Russia-China की संयुक्त हवाई कार्रवाई से East Asia में तनाव, Japan-South Korea ने fighter jet उतारे
पूर्वी एशिया में सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है. China और Russia के युद्धक विमानों ने Japan के समुद्री क्षेत्र के पास संयुक्त हवाई गश्त की, जिसके बाद जापान और South Korea ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए अपने लड़ाकू विमान हवा में भेजे.
इस संयुक्त उड़ान में चीन के J-16 लड़ाकू विमान और H-6 बॉम्बर्स और रूस के TU-95 स्ट्रेटेजिक बॉम्बर्स और Su-30 फाइटर जेट शामिल रहे.
रिपोर्टों के अनुसार ये विमान जापान के ओकिनावा और मियाको द्वीप क्षेत्र के पास देखे गए. TU-95 बॉम्बर्स को लंबी दूरी और न्यूक्लियर क्षमता के लिए जाना जाता है, इसलिए इसे जापान और दक्षिण कोरिया ने “संवेदनशील गतिविधि” माना.
China की हरकत पर Japan की प्रतिक्रिया

जैसे ही विमान जापान के एयर-डिफेंस जोन के नजदीक पहुँचे Japan Air Self-Defense Force ने फाइटर जेट scramble किए. हवाई निगरानी बढ़ाई गई और सभी विमानों की रूट, ऊँचाई और गतिविधि पर करीब से नजर रखी गई.
जापानी सरकार ने इसे “क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने वाली गतिविधि” बताया.
दक्षिण कोरिया ने भी बढ़ाई निगरानी
दक्षिण कोरिया ने दावा किया कि कई रूसी और चीनी विमान KADIZ (Air-Defense Identification Zone) में दाखिल हुए, लेकिन उन्होंने एयरस्पेस उल्लंघन नहीं बताया. हालांकि फाइटर जेट तैनात कर मूवमेंट ट्रैक किया गया.
इस कदम का संकेत क्या है?

रक्षा विशेषज्ञ इसे एक-साथ दो संदेश मान रहे हैं-
1- चीन का शक्ति प्रदर्शन
जापान-दक्षिण कोरिया को सामरिक दबाव में रखन
2-रूस का एशियाई साझेदारी मजबूत करना
पश्चिमी देशों संग जारी टकराव के बीच चीन के साथ खड़ा दिखाई देना
आगे क्या?
यदि यह संयुक्त पैट्रोल रूटीन बनता है तो—
- जापान अपनी वायु सुरक्षा क्षमता और रडार नेटवर्क बढ़ा सकता है
- दक्षिण कोरिया भी सीमा-निगरानी मिशन बढ़ाएगा
- अमेरिका की सैन्य सक्रियता में भी वृद्धि संभव
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