Ukraine ने लॉन्च की ‘Army of Robots’, अब युद्ध में इंसानों की जगह रोबोट उतारने की तैयारी

यूक्रेन ने शुरू की ‘Army of Robots’, युद्ध में रोबोट की बढ़ेगी भूमिका

Ukraine ने युद्ध के मैदान में रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल को अगले स्तर पर ले जाने के लिए ‘Army of Robots’ पहल शुरू की है. इस पहल का उद्देश्य ऐसे रोबोटिक सिस्टम विकसित करना है जो सैनिकों की जगह युद्ध के सबसे खतरनाक काम कर सकें. यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेनी सेना पहले से ही ग्राउंड रोबोट यानी Unmanned Ground Vehicles (UGVs) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही है.

पूर्व यूक्रेनी रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर को इस पहल की घोषणा की. उन्होंने बताया कि 2022 में शुरू किए गए ‘Army of Drones’ के बाद अब युद्ध में अगली तकनीकी छलांग ‘robotization of warfare’ होनी चाहिए. उनके अनुसार, ड्रोन अब युद्ध के मैदान में 95 प्रतिशत से ज्यादा स्ट्राइक्स में शामिल हैं और यूक्रेन में 700 से ज्यादा UAV निर्माता काम कर रहे हैं.

मायखाइलो फेदोरोव जनवरी 2026 तक यूक्रेन के उप प्रधानमंत्री और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्री थे. 13 जनवरी 2026 को उन्हें डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्रालय से हटाकर रक्षा मंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने जुलाई 2026 में रक्षा मंत्री का पद छोड़ दिया.

घायल सैनिकों की निकासी से लेकर हमले तक

‘Army of Robots’ के तहत रोबोटों को सिर्फ सामान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि कई जोखिम वाले सैन्य मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. इनमें घायल सैनिकों को निकालना, गोला-बारूद पहुंचाना, माइन बिछाना और हटाना, टोही करना, सैन्य ठिकानों की रक्षा करना और लक्ष्यों पर हमला करना शामिल है.

फेदोरोव ने जिस अवधारणा की बात की है, उसमें पहले सेंसर किसी खतरे का पता लगाएगा और उसके बाद रोबोट उस खतरे वाले क्षेत्र में प्रवेश करेगा. यानी जिस काम के लिए आज सैनिक को सीधे जोखिम उठाना पड़ता है, वहां भविष्य में मशीन को आगे भेजने की कोशिश होगी.

इसमें ह्यूमनॉइड रोबोटों को भी शामिल करने की योजना बताई गई है. यूक्रेनी रिपोर्टों के मुताबिक, ऐसे रोबोटों से मशीन गन को दोबारा लोड करने, बैटरी बदलने या सेंसर लगाने जैसे सरल काम कराने की भी कल्पना की जा रही है.

Ukraine पहले से युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है ग्राउंड रोबोट

‘Army of Robots’ का मतलब यह नहीं है कि यूक्रेन पहली बार युद्ध में रोबोट उतारने जा रहा है. यूक्रेन पहले से ही UGVs का इस्तेमाल लॉजिस्टिक्स, गोला-बारूद पहुंचाने, घायल सैनिकों की निकासी, इंजीनियरिंग और युद्धक अभियानों में कर रहा है.

यूक्रेन के Defence Procurement Agency के मुताबिक, 2026 में अब तक 22,000 से ज्यादा UGVs के लिए कॉन्ट्रैक्ट किए जा चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा लॉजिस्टिक्स सिस्टम हैं, जबकि इंजीनियरिंग और कॉम्बैट सिस्टम भी शामिल हैं. जून 2026 में यूक्रेनी सैन्य इकाइयों ने ग्राउंड रोबोटिक सिस्टम के जरिए 16,600 से ज्यादा लॉजिस्टिक्स और इवैक्यूएशन मिशन किए थे.

अमेरिकी वेस्ट पॉइंट के मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट के सितंबर के विश्लेषण के अनुसार, यूक्रेन पिछले दो वर्षों में ग्राउंड रोबोटों के सीमित प्रयोग से आगे बढ़कर हजारों UGVs के इस्तेमाल तक पहुंच चुका है. इनका उपयोग लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग और इन्फैंट्री सपोर्ट के साथ-साथ कुछ हमलावर भूमिकाओं में भी किया जा रहा है.

युद्ध के तरीके में क्या बदलाव आ सकता है?

इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव यह हो सकता है कि युद्ध के मैदान में मानव सैनिक और मशीन के बीच काम का बंटवारा बदलने लगे. अगर रोबोट गोला-बारूद पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, माइन-क्लीयरेंस और टोही जैसे काम लगातार करने लगते हैं, तो सैनिकों को सीधे खतरे वाले क्षेत्र में कम जाना पड़ेगा.

इसका दूसरा प्रभाव युद्ध की लॉजिस्टिक्स और ऑपरेशनल क्षमता पर पड़ सकता है. यूक्रेन पहले ही ग्राउंड रोबोटों का इस्तेमाल ऐसे कामों में कर रहा है जिनमें बार-बार सैनिकों और वाहनों को जोखिम वाले इलाकों में भेजना पड़ता है.

तीसरा बदलाव युद्धक रोबोटों के क्षेत्र में हो सकता है. अगर एक ही नेटवर्क में ड्रोन, ग्राउंड रोबोट और दूसरे मानवरहित सिस्टम आपस में जुड़कर काम करने लगें, तो निगरानी, लक्ष्य की पहचान, हमला और आपूर्ति जैसे अलग-अलग कामों को एक साथ संचालित करना संभव हो सकता है. ‘Army of Robots’ के तहत इसी तरह के एक व्यापक रोबोटिक इकोसिस्टम को विकसित करने की बात कही गई है.

हालांकि, अभी इसे पूरी तरह तैयार ‘रोबोटिक सेना’ नहीं कहा जा सकता. मौजूदा UGVs का वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन फेदोरोव की नई पहल मुख्य रूप से इस क्षमता को और विकसित करने, नई तकनीक बनाने, सेना के साथ उसका परीक्षण करने और सफल सिस्टम को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की योजना है.

इसका मतलब यह है कि यूक्रेन अब ड्रोन युद्ध से आगे बढ़कर ग्राउंड रोबोटिक्स को भी युद्ध की स्थायी क्षमता बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. अगर यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल होता है, तो युद्ध में सैनिकों के साथ मशीनों की भूमिका केवल सहायक नहीं रहेगी, बल्कि कुछ खतरनाक मिशनों में मशीनें सीधे मानव सैनिकों की जगह ले सकती हैं.

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