अमेरिकी सेना को मिलेगा नया ‘ROOK’ सिस्टम, BAE Systems विकसित करेगा एडवांस Soft Kill APS

अमेरिकी सेना को मिलेगा BAE Systems का नया ROOK सिस्टम, ड्रोन और मिसाइलों को करेगा जाम

अमेरिकी रक्षा कंपनी BAE Systems को अमेरिकी सेना के लिए नए “Soft Kill Active Protection System (APS)” प्रोग्राम का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. इस सिस्टम का उद्देश्य युद्धक्षेत्र में ग्राउंड व्हीकल्स को ड्रोन, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) और अन्य आधुनिक खतरों से सुरक्षित करना है.

इस प्रोग्राम के तहत BAE Systems अपने अत्याधुनिक “Rapid Optical Observation and Kill (ROOK)” सिस्टम को अमेरिकी सेना के वाहनों में एकीकृत करेगी. यह एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर आधारित सॉफ्ट-किल सिस्टम है, जो दुश्मन के हथियारों को वाहन तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है.

ROOK सिस्टम दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों के गाइडेंस सिस्टम को जाम या भ्रमित कर देता है, जिससे वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं. खास बात यह है कि यह सिस्टम हार्ड-किल इंटरसेप्टर की तरह सीमित गोला-बारूद पर निर्भर नहीं करता, बल्कि “Infinite Magazine Depth” के सिद्धांत पर लगातार काम कर सकता है.

BAE Systems के Optics and Countermeasure Solutions विभाग के निदेशक डेव गिलेस्पी ने कहा कि आधुनिक युद्ध में केवल हार्ड-किल सिस्टम पर्याप्त नहीं हैं. उन्होंने कहा कि लेयर्ड डिफेंस के लिए सॉफ्ट-किल तकनीक बेहद जरूरी हो गई है और ROOK सिस्टम कम लागत में लगातार सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है.

यह नया Soft Kill APS प्रोग्राम अमेरिकी सेना के उन प्रयासों का हिस्सा है, जिनका उद्देश्य तेजी से आधुनिक और अनुकूलनशील एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम को तैनात करना है. इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत BAE Systems अपने Stormcrow™ और TERRA RAVEN™ काउंटरमेजर सिस्टम्स का भी आगे विकास करेगी और वाहनों में परीक्षण के लिए प्रोटोटाइप सिस्टम उपलब्ध कराएगी.

BAE Systems लंबे समय से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वारफेयर और सर्वाइवेबिलिटी सिस्टम्स के क्षेत्र में काम कर रही है. कंपनी के सिस्टम अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सेनाओं द्वारा उपयोग किए जाते हैं. कंपनी के अगली पीढ़ी के सुरक्षा समाधान “Intrepid Shield™” लेयर्ड प्रोटेक्शन कॉन्सेप्ट का हिस्सा हैं.

इन सभी वाहन सुरक्षा प्रणालियों का निर्माण BAE Systems की टेक्सास के ऑस्टिन स्थित अत्याधुनिक फैक्ट्री में किया जाएगा, जबकि रिसर्च और डेवलपमेंट का कार्य न्यू हैम्पशायर के मेरिमैक केंद्र में किया जाएगा.

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