Quad देशों ने आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा पर जारी किया संयुक्त बयान, Indo-Pacific में AI और सप्लाई चेन सहयोग पर दिया जोर
Quad देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और सामरिक सहयोग को मजबूत करने के लिए नई पहल की है. India, USA, Japan और Australia के समूह क्वाड (Quad) ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की है. इसमें चारों देशों ने भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण तकनीकों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है.
यह संयुक्त विज्ञप्ति 31 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान जारी की गई. बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुईं.
वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक दबाव पर चिंता
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में चारों देशों ने महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों की वैश्विक सप्लाई चेन को बाधित करने वाली आर्थिक गतिविधियों पर गंभीर चिंता जताई. इसमें मनमाने ढंग से लगाए जाने वाले निर्यात प्रतिबंधों और गैर-बाजार आधारित नीतियों के कारण पैदा होने वाली अतिरिक्त उत्पादन क्षमता (Overcapacity) का उल्लेख किया गया.
क्वाड देशों ने कहा कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता और समृद्धि के लिए भरोसेमंद और खुली सप्लाई चेन का निर्माण जरूरी है. इसके साथ ही उन्होंने ऐसे बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और किसी भी संकट के दौरान काम करने में सक्षम हो.
होर्मुज और लाल सागर में नौवहन की स्वतंत्रता पर जोर
समुद्री सुरक्षा को आर्थिक समृद्धि से जोड़ते हुए क्वाड देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया.

विज्ञप्ति में कहा गया कि इन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से व्यापार और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए. साथ ही जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षित आवाजाही में किसी तरह की बाधा या टोल नहीं लगाया जाना चाहिए. चारों देशों ने समुद्र के रास्ते आवागमन के अधिकारों और स्वतंत्रताओं को अंतरराष्ट्रीय कानून तथा समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता दोहराई.
AI और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता
क्वाड देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पैक्स सिलिका (Pax Silica) जैसी पहलों को भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया. चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद सुपर इंटेलिजेंस (SI) और AI तकनीकों तक पहुंच बढ़ाने के लिए 85 मिलियन डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा जताया है. यह सहयोग क्वाड SI एक्सेलरेटर के माध्यम से भी आगे बढ़ाया जाएगा.
महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने के लिए भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है. मई 2026 में घोषित क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव फ्रेमवर्क के तहत चारों देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और स्क्रैप से महत्वपूर्ण खनिजों को दोबारा प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं. इसका उद्देश्य किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करना और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए भरोसेमंद रीसाइक्लिंग व्यवस्था विकसित करना है.इस संबंध में अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों को प्राप्त करने वाली सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 10 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है.
ऊर्जा सुरक्षा और बंदरगाहों के विकास में सहयोग
हिंद-प्रशांत क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए सितंबर में पहला क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम आयोजित किया गया था. इसमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ईंधन के स्टॉक को मजबूत करने पर चर्चा हुई.

इसके अलावा फिजी के सुवा, लाउटोका और रोकोबिली बंदरगाहों के आधुनिकीकरण के लिए भी क्वाड देश वहां की सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे के विकास के लिए चारों देशों की ओर से अब तक हिंद-प्रशांत, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में 2,000 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर फेलोशिप प्रदान की जा चुकी हैं.
आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए पहली बार क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम शुरू करने की भी घोषणा की गई है. इस मंच पर चारों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और नीति विशेषज्ञ एक साथ आएंगे. इसका उद्देश्य सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संबंध मजबूत करना तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यावसायिक निवेश और समझौतों को बढ़ावा देना है.
समुद्री सुरक्षा और निगरानी में बढ़ेगा सहयोग
समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में क्वाड देशों ने दूसरे क्वाड-एट-सी शिप ऑब्जर्वर मिशन की सफलता का स्वागत किया. यह मिशन 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक भारत के चेन्नई से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ तक संचालित किया गया. इसमें चारों क्वाड देशों के प्रतिनिधियों ने भारतीय तटरक्षक बल के एक अपतटीय गश्ती पोत पर सवार होकर हिस्सा लिया. इस मिशन को समुद्री क्षेत्र में आपसी तालमेल और अवैध समुद्री गतिविधियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया.
चारों देशों ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन पहल के तहत अपना पहला संयुक्त अभ्यास 2027 में सी ड्रैगन अभ्यास के दौरान आयोजित करने की योजना भी जताई. इसका उद्देश्य समुद्री सूचनाओं के आदान-प्रदान और समुद्री क्षेत्र की निगरानी क्षमता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत करना है. इसके अलावा 2027 की शुरुआत में क्वाड मैरीटाइम ट्रेनिंग इनिशिएटिव (MAITRI) के तहत पहला मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस ट्रैक 1.5 सिम्पोजियम आयोजित किया जाएगा.
सेमीकंडक्टर, 5G और 6G तकनीक पर भी साझेदारी

महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में क्वाड देशों ने भरोसेमंद संचार नेटवर्क विकसित करने पर सहमति जताई. इसके तहत 5G, 6G, ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Open RAN) और AI आधारित संचार तकनीकों में सहयोग बढ़ाया जाएगा.
चारों देश उन्नत सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर की सुरक्षित एवं मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने के लिए भी नई पहल शुरू करेंगे. इसके तहत उन महत्वपूर्ण बिंदुओं की पहचान की जाएगी, जहां सप्लाई चेन में बाधा आने से वैश्विक उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इसके साथ ही डिजिटल पहचान के मानकों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग आगे बढ़ाने पर सहमति जताई गई.
साइबर अपराध और आपदा प्रबंधन पर भी साझा प्रतिबद्धता
क्वाड विदेश मंत्रियों ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर ठगी के बढ़ते नेटवर्क पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने ऐसे आपराधिक समूहों की निंदा की, जो लोगों की तस्करी करके उन्हें जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी के काम में लगाते हैं. चारों देशों ने इन नेटवर्क को खत्म करने और इनके संचालकों को जवाबदेह ठहराने की प्रतिबद्धता जताई.
इसके अलावा 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई अचानक बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई. संयुक्त विज्ञप्ति में नेपाल में बचाव अभियान के दौरान भारत की अग्रणी भूमिका को भी स्वीकार किया गया. क्वाड देशों ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अपनी साझा क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया. इसी दिशा में ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका नवंबर 2026 में भारत में आयोजित होने वाले वार्षिक संयुक्त मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभ्यास (AJHE-26) में पर्यवेक्षक भेजेंगे.
बैठक के अंत में चारों विदेश मंत्रियों ने क्वाड नेताओं के अगले शिखर सम्मेलन और अगली विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित करने की दिशा में आगे बढ़ने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए आपसी समन्वय बनाए रखने पर सहमति जताई.