श्री विजयपुरम में BIMSTEC के पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास के लिए पहुंचे श्रीलंका और म्यांमार के युद्धपोत
Indian Navy ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है. श्री विजयपुरम (पूर्व में पोर्ट ब्लेयर), अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में आयोजित पहले BIMSTEC Maritime Security Exercise (BIMSTEC-2026) में भाग लेने के लिए श्रीलंका और म्यांमार के युद्धपोत पहुंच गए हैं. भारतीय नौसेना ने श्रीलंका के नौसैनिक पोत SLNS Gajabahu और म्यांमार के युद्धपोत UMS King Aung Zeya का श्री विजयपुरम में स्वागत किया.
इस बहुपक्षीय समुद्री सुरक्षा अभ्यास की मेजबानी भारत कर रहा है. इसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग, आपसी समन्वय और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है. भारतीय नौसेना के अनुसार, यह अभ्यास क्षेत्र के देशों को समुद्री सुरक्षा से जुड़ी जटिल और सीमा-पार चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने के लिए एक साझा मंच प्रदान करेगा.
30 अक्टूबर से 3 नवंबर तक आयोजित हो रहा है अभ्यास

पहला BIMSTEC Maritime Security Exercise 30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है. इसका आयोजन अंडमान और निकोबार कमान (Andaman and Nicobar Command) के सहयोग से श्री विजयपुरम में किया जा रहा है. श्रीलंका नौसेना के आधिकारिक बयान के अनुसार, श्रीलंका का नौसैनिक पोत SLNS Gajabahu 29 अक्टूबर को पोर्ट ब्लेयर पहुंचा था, जहां भारतीय नौसेना ने उसका पारंपरिक नौसैनिक सम्मान के साथ स्वागत किया.
इस अभ्यास में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के सातों BIMSTEC सदस्य देश शामिल हैं. इनमें भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. इन देशों की नौसेनाओं और तटरक्षक बलों के प्रतिनिधि तथा समुद्री संसाधन इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं.
दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है अभ्यास

BIMSTEC Maritime Security Exercise का उद्देश्य केवल नौसैनिक जहाजों के बीच संयुक्त गतिविधियों तक सीमित नहीं है. इसके तहत सदस्य देशों के बीच पेशेवर अनुभवों का आदान-प्रदान, समुद्री सुरक्षा से संबंधित जानकारियों को साझा करना और समुद्र में बेहतर परिचालन समन्वय विकसित करना भी शामिल है.
अंडमान और निकोबार कमान के अनुसार,अभ्यास में हार्बर फेज और सी फेज शामिल हैं. हार्बर फेज में पेशेवर चर्चा, अनुभवों का आदान-प्रदान और परिचालन योजना पर काम किया जाता है, जबकि सी फेज में समुद्र में संयुक्त गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाता है.
समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर रहेगा जोर
इस अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य Maritime Domain Awareness (MDA) यानी समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों की निगरानी और उनसे संबंधित जागरूकता को मजबूत करना है. इसके माध्यम से सदस्य देश समुद्री क्षेत्र में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की पहचान, सूचनाओं के आदान-प्रदान और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर बेहतर समन्वय विकसित कर सकेंगे.
इसके अलावा, अभ्यास में मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR), सीमा-पार समुद्री अपराधों से निपटने, समुद्री प्रदूषण की घटनाओं पर प्रतिक्रिया और तेल एवं खतरनाक पदार्थों के समुद्र में फैलने जैसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
बंगाल की खाड़ी प्राकृतिक आपदाओं, समुद्री यातायात और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है. ऐसे में इस क्षेत्र के देशों के बीच बेहतर समुद्री समन्वय किसी एक देश की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता और आर्थिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है.
BIMSTEC के तहत समुद्री सहयोग को आगे बढ़ाने की पहल

BIMSTEC का पूरा नाम Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation है. यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय संगठन है. इसकी स्थापना 1997 में हुई थी. इसके सदस्य देशों में भारत, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं.
इस संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी, व्यापारिक और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है. बंगाल की खाड़ी इन देशों को समुद्री और आर्थिक रूप से जोड़ती है. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग, बंदरगाह और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मार्ग मौजूद हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में थाईलैंड में आयोजित छठे BIMSTEC शिखर सम्मेलन के दौरान इस समुद्री सुरक्षा अभ्यास की पहल की घोषणा की थी. अब इसके पहले संस्करण का आयोजन उस क्षेत्रीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
इस अभ्यास के माध्यम से भारत और अन्य BIMSTEC सदस्य देश बंगाल की खाड़ी में सुरक्षित, स्थिर और सहयोगपूर्ण समुद्री वातावरण बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रहे हैं.