China-Saudi Arabia के बीच 5 अरब डॉलर का ड्रोन समझौता: जेद्दा में बनेगा Wing Loong-3, हर साल 48 UAV होंगे तैयार
मध्य-पूर्व में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच China और Saudi Arabia के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार चीन की सरकारी रक्षा कंपनी Aviation Industry Corporation of China ने सऊदी अरब के साथ लगभग 5 अरब डॉलर का ड्रोन समझौता किया है. इस डील के तहत सऊदी अरब के जेद्दा शहर में आधुनिक ड्रोन निर्माण और असेंबली लाइन स्थापित की जाएगी.
इस परियोजना में चीन का उन्नत लड़ाकू ड्रोन Wing Loong‑3 बनाया जाएगा. योजना के मुताबिक नई असेंबली लाइन से हर साल करीब 48 ड्रोन का उत्पादन किया जाएगा.
युद्ध में परखी गई क्षमता के बाद चुना गया ड्रोन
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब ने इस ड्रोन को व्यापक परीक्षण और ऑपरेशनल डेटा के आधार पर चुना. परीक्षणों में 200 से अधिक मिशनों में इन UAV की क्षमता देखी गई. एक ऑपरेशन में केवल 15 मिनट के अंदर 12 ड्रोन ने तीन रडार स्टेशन और तीन बख्तरबंद वाहनों को निशाना बनाया, जिससे इसकी स्ट्राइक क्षमता का प्रदर्शन हुआ.

ड्रोन का इंटेलिजेंट टारगेट-रिकग्निशन सिस्टम मात्र 0.3 सेकंड में लक्ष्य लॉक कर सकता है और इसमें पहले के मॉडलों की तुलना में लगभग 40% बेहतर एंटी-जैमिंग क्षमता बताई गई है.
रेगिस्तानी हालात के लिए खास डिजाइन
मध्य-पूर्व की कठोर जलवायु को ध्यान में रखते हुए इस ड्रोन के इंजन में मल्टी-स्टेज डस्ट प्रोटेक्शन और बेहतर कूलिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह 50°C तक के तापमान और रेत के तूफानों में भी ऑपरेशन कर सकता है.
सऊदी का रक्षा उद्योग मजबूत करने की योजना
इस समझौते में केवल ड्रोन असेंबली ही नहीं, बल्कि धीरे-धीरे फ्लाइट कंट्रोल और एवियोनिक्स तकनीक के ट्रांसफर का भी प्रावधान है. इसका लक्ष्य सऊदी अरब की उस रणनीति को मजबूत करना है जिसके तहत वह 2030 तक अपनी सैन्य जरूरतों का लगभग 50% घरेलू स्तर पर उत्पादन करना चाहता है.
China के लिए भी बड़ा रणनीतिक फायदा
विश्लेषकों के अनुसार यह समझौता चीन के रक्षा निर्यात के लिए भी बड़ा कदम है. इससे मध्य-पूर्व में चीनी ड्रोन को पश्चिमी प्लेटफॉर्म के विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है.
बताया जाता है कि Wing Loong-3 ड्रोन करीब 40 घंटे तक उड़ान भर सकता है और लगभग 10,000 किमी तक निगरानी या मिशन ऑपरेशन करने में सक्षम है, जिससे लाल सागर और फारस की खाड़ी जैसे क्षेत्रों में लगातार निगरानी संभव हो जाती है.
यह 5 अरब डॉलर का ड्रोन समझौता सिर्फ हथियार खरीद नहीं, बल्कि चीन और सऊदी अरब के बीच बढ़ते रणनीतिक रक्षा सहयोग का संकेत माना जा रहा है.