Indian Navy का नया ASW युद्धपोत ‘मछलीपट्टनम’ लॉन्च, 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार

Indian Navy का नया ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' लॉन्च, 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार

Indian Navy की ताकत में एक और बड़ा ईजाफा हो गया है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने 29 जुलाई 2026 को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW SWC) परियोजना के तहत सातवें युद्धपोत ‘मछलीपट्टनम’ (BY 529) को लॉन्च कर दिया है. इस समारोह में रक्षा मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) के अतिरिक्त सचिव वाइस एडमिरल अतुल आनंद की उपस्थिति में गुलरुख आनंद ने जहाज का औपचारिक जलावतरण किया. इस अवसर पर भारतीय नौसेना, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और रक्षा क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी एवं विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे.

Indian Navy का नया ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' लॉन्च, 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार

मछलीपट्टनम का नाम आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित ऐतिहासिक बंदरगाह शहर मछलीपट्टनम के नाम पर रखा गया है. यह शहर भारत के पूर्वी तट पर अपनी समृद्ध समुद्री विरासत और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व के लिए जाना जाता है. यह युद्धपोत उसी गौरवशाली विरासत का प्रतीक है और भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

Indian Navy का नया ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' लॉन्च, 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार

यह आधुनिक युद्धपोत पानी के भीतर निगरानी (Underwater Surveillance), पनडुब्बी रोधी अभियान (Anti-Submarine Warfare), लो इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) और माइन वॉरफेयर जैसे मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है. इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा मजबूत होगी और समुद्री क्षेत्र की निगरानी (Maritime Domain Awareness) क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

Indian Navy का नया ASW युद्धपोत 'मछलीपट्टनम' लॉन्च, 80% से अधिक स्वदेशी तकनीक से तैयार

‘मछलीपट्टनम’ का लॉन्च ASW SWC परियोजना की सफल प्रगति का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है. इस परियोजना के तहत कुल आठ उन्नत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं. परियोजना में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो रक्षा निर्माण क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की सफलता को दर्शाता है.

इन युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की समुद्री सुरक्षा, तटीय रक्षा और परिचालन क्षमता को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी.

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