Brazil में Lula da Silva की ऐतिहासिक जीत, चौथी बार बनेंगे राष्ट्रपति; Flavio Bolsonaro को हराया
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने देश के राष्ट्रपति चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रिकॉर्ड बनाया है. 25 अक्टूबर 2026 को हुए चुनाव के दूसरे चरण में लूला ने दक्षिणपंथी नेता फ्लावियो बोल्सोनारो को हराया. ब्राजील के सुप्रीम इलेक्टोरल ट्रिब्यूनल (TSE) के मुताबिक, लूला को 51.79 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट हासिल हुए. इस जीत के साथ लूला का नया कार्यकाल 2027 से 2030 तक चलेगा.
ब्राजील की चुनावी प्रक्रिया की निगरानी करने वाले TSE के अध्यक्ष कासियो नूनेस मार्केस ने रविवार को दूसरे चरण के नतीजों की घोषणा की. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लूला को 6.42 करोड़ से अधिक वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को लगभग 5.98 करोड़ वोट प्राप्त हुए. इस तरह लूला ने अपने प्रतिद्वंद्वी पर 44 लाख से अधिक वोटों की बढ़त हासिल की.
पहले चरण में पिछड़ने के बाद लूला की वापसी
इस चुनाव की सबसे अहम बात दूसरे चरण में लूला की वापसी रही. चुनाव के पहले चरण में फ्लावियो बोल्सोनारो ने बढ़त हासिल की थी, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया था. इसके बाद लूला के अभियान ने सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए अपने समर्थन को मजबूत करने पर जोर दिया.
ब्राजील की सरकारी समाचार एजेंसी Agência Brasil के मुताबिक, लूला के समर्थन में सोशल मीडिया पर चलाए गए अभियान और देश के विभिन्न शहरों में आयोजित जनसभाओं ने दूसरे चरण में उनकी स्थिति मजबूत करने में भूमिका निभाई. सांसद आंद्रे जानोनेस के नेतृत्व में बनाए गए ‘एक्सेर्सितो दे लूला’ यानी ‘लूला की सेना’ नामक व्हाट्सऐप समूह से भी उनके अभियान को डिजिटल स्तर पर व्यापक पहुंच मिली.

लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब ब्राजील की राजनीति में वामपंथी और दक्षिणपंथी खेमों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा बना हुआ है. चुनाव में आर्थिक असमानता, सामाजिक कल्याण योजनाओं, रोजगार और देश की आर्थिक दिशा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रहे.
कौन हैं Lula da Silva?
लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा का जन्म 27 अक्टूबर 1945 को ब्राजील के पर्नाम्बुको राज्य के गारान्युंस में हुआ था. राजनीति में आने से पहले उन्होंने धातु उद्योग में काम किया और बाद में मजदूर यूनियन के नेता के रूप में राष्ट्रीय पहचान बनाई. 1970 के दशक में श्रमिक आंदोलनों में उनकी भूमिका ने उन्हें ब्राजील की राजनीति में एक प्रमुख चेहरा बना दिया.
लूला ने 1980 में वर्कर्स पार्टी (PT) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उन्होंने 1986 में संघीय प्रतिनिधि के रूप में चुनाव जीता और कई वर्षों तक राष्ट्रपति पद के लिए प्रयास करते रहे. आखिरकार, 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद उन्होंने 2003 में पहली बार राष्ट्रपति पद संभाला. 2006 में वह दोबारा चुने गए और 2010 तक पद पर रहे.
इसके बाद लूला की राजनीतिक यात्रा में बड़ा उतार-चढ़ाव आया. भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में उनकी दोषसिद्धि और जेल की सजा ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े किए. हालांकि, बाद में उनकी दोषसिद्धियां रद्द कर दी गईं और उन्होंने फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का रास्ता बनाया. 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराकर तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीता और जनवरी 2023 में पद संभाला.
अब 2026 में चौथी बार जीत के साथ लूला ब्राजील के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक नेताओं में अपनी जगह और मजबूत कर चुके हैं.
चौथे कार्यकाल में लूला के सामने क्या होंगी चुनौतियां?

चुनाव जीतने के बावजूद लूला के सामने कई बड़ी चुनौतियां रहेंगी. सबसे महत्वपूर्ण चुनौती देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखते हुए सामाजिक कल्याण योजनाओं पर खर्च का संतुलन कायम करना होगा. सरकारी कर्ज, ऊंची ब्याज दरें, घरेलू कर्ज और आर्थिक विकास की रफ्तार उनके प्रशासन के लिए अहम मुद्दे बने रह सकते हैं.
इसके अलावा, ब्राजील की संसद में विपक्ष की मजबूत स्थिति लूला के लिए विधायी फैसलों और आर्थिक सुधारों को लागू करना कठिन बना सकती है. राष्ट्रपति के रूप में उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ समझौते करने और अपनी नीतियों के लिए समर्थन जुटाने की जरूरत होगी.
लूला के सामने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा ब्राजील की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को मजबूत बनाए रखना होगा. उन्होंने अपने चुनाव अभियान में देश की संप्रभुता, औद्योगिक विकास और विभिन्न देशों के साथ संतुलित राजनयिक एवं व्यापारिक संबंधों पर जोर दिया. ऐसे में उनके नए कार्यकाल में अमेरिका, चीन और अन्य प्रमुख आर्थिक साझेदारों के साथ संबंध भी महत्वपूर्ण रहेंगे.
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह जीत?
लूला की जीत लैटिन अमेरिका की राजनीति के व्यापक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. क्षेत्र के कई देशों में वामपंथी और दक्षिणपंथी दलों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज रही है. ऐसे माहौल में ब्राजील जैसे बड़े देश में वामपंथी नेता का दोबारा चुना जाना क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.
ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. लूला का प्रशासन जलवायु परिवर्तन, अमेजन के जंगलों की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और विकासशील देशों के हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहा है. उनके चौथे कार्यकाल में इन विषयों पर ब्राजील की नीति और प्रमुख शक्तियों के साथ उसके संबंधों पर नजर रहेगी.
हालांकि, चुनावी जीत अपने आप में इन नीतियों की सफलता की गारंटी नहीं है. लूला को घरेलू आर्थिक चुनौतियों, संसद में राजनीतिक विरोध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी प्राथमिकताओं को लागू करना होगा.