघर्ष ने बढ़ाई चिंता
SIPRI ने विशेष रूप से इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच संघर्ष का खतरा पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. रिपोर्ट के अनुसार हालिया घटनाओं ने पारंपरिक परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Deterrence) की अवधारणाओं को भी चुनौती दी है.
चीन की बढ़ती परमाणु शक्ति भी चिंता का विषय
हालांकि SIPRI की इस प्रेस विज्ञप्ति का मुख्य फोकस वैश्विक रुझान है, लेकिन रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि चीन लगातार अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार कर रहा है. इसी वजह से एशिया में सामरिक संतुलन तेजी से बदल रहा है और भारत समेत कई देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है.
हथियार नियंत्रण समझौते कमजोर पड़ रहे
SIPRI ने चेतावनी दी है कि परमाणु हथियारों को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय समझौते लगातार कमजोर होते जा रहे हैं. विशेष रूप से अमेरिका और रूस के बीच हथियार नियंत्रण व्यवस्था का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है. New START समझौते के बाद किसी नए व्यापक समझौते की अनुपस्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
विशेषज्ञों की चेतावनी
SIPRI के निदेशक करीम हग्गाग ने कहा कि कई प्रभावशाली नेता अब परमाणु हथियारों को सुरक्षा की गारंटी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, लेकिन इससे गलत आकलन, दुर्घटनावश संघर्ष और परमाणु युद्ध का जोखिम बढ़ सकता है. वहीं परमाणु विशेषज्ञ हांस क्रिस्टेंसन ने कहा कि परमाणु शक्तियां अपने निरस्त्रीकरण वादों से पीछे हटती दिखाई दे रही हैं और इससे नई हथियार दौड़ को बढ़ावा मिल रहा है.
SIPRI Yearbook 2026 का सबसे बड़ा संदेश स्पष्ट है—दुनिया एक बार फिर परमाणु प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर रही है. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर पड़ते हथियार नियंत्रण समझौते और परमाणु हथियारों के तेजी से आधुनिकीकरण ने वैश्विक सुरक्षा को नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है. ऐसे समय में भारत सहित सभी परमाणु शक्तियों की रणनीतियां आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था की दिशा तय करेंगी.